नोएडा में सिविल केसों का बिखराव: 30,000 से अधिक मामलों का इंतज़ार, 37 साल की देरी
ग्रेटर नोएडा की सिविल अदालतों में 30,028 मामले पेंडिंग हैं, जिनमें से आधे से अधिक सुनवाई के चरण में हैं। वकीलों की कमी से 7,385 मामलों में देरी हो रही है, जबकि पिछले नौ वर्षों में 67,732 नए केस दायर हुए लेकिन केवल 57,027 निपटे, जिससे 10,705 मामलों का अंतर बना। दो केस 1989 से ही चल रहे हैं, जो 37 साल की लंबी प्रतीक्षा को दर्शाते हैं।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Noida News: 37 साल से तारीख पर तारीख, अदालतों में 30 हजार सिविल केस लंबित
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-वकीलों की उपलब्धता नहीं होने से 7,385 मामलों में हो रही देरी
-लंबित मामलों में आधे से अधिक आवेदन सुनवाई के चरण में
मोहम्मद बिलाल
ग्रेटर नोएडा। जिले की अदालतों में सिविल मामलों के बढ़ते बोझ और उनके निपटारे की धीमी रफ्तार ने न्यायिक प्रक्रिया के सामने चुनौती खड़ी की है। अदालतों की सिविल पीठों में कुल 30,028 मामले लंबित हैं। इनमें दो मामले वर्ष 1989 से विचाराधीन हैं। जिन्हें 37 साल बीतने के बाद भी फैसले का इंतजार है। अदालती आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि पिछले 9 वर्षों में नए मामलों के दाखिले और निपटारे के बीच अंतर बढ़ता जा रह है। इस अवधि में 67,732 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 57,027 मामलों का निपटारा किया गया। इस तरह दाखिल मामलों की तुलना में 10,705 मामलों का अंतर रहा।
9 साल में 67 हजार से अधिक नए मामले दर्जः आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018 से 2026 तक सिविल अदालतों में लगातार नए मामले दर्ज होते रहे। वर्ष 2018 में 7,650 मामले दाखिल हुए और 5,519 का निपटारा हुआ। वर्ष 2019 में 8,554 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 7,260 मामलों का निपटारा किया गया। वर्ष 2022 में 8,621 नए मामले दाखिल हुए और 8,181 मामलों का निपटारा किया गया। इसके बाद वर्ष 2023 में 8,380 मामले दर्ज हुए और 7,188 निपटे। वर्ष 2026 में अब तक 6,511 मामले दर्ज हुए हैं और 5,155 मामलों का निपटारा किया गया है।
15 हजार से अधिक मामले आवेदन सुनवाई में अटके : लंबित मामलों की न्यायिक स्थिति का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बड़ी संख्या में मामले शुरुआती चरणों में ही लंबित हैं। कुल 30,028 लंबित मामलों में से 15,260 मामले आवेदन सुनवाई (एप्लिकेशन हियरिंग) के चरण में हैं। यह कुल लंबित मामलों का करीब 51 प्रतिशत है। इसके अलावा 6,528 मामले लिखित बयान (डब्ल्यूएस) के चरण में हैं। प्रक्रिया जारी करने के चरण में 2,660 मामले, गवाहों के परीक्षा के चरण में 1,897 मामले और आदेश के चरण में 1,331 मामले लंबित हैं। आंकड़े बताते हैं कि लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा मुकदमे की आगे की प्रक्रिया में बढ़ने से पहले ही विभिन्न चरणों में रुका हुआ है।
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मामलों की प्रकृति के आधार पर लंबित प्रकरणों में सिविल वाद सबसे अधिक हैं। कुल 18,385 सिविल वाद लंबित हैं, जो कुल लंबित मामलों का करीब 61 प्रतिशत हैं।
1,346 मामले 10 से 20 साल पुरानेः लंबित मामलों की उम्र के आंकड़े भी न्यायिक देरी की तस्वीर सामने रखते हैं। कुल 12,389 मामले एक साल से कम पुराने हैं। वहीं 7,956 मामले एक से तीन साल, 4,161 मामले तीन से पांच साल और 4,121 मामले पांच से दस साल पुराने हैं। इसके अतिरिक्त 1,346 मामले 10 से 20 साल पुराने हैं। 20 से 30 साल पुराने मामलों की संख्या 50 है, जबकि पांच मामले 30 साल से अधिक समय से लंबित हैं। रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1989 में दर्ज दो मामले अब भी विचाराधीन हैं।
देरी के कारणों में वकील की अनुपलब्धता प्रमुख : अदालतों के आंकड़ों में मामलों की देरी के कारणों का भी उल्लेख है। दर्ज कारणों में 7,385 मामलों में वकील के उपलब्ध नहीं होने को देरी की वजह बताया गया है। इसके अलावा 993 मामलों में दस्तावेजों के इंतजार, 124 मामलों में बार-बार अपील दाखिल होने और 116 मामलों में गवाहों से संबंधित कारणों का उल्लेख है।
2026 में 5,155 मामलों का निपटारा : वर्ष 2026 में अब तक 5,155 मामलों का निपटारा हुआ है। इनमें 1,568 मामले दाखिल होने के एक साल के भीतर निपटाए गए। 871 मामलों का निपटारा एक से दो साल में, 630 का दो से तीन साल में और 546 मामलों का तीन से चार साल के भीतर हुआ। वहीं 21 साल से अधिक पुराने 13 मामलों का भी इस वर्ष निपटारा किया गया। 20 से 21 साल पुराने तीन मामलों का निपटारा हुआ। निपटारे की प्रकृति के अनुसार 1,893 मामले अन्य आधार पर खारिज किए गए।
