नया पेपर लीक कानून: संसद में पेश होगा बिल, कड़े प्रावधानों से छात्रों को मिलेगी राहत
सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ नए कड़े कानून का मसौदा तैयार किया है, जिसमें दोषियों को 10 साल की कैद और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यह बिल संसद में पेश होगा और यदि संसद नहीं चलती है तो सरकार अध्यादेश ला सकती है।

सौजन्य से:- India TV Hindi
कैबिनेट ने पेपर लीक के खिलाफ नए कड़े कानून के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी। सोमवार को ये बिल संसद में पेश होगा। सरकार जो नया बिल ला रही है, वह 2024 में बने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) एक्ट की जगह लेगा।2024 के क़ानून में पेपर लीक के दोषियों को तीन साल से लेकर अधिकतम पांच साल क़ैद की सज़ा का प्रावधान था, जबकि पेपर लीक का संगठित अपराध करने वालों को 10 साल तक कैद की सज़ा का प्रावधान था।
नए बिल में तीन से पांच साल कैद की सज़ा को बढ़ाकर 10 साल किया गया है, जबकि संगठित अपराध करने वालों को उम्रकैद की सज़ा होगी। अभी पेपर लीक के दोषियों पर अधिकतम एक करोड़ रुपए के जुर्माने का प्रावधान है, नए कानून में जुर्माने की रक़म को बढ़ाकर दस करोड़ रुपए किया गया है। सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में आमूल चूल परिवर्तन करने का फैसला किया है। कल ही NTA के 47 अफसरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई। इनके स्थान पर नये अफसर नियुक्त होंगे।
NTA में सुधार बहुत पहले हो जाने चाहिए थे, पर जानकार कहते हैं कि जिस उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को गुरुवार की रात को हटाया गया, वह किसी को हाथ भी नहीं रखने देते थे। एक तरह से कहा जाय तो वह शिक्षा मंत्रालय के “चंपत राय” थे, सब कुछ अपने नियंत्रण में रखते थे। NEET की परीक्षा विनीत जोशी की देखरेख में हुई थी। पेपर लीक होते ही NTA में बदलाव लाने की कोशिश की गई लेकिन उच्च शिक्षा सचिव ने कुछ होने नहीं दिया।
विनीत जोशी NTA के पहले महानिदेशक थे, उन्होंने ही NTA बनाया। एक समय वह CBSE के चेयरमैन थे और गुरुवार रात तक UGC के अस्थायी चेयरमैन भी थे। सारे विवाद इन्हीं तीन जगहों पर हुए। विनीत जोशी का शिक्षा मंत्रालय से तबादले के साथ ही NTA में सुधार लागू हो गया। प्रधानमंत्री के आदेश पर पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए तीन फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन हो चुका है। ये कोर्ट दिल्ली, औरंगाबाद और नागपुर में खोले गये हैं।
पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून क्यों लाना पड़ा? इसकी एक पृष्ठभूमि है। जब NEET परीक्षाएं शुरू हुई, तो इसके तीन उद्देश्य थे। पहला, अलग-अलग राज्यों में होने वाली एंट्रेंस परीक्षाओं को खत्म करना, दूसरा, प्राइवेट कालेजों द्वारा वसूले जाने वाले कैपिटेशन फी को समाप्त करना, और तीसरा, मेडिकल कालेजों में केवल मैरिट के आधार पर एडमिशन हो, ये सुनिश्चित करवाना।
इरादा नेक था, पर ये हो नहीं पाया। इसे हजारों करोड़ रु. की कोचिंग इंडस्ट्री ने होने नहीं दिया। कोचिंग सेंटर्स को दिलचस्पी थी अपने छात्रों को topper दिखाना, ताकि वे छात्रों के मां-बाप को success rate का लालच दिखाकर लूट सकें।
Paper leak करने वाले माफिया इसी लालच पर आधारित व्यवस्था से पैदा हुए। NEET सिस्टम भी इसीलिए फेल हुआ। क्योंकि पेपर लीक करने वाले बेखौफ थे, पकड़े गए तो बेल हो जाती थी, बिना सबूत के सज़ा नहीं हो सकती थी। पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून बहुत पहले बन जाना चाहिए था। अब देर आए, दुरुस्त आए।
कल हरीश साल्वे ने इंडिया टीवी पर मेरे “आज की बात” शो में कहा था कि अगर संसद हंगामे के कारण ना चले, तो सरकार अध्यादेश लाये। रास्ता जो भी हो, ये कानून जल्दी से जल्दी आना चाहिए, छात्रों को लगे कि उनकी बात का असर हुआ। ये छात्रों का भरोसा जीतने के लिए, परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार लाने के लिए, पेपर लीक जैसी बीमारी को को खत्म करने के लिए सबसे बेहतर विकल्प है।
CJP के छात्रों से बात करने में सरकार ने कोई ego नहीं दिखाई, ये अच्छी बात है। जहां छात्रों ने कहा, वहीं जा कर बात की। छात्रों ने व्यवस्था में सुधार के जो सुझाव दिए, उनका स्वागत किया। ये सुझाव नये पेपर लीक निवारण कानून में और NTA में होने जा रहे सुधारों में नज़र आएंगे। छात्रों का सिस्टम पर भरोसा बढ़ेगा। गुरुवार रात प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों को सीधा संबोधित किया था।
विरोधी दल चाहे जो भी दावे करे, मोदी के video का असर तो हुआ है। मैंने check किया, इस video को Instagram, X और Facebook पर मिलाकर 35 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा, 80 लाख से ज्यादा लोगों ने like किया। अकेले Insta पर 27 करोड़ लोगों ने इस video को देखा और करीब 13 लाख लोगों ने like किया। इसीलिए मोदी ने अपनी सरकार के मंत्रियों से कहा कि वे Instagram पर एक्टिव हों, नई पीढ़ी के लोगों के साथ जुड़े रहें, ये ज़रूरी है।
रही बात सोनम वांगचुक की, ऐसा लगता है कि विरोधी दलों के जो नेता वांगचुक से अनशन खत्म करने की पहले मांग कर रहे थे, असल में वो चाहते थे कि वांगचुक अनशन जारी रखें। CJP का आंदोलन चलाने वाले भी ये जानते हैं कि सोनम वांगचुक के शामिल होने से उन्हें credibility मिली। जब वांगचुक को पुलिस ने उठाया तो आंदोलन तेज हुआ, भीड़ बढ़ी, इसीलिए वो वांगचुक की कीमत को समझते हैं।
इसकी वजह वांगचुक की छवि है। उन पर न NSA लगाने का असर पड़ा, न उन्हें Chinese agent करार देने पर किसी ने विश्वास किया। इसीलिए सोनम वांगचुक और CJP के approach में एक बुनियादी फर्क है। वांगचुक अनुभवी activist और education reformer हैं। इसीलिए उन्होंने किसी बात को ego का मुद्दा नहीं बनाया। सबसे पहले छात्रों की भलाई की बात की और फिर शिक्षा में सुधार पर चिंता चताई। ये एक practical approach है।
CJP के नेता नए हैं लेकिन वो छात्रों का sentiment reflect करते हैं। वो परीक्षा प्रणाली में बदलाव चाहते हैं। उसकी शुरूआत हो गई है। सिर्फ इतना और समझने की जरूरत है कि किसी एक मंत्री को हटाने या उनके हटने से बुनियादी सुधारों पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
ये अच्छी बात है कि सरकार पेपर लीक के मुद्दे पर गंभीरता दिखा रही है। NTA में बदलाव शुरू हो गया है। अब NTA में पारदर्शिता और जबावदेही बढ़ेगी। नये कड़े कानून से पेपर लीक कराने वालों में कानून का खौफ पैदा होगा। इसका असर जरूर दिखेगा। और सबसे बड़ी बात ये है कि आज जो हो रहा है, इसका पूरा श्रेय छात्रों के आंदोलन को मिलना चाहिए। ये नौजवानों के प्रैशर का ही नतीजा है, जिससे सरकार एलर्ट हुई और एक्शन मोड में आई। (रजत शर्मा)
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 24 जुलाई, 2026 का पूरा एपिसोड
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि POCSO की उपधारा का उल्लेख नहीं होने से सजा टिकाऊ ही है

