सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया, राम मंदिर चंदा विवाद की जांच के लिए पुनः खुलने के बाद होगी सुनवाई
राम मंदिर ट्रस्ट पर कथित दान राशि के गबन की जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया। दान राशि में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने की मांग की गई थी, साथ ही केंद्र और राज्य सरकार से उचित कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
राम मंदिर चंदा विवाद: तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, अवकाश के बाद होगी याचिका पर सुनवाई
Amir Ahmad
29 Jun 2026 12:23 PM IST
राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त दान राशि में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया।
सोमवार को आंशिक कार्य दिवस के दौरान जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने से मना करते हुए कहा कि इसकी सुनवाई अदालत के दोबारा खुलने के बाद की जाएगी।
याचिकाकर्ता ने स्वयं अदालत में पेश होकर मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि राम मंदिर के लिए मिले दान के कथित दुरुपयोग के आरोप बेहद गंभीर हैं और इस पर तत्काल सुनवाई आवश्यक है।
इस पर जस्टिस एम. एम. सुंदरेश ने पूछा कि मामले में ऐसी क्या तत्काल आवश्यकता है, जिस पर अभी सुनवाई की जाए।
याचिकाकर्ता ने जवाब में कहा,
"जिस तरह राज्य इस मामले से निपट रहा है, उससे संदेह पैदा होता है।"
हालांकि पीठ इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई और याचिका को अदालत के पुनः खुलने के बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
याचिका में दान राशि के कथित गबन की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई। साथ ही केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को श्रद्धालुओं और दानदाताओं के हितों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश देने की भी मांग की गई।
याचिका में कहा गया कि भले ही दान राशि में कथित गड़बड़ी और अन्य अनियमितताओं के आरोप अंततः सही साबित हों या नहीं, लेकिन इन खबरों ने उन लोगों के बीच गहरी चिंता पैदा की, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन का समर्थन किया या मंदिर निर्माण के लिए योगदान दिया।
याचिका में कहा गया,
"दान राशि और अन्य कथित अनियमितताओं से जुड़ी खबरें सही हों या नहीं, लेकिन उन्होंने उन पीढ़ियों के बीच गहरी चिंता पैदा की है जिन्होंने अयोध्या की गरिमा की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष किया।"
इसी तरह के आरोपों से जुड़ी एक अलग याचिका वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई।
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