दिल्ली के सभी ज़िला अदालतों में वकीलों ने आज हड़ताल का ऐलान किया
ट्रैफ़िक चालान के निपटारे के नए नियमों के विरोध में दिल्ली की सभी ज़िला अदालतों के वकील आज काम नहीं करेंगे। वे न तो कोर्ट में प्रत्यक्ष पैरवी करेंगे न ही ऑनलाइन सुनवाई में भाग लेंगे, और 11:30 बजे अदालतों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। बार एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा नियम परिवर्तन न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करेंगे।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Delhi NCR News: सभी जिला अदालतों में आज हड़ताल पर रहेंगे वकील
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प्रत्यक्ष या ऑनलाइन पैरवी नहीं करेंगे, 11:30 बजे अदालतों के बाहर प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। ट्रैफिक चालान के निपटारे के नए नियमों के विरोध में दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकील सोमवार को कामकाज का बहिष्कार करेंगे। वकील न तो अदालतों में प्रत्यक्ष सुनवाई में शामिल होंगे और न ही ऑनलाइन पैरवी करेंगे। सुबह 11:30 बजे सभी जिला अदालतों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा।
जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति के महासचिव नरवीर डबास का कहना है कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 में बदलाव और दिल्ली सरकार के नए चालान निपटारा नियम आम लोगों के हित में नहीं हैं। समिति के मुताबिक, चालान निपटाने का अधिकार न्यायिक मजिस्ट्रेट से हटाकर एसडीएम और अन्य विभागीय अधिकारियों को देना न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करेगा।
वकीलों का कहना है कि इससे अदालतों की भूमिका सीमित होगी और लोगों के निष्पक्ष न्याय पाने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। समिति ने सरकार से नियमों पर पुनर्विचार की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि नियम वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। ट्रैफिक चालान के निपटारे के नए नियमों के विरोध में दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकील सोमवार को कामकाज का बहिष्कार करेंगे। वकील न तो अदालतों में प्रत्यक्ष सुनवाई में शामिल होंगे और न ही ऑनलाइन पैरवी करेंगे। सुबह 11:30 बजे सभी जिला अदालतों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा।
जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति के महासचिव नरवीर डबास का कहना है कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 में बदलाव और दिल्ली सरकार के नए चालान निपटारा नियम आम लोगों के हित में नहीं हैं। समिति के मुताबिक, चालान निपटाने का अधिकार न्यायिक मजिस्ट्रेट से हटाकर एसडीएम और अन्य विभागीय अधिकारियों को देना न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करेगा।
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वकीलों का कहना है कि इससे अदालतों की भूमिका सीमित होगी और लोगों के निष्पक्ष न्याय पाने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। समिति ने सरकार से नियमों पर पुनर्विचार की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि नियम वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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