सुप्रीम कोर्ट ने डीपफेक केस पर थामा रोक; AI‑संबंधी जनहित याचिका के लिए सुनवाई तय
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुजरात हाई कोर्ट में चल रही AI‑जनित डीपफेक विनियमन की जनहित याचिका पर कार्यवाही पर रोक लगा दी और केंद्र सरकार की स्थानांतरण याचिका पर नोटिस जारी कर 5 अक्टूबर को उत्तर देने की तारीख तय की। इस बीच, कर्नाटक और बंबई हाई कोर्टों में भी समान मामलों की जाँच जारी है।

सौजन्य से:- Business Standard
सर्वोच्च न्यायालय ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) से बने डीपफेक कंटेंट के नियमन की मांग वाली जनहित याचिका पर गुजरात हाई कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग करने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर भी विचार किया जा रहा है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले पीठ में न्यायमूर्ति बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना ने केंद्र सरकार की स्थानांतरण याचिका पर नोटिस जारी किया और इस पर जवाब देने के लिए 5 अक्टूबर की तारीख तय की। साथ ही पीठ ने अगले आदेश तक गुजरात उच्च न्यायालय की कार्यवाही पर रोक लगा दी।
केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील जोहेब हुसैन ने पीठ को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय दूसरे उच्च न्यायालयों में ऐसी याचिकाओं की कार्यवाही पर पहले ही रोक लगा चुका है और वे मामले कुछ समय बाद सर्वोच्च न्यायालय के सामने आए थे।
गुजरात उच्च न्यायालय की कार्यवाही विकास विजय नायर की दायर जनहित याचिका से जुड़ी है। इसमें एआई के गलत इस्तेमाल, खासकर डीपफेक फोटो व वीडियो बनाने और वितरण से निपटने के लिए व्यापक विनियमन प्रणाली बनाने की मांग की गई है। याचिका में संवैधानिक और कानूनी अधिकारियों से जुड़े डीपफेक को लेकर खास चिंताएं जताई गई हैं। गुजरात हाई कोर्ट ने अप्रैल में मेटा इंडिया, गूगल, एक्स, रेडिट और स्क्रिब्ड सहित कई बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से एआई से बने डीपफेक कंटेंट को रोकने के उपायों पर जवाब मांगा था।
इस मुद्दे की जांच दूसरे उच्च न्यायालयों में भी चल रही है। एआई से बने और डीपफेक कंटेंट के विनियमन और गलत इस्तेमाल से जुड़ी याचिकाएं कर्नाटक और बंबई हाई कोर्ट में लंबित हैं। उन कार्यवाहियों में एक्स कॉर्प, डिजीपब न्यूज फाउंडेशन, स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा और सीनियर वकील हरेश जगतियानी जैसे लोग शामिल रहे हैं। डीपफेक नियमन की मांग वाली पीआईएल पर सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय की कार्यवाही पर रोक लगाई।
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