बंगाल में बड़ा कानून! बिना मुकदमे 12 महीने तक हिरासत का बिल विधानसभा में पेश
पश्चिम बंगाल सरकार ने एक नए विधेयक को विधानसभा में पेश किया है, जिससे असामाजिक तत्वों को बिना मुकदमे के 12 महीने तक एहतियातन हिरासत में रखने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके अलावा, सरकार ने सीबीआई को पूरी स्वतंत्रता देने, जनगणना शुरू करने, कल्याणकारी योजनाओं पर रोक लगाने और केंद्रीय योजनाओं को तेजी से लागू करने का फैसला किया है. यहां तक कि कानून व्यवस्था के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव किया गया है और भारतीय न्याय संहिता को पूरी तरह लागू कर दिया गया है.

सौजन्य से:- ABP News
Suvendu Adhikari Govt: बंगाल में बड़ा कानून! बिना मुकदमे 12 महीने तक हिरासत का बिल विधानसभा में पेश
पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के सरकार में कई बड़े नीतिगत फैसले लिए गए हैं. जानिए CBI जांच, BNS लागू करने, केंद्रीय योजनाओं और मदरसा सर्वे जैसे बड़े फैसलों की पूरी जानकारी.
पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के सरकार ने हाल ही में कई बड़े और नीतिगत फैसले लिए गए हैं. ताजा फैसलों में एक ऐसा विधेयक भी शामिल है, जिसे विधानसभा में पेश किया गया है. इस विधेयक में असामाजिक तत्वों को बिना मुकदमे के 12 महीने तक एहतियातन हिरासत में रखने का प्रस्ताव रखा गया है. इससे पहले भी सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं, जिनकी वजह से राज्य की कई पुरानी योजनाओं और नीतियों में बदलाव देखने को मिला है.
सरकार के प्रमुख फैसलों में सबसे बड़ा फैसला सीबीआई जांच को पूरी स्वतंत्रता देने का बताया जा रहा है. इस फैसले के बाद सीबीआई को भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करने में पूरी छूट दी गई है. इसके अलावा राज्य में जनगणना शुरू करने का फैसला भी कैबिनेट स्तर पर लिया गया है. माना जा रहा है कि इससे राज्य की आबादी और सामाजिक स्थिति से जुड़ी नई जानकारी सामने आएगी.
ये भी पढ़ें: कोलंबो की भारत-पाकिस्तान सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ? विदेश मंत्रालय ने दिया ये हैरान करने वाला जवाब
कल्याणकारी योजनाओं पर रोक लगाने का फैसला
सरकार ने धर्म के आधार पर चल रही कई कल्याणकारी योजनाओं पर रोक लगाने का भी फैसला लिया है. साथ ही ओबीसी सूची की समीक्षा करने का निर्णय भी लिया गया है. एक और बड़ा फैसला केंद्रीय योजनाओं को लेकर लिया गया है. राज्य में जो केंद्रीय योजनाएं लंबे समय से लंबित थीं, उन्हें जल्द लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही सीमा क्षेत्रों में फेंसिंग के लिए बीएसएफ को जमीन उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है.
कानून व्यवस्था के क्षेत्र में बड़ा बदलाव
कानून व्यवस्था के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव किया गया है. पश्चिम बंगाल में भारतीय दंड संहिता (IPC) और CrPC की जगह नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) को पूरी तरह लागू कर दिया गया है. इसके अलावा राज्य के सभी मदरसों का सर्वे कराने का आदेश भी दिया गया है. इस सर्वे का उद्देश्य उनकी कार्यप्रणाली और वैधता की जांच करना बताया जा रहा है. इन सभी फैसलों को राज्य की राजनीति और प्रशासन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आने वाले समय में इनका असर राज्य की व्यवस्था और जनता पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है.
ये भी पढ़ें: Puri Rath Yatra 2026: होटल बुकिंग के नाम पर बड़ा फ्रॉड, 46 फर्जी वेबसाइटें ब्लॉक, श्रद्धालुओं के लिए पुलिस का अलर्ट
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
BRICS सम्मेलन के मद्देनज़र दिल्ली हाई कोर्ट 11 सितंबर को बंद, ट्रायल कोर्ट्स को तीन दिन की छुट्टी

दुमका में राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए जिला जज ने पुलिस से की समन्वय बैठक

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली विशेषज्ञ पैनल को 30 नवंबर तक रिपोर्ट पेश करने का अंतिम आदेश, विस्तार का अनुरोध खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली विशेषज्ञ पैनल को 30 नवंबर 2026 तक रिपोर्ट जमा करने का आदेश, विस्तार का अनुरोध खारिज

ताई निन्ह की जन अदालत ने 73% से अधिक दीवानी मामलों का निपटारा कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की

कानूनी स्नातक ने नौकरी छोड़कर गृहनगर में शहद आड़ू के बाग से समृद्धि लायी

आदिवासी अधिकारों की अनदेखी: जस्टिस लोकुर ने वन‑और पंचायत अधिनियमों के गैर-प्रवर्तन को उजागर किया

ओडिशा जन कांग्रेस ने एमएमडीआर कानून के विरोध में चंडीखोल में बड़ा प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी का आह्वान
ताज़ा ख़बरें
- समस्तीपुर में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत में लंबित ई‑चालानों पर 50% छूट
- इंडस जल समझौते पर पाकिस्तान की हर चाल ठहर गई, भारत का कड़ा रुख अडिग
- नवीन भूमि कानून मसौदा: कागज़ी व इलेक्ट्रॉनिक स्वामित्व प्रमाणपत्र, प्रक्रिया उल्लंघन वाले भूखंडों पर विशेष प्रावधान
- कानून से कार्यान्वयन तक: राष्ट्रीय सभा के निर्णय से प्रशासन में नई सुव्यवस्था
- सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने बताया: अदालतें राष्ट्र की 'अदृश्य रीढ़'
- सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालतों के बकाया मामलों को देखते हुए अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का आदेश दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद रजिस्ट्रार से जांच का निर्देश, न्यायिक अधिकारी पर रिपोर्ट न देने की चेतावनी
- न्यायिक सेवा आयु में बड़ा बदलाव: 60 साल से बढ़ाकर 62 साल, मध्यप्रदेश सहित सात राज्यों में लागू

