सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आंध्र प्रदेश लोकायुक्त नियुक्ति मामले में हस्तक्षेप से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश लोकायुक्त में निदेशक (कानूनी) की नियुक्ति के खिलाफ दाखिल याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया। मामले में नियुक्ति को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता को अदालत ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश लोकायुक्त नियुक्ति मामले में सुनवाई से किया इनकार, याचिकाकर्ता से कहा- 'हाई कोर्ट जाएं'
इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की.
By Sumit Saxena
Published : July 25, 2026 at 4:14 PM IST
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश लोकायुक्त में पुट्टा मुरली मोहन रेड्डी को निदेशक (कानूनी) नियुक्त किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है. अदालत ने याचिकाकर्ता को इसके बजाय राज्य के उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया है. इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की.
पीठ ने याचिकाकर्ता ताड़ीबोइना वामसी कृष्णा से कहा कि यह मामला पूरी तरह से आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है. पीठ ने कहा कि चूंकि यह मामला राज्य के एक सार्वजनिक कार्यालय (सरकारी पद) से जुड़ा है, इसलिए वह याचिकाकर्ता को संबंधित उच्च न्यायालय में जाने की छूट देगी.
पीठ ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश "कानून को बहुत अच्छी तरह समझते हैं." याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया. वकील ने इस बात पर जोर दिया कि नियुक्ति के आदेशों को रद्द किया जाना चाहिए.
याचिकाकर्ता ने 22 सितंबर 2021 और 29 अगस्त 2023 के आदेशों को रद्द करने और पुट्टा मुरली मोहन रेड्डी को आंध्र प्रदेश (कुरनूल) के लोकायुक्त में निदेशक (कानूनी) के पद से हटाने की मांग की थी. याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी आग्रह किया कि 22 सितंबर 2021 से लेकर अब तक रेड्डी को मिले वेतन और भत्तों को वापस वसूला जाए.
रेड्डी को पहले लोकायुक्त कार्यालय में उप निदेशक (कानूनी) नियुक्त किया गया था और बाद में उन्हें निदेशक के पद पर प्रमोट किया गया था. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि रेड्डी के पास इसके लिए जरूरी योग्यता (एक सेवानिवृत्त जिला और सत्र न्यायाधीश की योग्यता) नहीं थी. वह लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में दो बार अयोग्य घोषित हो चुके थे.
इसे भी पढ़ेंः
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
दक्षिण कोरिया में टेक दिग्गज को भारी नुकसान, पत्नी को 6,221 करोड़ का शेयर

आंध्र प्रदेश लोकायुक्त कार्यालय में नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

अब बिना अनुमति नहीं होगा अदालती सुनवाई की क्लिप्स का इस्तेमाल

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: हमारे दरवाजे प्रत्येक नागरिक के लिए खुले हैं

अधूरे न्याय का संकेत: सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का बंद होना भारत के अघोषित आपातकाल का प्रतीक है

बीसीआई प्रमुख को वकीलों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है

सुप्रीम कोर्ट ने ऑडियो-वीडियो शेयरिंग पर लगाई रोक, अदालत को 24X7 एंटरटेनमेंट चैनल नहीं बनाया जा सकता

विशेष: सीजेआई सूर्यकांत ने 'कॉकरोच' टिप्पणी पर स्पष्टीकरण दिया, मौखिक अदालत की टिप्पणियों की रिपोर्टिंग पर प्रोटोकॉल का आह्वान किया
ताज़ा ख़बरें
- सीजेआई ने दोहराया: कॉकरोच वाक्य केवल फर्जी कानून डिग्रीधारकों के लिए है
- केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगी जल न्यायाधिकरणों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को नए मामले सुनने की
- सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और प्रसार पर लगाई रोक
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा: ट्रांसजेंडरों की नियुक्ति कैसे होगी भले ही भर्ती में तीसरे लिंग की जगह कहीं न हो!
- मणिपुर हिंसा के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने दिया सख्त निर्देश, विशेष अदालतों का प्रस्ताव
- सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर संपादित अदालती कार्यवाही क्लिप के प्रसार पर लगाया प्रतिबंध
- सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही से कमाई पर लगाया रोक, अदालतों को नहीं माना मनोरंजन चैनल
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि POCSO की उपधारा का उल्लेख नहीं होने से सजा टिकाऊ ही है

