सुप्रीम कोर्ट में अब 38 जज, सरकार ने कानून संसद से पारित कराया
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ने वाले विधेयक को पहले लोकसभा और अब राज्यसभा से मंजूरी मिल गई है। इस विधेयक के अनुसार, उच्चतम न्यायालय में अब 38 जज होंगे।

सौजन्य से:- Hindustan
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ जाएगी जजों की संख्या, संसद से पास हुआ कानून; SC में अब कितने न्यायधीश?
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पारित हो गया है। इस दौरान विपक्षी दल लगातार हंगामा करते रहे। विपक्षी दलों ने कहा है कि सरकार ने बिल लाने में जल्दबाजी की।
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश समेत जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रावधान वाले विधेयक को संसद से मंजूरी मिल गई है। बुधवार को राज्यसभा ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पास कर दिया। बता दें कि लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है।
इससे पहले राज्य सभा की बैठक दो बार स्थगित होने के बाद बुधवार दोपहर 2 बजे कार्यवाही शुरू हुई। इसके बाद कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक को चर्चा के लिए पेश किया। इस दौरान कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्य राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर लगातार नारेबाजी कर रहे थे। उपसभापति हरिवंश ने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने का आग्रह करते हुए विधेयक पर चर्चा में शामिल होने को कहा, लेकिन हंगामा नहीं थमा।
हंगामे के बीच ही उपसभापति ने विधेयक पर चर्चा शुरू कराई, जिसमें अलग अलग दलों के सांसदों ने हिस्सा लिया। हालांकि चर्चा के दौरान कांग्रेस सहित विपक्ष के विभिन्न दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। बाद में तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, माकपा, झारखंड मुक्ति मोर्चा आदि दलों के सांसद सदन में वापस आ गए और उन्होंने चर्चा में भाग भी लिया।
तेजी से निपटेंगे मामले: मेघवाल
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए मेघवाल ने कहा कि यह विधेयक न्यायिक क्षेत्र में सुधार श्रृंखला की कड़ी है। उन्होंने कहा कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि 1950 में जब सुप्रीम कोर्ट की शुरुआत हुई थी, उस समय मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की कुल संख्या आठ थी, जो अब बढ़कर 38 हो गई है। इससे पहले 2019 में उच्चतम न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी।
क्या बोला विपक्ष
वहीं चर्चा में विभिन्न दलों के सदस्यों ने न्यायिक सुधारों को समय की मांग बताया। साथ ही निचली अदालतों में न्यायाधीशों की संख्या और न्यायपालिका में वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात कही। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और राजद के संजय यादव ने एससी-एसटी के प्रतिनिधत्व का मामला उठाया। इस पर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार जजों की नियुक्ति नहीं करती बल्कि कॉलेजियम करता है इसलिए जो नाम भेजे जाते हैं, वही सरकार करती है।
वहीं राष्ट्रीय जनता दल के संजय यादव ने कहा कि जजों की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए अखिल भारतीय न्यायिक प्रणाली होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी न्यायाधीशों की नियुक्ति किसी परीक्षा के आधार पर नहीं बल्कि कॉलेजियम व्यवस्था से होती है। इसके अलावा कांग्रेस के विवेक तन्खा ने कहा कि सरकार ने यह विधेयक लाने में जल्दबाजी की। उन्होंने सवाल उठाए कि क्या उच्चतम न्यायालय को पूरा सम्मान दिया जाता है और क्या न्यायालय द्वारा दिए गए सभी आदेशों का पालन किया गया है? तृणमूल कांग्रेस की मेनका गोस्वामी ने कहा कि एक बड़ी समस्या यह है कि न्यायपालिका में महिलाओं की नियुक्ति नहीं होती। उन्होंने कहा कि सभी उच्च न्यायालय में 30 फीसदी रिक्तियां हैं और महिला न्यायाधीशों की संख्या केवल 14 फीसदी है।
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Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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