यूपी सरकार ने NSA हिरासत रद्द करने के हाईकोर्ट फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द कर 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया और ज़िम्मेदारी जिलाधिकारी मेधा रूपम आदि पर तय की, जिसे यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का इरादा जताया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह जानकारी दी और साथ ही ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी नोटिस के स्पष्टीकरण की मांग की।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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SC में चुनौती देगी यूपी सरकार:NSA रद्द करने का फैसला , हाईकोर्ट ने DM की सैलरी से 5 लाख मुआवजा देने को कहा था
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छात्रा और एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी। यह मामला मु
हाईकोर्ट ने रद्द की थी NSA हिरासत इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की एनएसए के तहत हिरासत को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने उन्हें 5 लाख रुपए मुआवजा देने का भी आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह रकम हिरासत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की तनख्वाह से वसूली जाए। इसमें गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम समेत अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई थी।
सरकार बोली- हाईकोर्ट का फैसला चुनौती देंगे सुनवाई के दौरान जब इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले का जिक्र हुआ, जिसमें गौतमबुद्ध नगर प्रशासन की कार्रवाई को रद्द किया गया था, तो सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट कहा कि सरकार उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है। इससे आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की राह पर है।
ग्रेटर नोएडा के छात्र को नोटिस पर भी सवाल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को जारी नोटिस का मामला भी उठा। सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि नोटिस ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने जारी किया था। यह नोटिस जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में छात्र की भागीदारी को लेकर जारी किया गया था।
CJI ने मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर जताई नाराजगी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के बावजूद कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस कैसे जारी कर दिया। पीठ ने कहा कि इस मामले में ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
DM को लगातार मिल रहे थे मीडिया के सवाल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि नोएडा की जिलाधिकारी को इस मामले में लगातार मीडिया के सवाल मिल रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि ग्रेटर नोएडा के छात्र को नोटिस जिलाधिकारी ने नहीं, बल्कि ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने जारी किया था।
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