दक्षिण कोरिया में टेक दिग्गज को भारी नुकसान, पत्नी को 6,221 करोड़ का शेयर
दक्षिण कोरिया की अपीलीय अदालत ने एसके ग्रुप के चेयरमैन चे ताए-वोन को अपनी पत्नी रो सोह-योंग को 6221 करोड़ का शेयर देने का आदेश दिया है। इससे वह देश का सबसे महंगा तलाक बन गया है। अदालत ने कहा कि एसके ग्रुप के शेयर वैवाहिक संपत्ति का हिस्सा हैं और दोनों ने उनके मूल्य बढ़ाने में योगदान दिया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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South Korea: टेक दिग्गज को अदालत से बड़ा झटका, पत्नी को देंगे 6221 करोड़; क्यों बना देश का सबसे महंगा तलाक?
Sat, 25 Jul 2026 05:16 PM IST
Devesh Tripathi
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 25 Jul 2026 05:16 PM IST
सार
दक्षिण कोरिया की अपीलीय अदालत ने एसके ग्रुप के चेयरमैन चे ताए-वोन को तलाक के संपत्ति बंटवारे के तहत पूर्व पत्नी रो सोह-योंग को 944 अरब वॉन नकद देने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि विवाह के दौरान अर्जित एसके ग्रुप के शेयर वैवाहिक संपत्ति का हिस्सा हैं और दोनों ने उनके मूल्य बढ़ाने में योगदान दिया। हालांकि शेयरों का हस्तांतरण नहीं होगा, ताकि कंपनी के प्रबंधन पर असर न पड़े।
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विस्तार
दक्षिण कोरिया की एक अपीलीय अदालत ने शुक्रवार को टेक कंपनी एसके ग्रुप के चेयरमैन चे ताए-वोन को उनकी पूर्व पत्नी रो सोह-योंग को तलाक के संपत्ति बंटवारे के तहत 944 अरब वॉन (6221 करोड़ रुपये) नकद देने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी दोहराया कि चे ताए-वोन के पास मौजूद एसके ग्रुप के शेयर वैवाहिक संपत्ति का हिस्सा हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सियोल हाईकोर्ट ने पहले दिए गए 1.38 ट्रिलियन वॉन के फैसले को घटाकर 944 अरब वॉन कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पहले संपत्ति बंटवारे के अनुपात की दोबारा गणना करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद यह राशि निचली अदालत द्वारा पहले तय किए गए 66.5 अरब वॉन से लगभग 14 गुना अधिक है।
दोनों ने मिलकर बढ़ाई संपत्ति: अदालत
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विवाह के दौरान चे ताए-वोन के नाम पर मौजूद शेयर वैवाहिक संपत्ति हैं, क्योंकि दोनों पति-पत्नी ने उनके निर्माण, संरक्षण और मूल्य बढ़ाने में योगदान दिया। अदालत ने कहा, "चेयरमैन चे के पास मौजूद शेयर विवाह के दौरान उनके नाम पर अर्जित संपत्ति हैं। चेयरमैन चे और निदेशक रो, दोनों ने उनके निर्माण के साथ-साथ उनकी देखरेख और मूल्य बढ़ाने में योगदान दिया।"
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अदालत ने यह भी माना कि जहां चे ताए-वोन के कारोबारी फैसलों से कंपनी का मूल्य काफी बढ़ा। वहीं, रो सोह-योंग ने गृहस्थी संभालने, बच्चों की परवरिश करने और एसके ग्रुप से जुड़ी बाहरी गतिविधियों में भाग लेकर योगदान दिया।
शेयर नहीं, पूरी राशि नकद मिलेगी
अदालत ने निर्देश दिया कि रो सोह-योंग को पूरी राशि नकद दी जाए। इससे चे ताए-वोन अपने एसके ग्रुप के शेयर अपने पास रख सकेंगे। फैसले में कहा गया, "चेयरमैन चे अपने एसके शेयरों के मालिक बने रहेंगे और निदेशक रो के हिस्से की शेष राशि नकद के रूप में दी जाएगी।"
अदालत का मानना था कि अगर कंपनी के शेयर हस्तांतरित किए गए तो इससे दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल एसके ग्रुप पर चे ताए-वोन के प्रबंधन नियंत्रण पर असर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बदला हिसाब
संपत्ति बंटवारे का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद आया, जिसमें दंपती की संपत्ति का दोबारा मूल्यांकन करने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि रो सोह-योंग के पिता और दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति रो ते-वू से जुड़े कथित 30 अरब वॉन के गुप्त फंड को एसके ग्रुप की संपत्ति बनाने में योगदान के रूप में नहीं गिना जा सकता।
हालांकि, अपीलीय अदालत ने पिछली सुनवाई के बाद एसके ग्रुप के शेयरों की कीमत में हुई तेज बढ़ोतरी को ध्यान में रखा। अदालत ने कहा कि कंपनी के दीर्घकालिक विकास में रो सोह-योंग का भी योगदान रहा। अदालत ने कहा, "हमने यह माना कि निदेशक रो के प्रबंधकीय योगदान ने चेयरमैन चे के शेयरों के मूल्य में हुई बढ़ोतरी में भूमिका निभाई।"
कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं
दंपती के तलाक और 2 अरब वॉन की गुजारा भत्ता राशि को दक्षिण कोरिया का सुप्रीम कोर्ट पिछले वर्ष अंतिम रूप दे चुका है। केवल संपत्ति बंटवारे का मुद्दा दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेजा गया था। चे ताए-वोन और रो सोह-योंग, दोनों के पास शुक्रवार के इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। यदि किसी भी पक्ष ने चुनौती दी तो मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में जाएगा।
फैसले के बाद चे ताए-वोन की कानूनी टीम ने कहा कि लिखित आदेश का अध्ययन करने के बाद वह विस्तृत प्रतिक्रिया देगी। वहीं, रो सोह-योंग के वकील अदालत परिसर से बिना कोई टिप्पणी किए चले गए।
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रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सियोल हाईकोर्ट ने पहले दिए गए 1.38 ट्रिलियन वॉन के फैसले को घटाकर 944 अरब वॉन कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पहले संपत्ति बंटवारे के अनुपात की दोबारा गणना करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद यह राशि निचली अदालत द्वारा पहले तय किए गए 66.5 अरब वॉन से लगभग 14 गुना अधिक है।
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दोनों ने मिलकर बढ़ाई संपत्ति: अदालत
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विवाह के दौरान चे ताए-वोन के नाम पर मौजूद शेयर वैवाहिक संपत्ति हैं, क्योंकि दोनों पति-पत्नी ने उनके निर्माण, संरक्षण और मूल्य बढ़ाने में योगदान दिया। अदालत ने कहा, "चेयरमैन चे के पास मौजूद शेयर विवाह के दौरान उनके नाम पर अर्जित संपत्ति हैं। चेयरमैन चे और निदेशक रो, दोनों ने उनके निर्माण के साथ-साथ उनकी देखरेख और मूल्य बढ़ाने में योगदान दिया।"
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अदालत ने यह भी माना कि जहां चे ताए-वोन के कारोबारी फैसलों से कंपनी का मूल्य काफी बढ़ा। वहीं, रो सोह-योंग ने गृहस्थी संभालने, बच्चों की परवरिश करने और एसके ग्रुप से जुड़ी बाहरी गतिविधियों में भाग लेकर योगदान दिया।
शेयर नहीं, पूरी राशि नकद मिलेगी
अदालत ने निर्देश दिया कि रो सोह-योंग को पूरी राशि नकद दी जाए। इससे चे ताए-वोन अपने एसके ग्रुप के शेयर अपने पास रख सकेंगे। फैसले में कहा गया, "चेयरमैन चे अपने एसके शेयरों के मालिक बने रहेंगे और निदेशक रो के हिस्से की शेष राशि नकद के रूप में दी जाएगी।"
अदालत का मानना था कि अगर कंपनी के शेयर हस्तांतरित किए गए तो इससे दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल एसके ग्रुप पर चे ताए-वोन के प्रबंधन नियंत्रण पर असर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बदला हिसाब
संपत्ति बंटवारे का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद आया, जिसमें दंपती की संपत्ति का दोबारा मूल्यांकन करने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि रो सोह-योंग के पिता और दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति रो ते-वू से जुड़े कथित 30 अरब वॉन के गुप्त फंड को एसके ग्रुप की संपत्ति बनाने में योगदान के रूप में नहीं गिना जा सकता।
हालांकि, अपीलीय अदालत ने पिछली सुनवाई के बाद एसके ग्रुप के शेयरों की कीमत में हुई तेज बढ़ोतरी को ध्यान में रखा। अदालत ने कहा कि कंपनी के दीर्घकालिक विकास में रो सोह-योंग का भी योगदान रहा। अदालत ने कहा, "हमने यह माना कि निदेशक रो के प्रबंधकीय योगदान ने चेयरमैन चे के शेयरों के मूल्य में हुई बढ़ोतरी में भूमिका निभाई।"
कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं
दंपती के तलाक और 2 अरब वॉन की गुजारा भत्ता राशि को दक्षिण कोरिया का सुप्रीम कोर्ट पिछले वर्ष अंतिम रूप दे चुका है। केवल संपत्ति बंटवारे का मुद्दा दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेजा गया था। चे ताए-वोन और रो सोह-योंग, दोनों के पास शुक्रवार के इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। यदि किसी भी पक्ष ने चुनौती दी तो मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में जाएगा।
फैसले के बाद चे ताए-वोन की कानूनी टीम ने कहा कि लिखित आदेश का अध्ययन करने के बाद वह विस्तृत प्रतिक्रिया देगी। वहीं, रो सोह-योंग के वकील अदालत परिसर से बिना कोई टिप्पणी किए चले गए।
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