ट्रेन में आग की अफवाह से मृत यात्री के परिवार को मुआवजा

पेपर लीक पर कठोर कानून लाने की तैयारी: सरकार की सख्ती से परीक्षा प्रणाली में सुधार की उम्मीद

आगरा के डीईआई में शोध छात्रा हत्याकांड: अदालत में सुनवाई, अगली तारीख 31 जुलाई

नियमों का पालन करने का ट्राई का निर्देश 'न्यायनिर्णय' नहीं: सुप्रीम कोर्ट

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी बचाने की कोशिश, NTA में बड़े बदलाव और नए सख्त कानून

दहेज मामलों में झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सजा रद्द नहीं हो सकती

प्राइवेट यूनिवर्सिटी कानून में संशोधन का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने कहा- अंतरिम आदेश से सरकार की विधायी प्रक्रिया नहीं रुकेगी
ताज़ा ख़बरें
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई मांगने की याचिका खारिज की
- मध्य प्रदेश की 4 फास्ट-ट्रैक अदालतें, पेपर लीक में त्वरित न्याय का आश्वासन
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन की कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की, एनआईए जांच याचिका खारिज हो गई
- पेपर लीक का कानूनी समाधान नहीं, तकनीक और वैकल्पिक करियर हैं सही निरस्त्रीकरण के लिए सुझाव
- मॉब लिंचिंग पर अलग कानून: जानिए नया कानूनी प्रावधान और इसके महत्व के बारे में
- फास्ट ट्रैक अदालतों की रफ्तार में गिरावट, कम हुई मामलों की सुनवाई!
- फास्ट-ट्रैक अदालतें कितनी तेजी से काम करती हैं? रेप और पॉक्सो केसों में देरी के सवाल का जवाब नहीं
- दक्षिण कोरिया में टेक दिग्गज को भारी नुकसान, पत्नी को 6,221 करोड़ का शेयर

