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अनवर ढेबर को मिली अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अवैध कमीशन रैकेट के मामले में कारोबारी अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत दे दी है।

5 अगस्त 2026 को 09:16 pm बजे
अनवर ढेबर को मिली अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त

सौजन्य से:- Jagran

सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, मैनपावर कमीशन घोटाले में कारोबारी अनवर ढेबर को मिली अंतरिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अवैध कमीशन रैकेट के मामले में कारोबारी अनवर ढेबर ...और पढ़ें

HighLights

- सुप्रीम कोर्ट का आदेश- अंतरिम जमानत के दौरान छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे अनवर ढेबर

- शीर्ष अदालत में दो दिग्गज वकीलों के बीच हुई तीखी बहस का नतीजा

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अवैध कमीशन रैकेट के मामले में कारोबारी अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत दे दी।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जायमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने ढेबर को जमानत की शर्त के तौर पर छत्तीसगढ़ से बाहर रहने और ट्रायल के दौरान कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने कारोबारी को उस पते की जानकारी देने का भी निर्देश दिया जहां वे अंतरिम जमानत मिलने के बाद रहेंगे। ढेबर की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 13 मई को ढेबर की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी और कहा था कि आरोपों से राज्य सरकार के कार्पोरेशन के भीतर गहरी जड़ें जमाए हुए और व्यवस्थित भ्रष्टाचार नेटवर्क का संकेत मिलता है। हाई कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक धन से जुड़े आर्थिक अपराधों को अधिक गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बार की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नहीं दे सकते दखल

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) को कोई भी एकतरफा प्रस्ताव पारित करने से रोकने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह बार की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकता।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने आशीष गोपाल गर्ग की याचिका पर सुनवाई से इन्कार करते हुए कहा कि यह मामला एसोसिएशन के आंतरिक कामकाज से जुड़ा है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपनी शिकायतों के लिए एससीबीए की चुनाव समिति से संपर्क करे। गर्ग ने एससीबीए द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रस्ताव पारित करने पर आपत्ति जताई थी। याचिका में मांग की गई थी कि एससीबीए को चुनाव होने तक कोई भी प्रस्ताव पारित करने से रोका जाए।

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