नहीं हो सकी पूर्णकालिक डीजीसी सिविल की तैनातीः फरवरी 2026 में डीजीसी सिविल नीरज शर्मा के निधन के सात माह बाद भी पूर्णकालिक डीजीसी सिविल की तैनाती नहीं हो सकी है। वर्तमान में डीजीसी सिविल का कार्यवाहक चार्ज एडीजीसी सिविल रविंदर चंदेला के पास है। वहीं अमनदीप सिंह और अनीता शर्मा एडीजीसी सिविल के पद पर तैनात है।
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-लंबित मामलों में आधे से अधिक आवेदन सुनवाई के चरण में
मोहम्मद बिलाल
ग्रेटर नोएडा। जिले की अदालतों में सिविल मामलों के बढ़ते बोझ और उनके निपटारे की धीमी रफ्तार ने न्यायिक प्रक्रिया के सामने चुनौती खड़ी की है। अदालतों की सिविल पीठों में कुल 30,028 मामले लंबित हैं। इनमें दो मामले वर्ष 1989 से विचाराधीन हैं। जिन्हें 37 साल बीतने के बाद भी फैसले का इंतजार है। अदालती आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि पिछले 9 वर्षों में नए मामलों के दाखिले और निपटारे के बीच अंतर बढ़ता जा रह है। इस अवधि में 67,732 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 57,027 मामलों का निपटारा किया गया। इस तरह दाखिल मामलों की तुलना में 10,705 मामलों का अंतर रहा।
9 साल में 67 हजार से अधिक नए मामले दर्जः आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018 से 2026 तक सिविल अदालतों में लगातार नए मामले दर्ज होते रहे। वर्ष 2018 में 7,650 मामले दाखिल हुए और 5,519 का निपटारा हुआ। वर्ष 2019 में 8,554 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 7,260 मामलों का निपटारा किया गया। वर्ष 2022 में 8,621 नए मामले दाखिल हुए और 8,181 मामलों का निपटारा किया गया। इसके बाद वर्ष 2023 में 8,380 मामले दर्ज हुए और 7,188 निपटे। वर्ष 2026 में अब तक 6,511 मामले दर्ज हुए हैं और 5,155 मामलों का निपटारा किया गया है।
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15 हजार से अधिक मामले आवेदन सुनवाई में अटके : लंबित मामलों की न्यायिक स्थिति का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बड़ी संख्या में मामले शुरुआती चरणों में ही लंबित हैं। कुल 30,028 लंबित मामलों में से 15,260 मामले आवेदन सुनवाई (एप्लिकेशन हियरिंग) के चरण में हैं। यह कुल लंबित मामलों का करीब 51 प्रतिशत है। इसके अलावा 6,528 मामले लिखित बयान (डब्ल्यूएस) के चरण में हैं। प्रक्रिया जारी करने के चरण में 2,660 मामले, गवाहों के परीक्षा के चरण में 1,897 मामले और आदेश के चरण में 1,331 मामले लंबित हैं। आंकड़े बताते हैं कि लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा मुकदमे की आगे की प्रक्रिया में बढ़ने से पहले ही विभिन्न चरणों में रुका हुआ है।
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मामलों की प्रकृति के आधार पर लंबित प्रकरणों में सिविल वाद सबसे अधिक हैं। कुल 18,385 सिविल वाद लंबित हैं, जो कुल लंबित मामलों का करीब 61 प्रतिशत हैं।
1,346 मामले 10 से 20 साल पुरानेः लंबित मामलों की उम्र के आंकड़े भी न्यायिक देरी की तस्वीर सामने रखते हैं। कुल 12,389 मामले एक साल से कम पुराने हैं। वहीं 7,956 मामले एक से तीन साल, 4,161 मामले तीन से पांच साल और 4,121 मामले पांच से दस साल पुराने हैं। इसके अतिरिक्त 1,346 मामले 10 से 20 साल पुराने हैं। 20 से 30 साल पुराने मामलों की संख्या 50 है, जबकि पांच मामले 30 साल से अधिक समय से लंबित हैं। रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1989 में दर्ज दो मामले अब भी विचाराधीन हैं।
देरी के कारणों में वकील की अनुपलब्धता प्रमुख : अदालतों के आंकड़ों में मामलों की देरी के कारणों का भी उल्लेख है। दर्ज कारणों में 7,385 मामलों में वकील के उपलब्ध नहीं होने को देरी की वजह बताया गया है। इसके अलावा 993 मामलों में दस्तावेजों के इंतजार, 124 मामलों में बार-बार अपील दाखिल होने और 116 मामलों में गवाहों से संबंधित कारणों का उल्लेख है।
2026 में 5,155 मामलों का निपटारा : वर्ष 2026 में अब तक 5,155 मामलों का निपटारा हुआ है। इनमें 1,568 मामले दाखिल होने के एक साल के भीतर निपटाए गए। 871 मामलों का निपटारा एक से दो साल में, 630 का दो से तीन साल में और 546 मामलों का तीन से चार साल के भीतर हुआ। वहीं 21 साल से अधिक पुराने 13 मामलों का भी इस वर्ष निपटारा किया गया। 20 से 21 साल पुराने तीन मामलों का निपटारा हुआ। निपटारे की प्रकृति के अनुसार 1,893 मामले अन्य आधार पर खारिज किए गए।
नहीं हो सकी पूर्णकालिक डीजीसी सिविल की तैनातीः फरवरी 2026 में डीजीसी सिविल नीरज शर्मा के निधन के सात माह बाद भी पूर्णकालिक डीजीसी सिविल की तैनाती नहीं हो सकी है। वर्तमान में डीजीसी सिविल का कार्यवाहक चार्ज एडीजीसी सिविल रविंदर चंदेला के पास है। वहीं अमनदीप सिंह और अनीता शर्मा एडीजीसी सिविल के पद पर तैनात है।
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