ओडिशा जन कांग्रेस ने एमएमडीआर कानून के विरोध में चंडीखोल में बड़ा प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी का आह्वान
ओडिशा जन कांग्रेस ने बताया कि संसद में हाल ही में पारित एमएमडीआर कानून राज्य के आर्थिक अधिकारों पर प्रतिकूल असर डालेगा, विशेष रूप से धारा 9‑डी के तहत पुराने बकाए की वसूली और खनिज संसाधनों पर कर व रॉयल्टी संग्रह का अधिकार प्रभावित होगा। इस कारण संगठन ने 8 सितंबर को जाजपुर जिले के चंडीखोल में विशाल विरोध प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी करने का निर्णय लिया और लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आग्रह किया।

सौजन्य से:- Prabhat Khabar
एमएमडीआर कानून के खिलाफ चंडीखोल में विशाल प्रदर्शन आठ को
जानकारी देते ओडिशा जन कांग्रेस के पदाधिकारी.
ओडिशा जन कांग्रेस ने एमएमडीआर कानून को राज्य के हितों के खिलाफ बताते हुए 8 सितंबर को चंडीखोल में विशाल विरोध प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी का ऐलान किया है।
भुवनेश्वर : संसद में हाल ही में पारित एमएमडीआर कानून, 2026 को राज्य हित के खिलाफ बताते हुए ओडिशा जन कांग्रेस (ओजेजी) ने इसके विरोध में आठ सितंबर को जाजपुर जिले के चंडीखोल में विशाल विरोध प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी करने का निर्णय लिया है. रविवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में ओजेसी मीडिया सेल के अध्यक्ष प्रशांत शतपथी ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नये कानून से ओडिशा के आर्थिक अधिकारों और राजस्व हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है. इसलिए इस कानून को वापस लेने की मांग संगठन ने की है.
पुराने बकाये की वसूली का राज्य का अधिकार प्रभावित होगा
शतपथी के अनुसार, नये कानून में जोड़ी गयी धारा 9-डी से ओडिशा के पुराने बकाये की वसूली का राज्य का अधिकार प्रभावित होगा. उन्होंने दावा किया कि राज्य का यह बकाया एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है. उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज संसाधनों पर कर, सेस और रॉयल्टी आदि वसूलने के राज्य के अधिकारों को भी सीमित किया गया है. उन्होंने कहा कि 2024 में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद राज्यों को खनिज संसाधनों पर स्वतंत्र रूप से कर लगाने का अधिकार मिला था. साथ ही पुराने बकाये की राशि को एक अप्रैल, 2026 से 12 वर्षों के भीतर किस्तों में वसूलने की व्यवस्था की गयी थी. ओजेसी का आरोप है कि नये कानून से इन अधिकारों पर असर पड़ा है.
ओडिशा के 20 भाजपा सांसदों की भूमिका पर भी सवाल उठाया
इस मुद्दे पर ओजेसी ने ओडिशा के 20 भाजपा सांसदों की भूमिका पर भी सवाल उठाया. संगठन ने आरोप लगाया कि लोकसभा में राज्य के हितों को प्रभावित करने वाले इस कानून के खिलाफ भाजपा सांसदों ने आवाज नहीं उठायी. ओजेसी ने भाजपा द्वारा इस मुद्दे पर विरोध नहीं किये जाने की भी आलोचना की. संगठन ने 2004 के भाजपा-बीजद गठबंधन सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय के विधायकों ने ओरीसेड कानून का समर्थन किया था.
लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान
ओजेसी ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और अन्य भाजपा नेताओं के वर्तमान रुख पर सवाल उठाया और दावा किया कि उस समय तत्कालीन विधायक और वर्तमान राष्ट्रपति ने भी ओडिशा के खनिज संसाधनों पर कर लगाने के राज्य के अधिकार का समर्थन किया था. ओजेजी ने राज्य हितों की रक्षा की मांग को लेकर आठ सितंबर को चंडीखोल में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी में लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है. संवाददाता सम्मेलन में ओजेसी के उपाध्यक्ष निकुंज पाशायत, नजीबुर रहमान खान, ओजेसी सेवा संगठन के अध्यक्ष मनोज जेना और किसान मोर्चा के अध्यक्ष संग्राम माझी उपस्थित थे.
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