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शब्द कभी तलवार से भी गहरे घाव कर जाते हैं: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या मामले में संवेदनशील फैसला दिया

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा को घटाकर सात साल किया है। कोर्ट ने माना कि पत्नी की अपमानजनक टिप्पणी से उकसा परिवारिक विवाद में पत्नी की हत्या हुई थी।

27 जून 2026 को 06:24 pm बजे
शब्द कभी तलवार से भी गहरे घाव कर जाते हैं: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या मामले में संवेदनशील फैसला दिया

सौजन्य से:- Jagran

'तुम्हारे जैसे एक हजार पति रख सकती हूं', सुनते ही आरोपी ने ले ली पत्नी की जान; MP हाई कोर्ट ने कहा- टिप्पणी अत्यंत अपमानजनक

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा को घटाकर सात साल किया। कोर्ट ने माना कि पत्नी की अपमानजनक टिप्पणी से उकसा ...और पढ़ें

HighLights

- हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या में आजीवन कारावास की सजा घटाई।

- कोर्ट ने पत्नी की टिप्पणी को अत्यंत अपमानजनक और उकसावे वाला माना।

- यह अपराध पूर्वनियोजित नहीं, बल्कि अचानक उकसावे के कारण हुआ।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में माना कि शब्द कभी-कभी तलवार से भी गहरे घाव कर जाते हैं। इसके साथ कोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में संवेदनशील कानूनी दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि जब अपराध पूर्व नियोजित न होकर उकसावे के कारण घटित हो, तो उसका मूल्यांकन भी उसी कसौटी पर होना चाहिए।

हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या के दोषी युवक की आजीवन कारावास की सजा घटाकर सात वर्ष के सश्रम कारावास में परिवर्तित कर दी। बता दें कि छिंदवाड़ा जिले के कुलबहेरी नदी घाट पर पति-पत्नी के बीच अचानक विवाद हुआ। इस दौरान पत्नी ने पति से तैश में आकर कहा- तुम्हारे जैसे एक हजार पति रख सकती हूं।

प्रकरण में न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने माना कि यह टिप्पणी अत्यंत अपमानजनक और तीव्र उकसावे वाली थी, जिसके बाद आरोपित ने आवेश में पत्थर उठाकर पत्नी पर वार कर दिया। रिकार्ड में कहीं भी यह सिद्ध नहीं हुआ कि वह हत्या की पूर्व योजना बनाकर वहां पहुंचा था।

इस निर्णय का महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि घटना के तुरंत बाद आरोपित ने भागने के बजाय स्वयं पुलिस और पत्नी के स्वजन को फोन कर पूरी जानकारी दी। इसे हाई कोर्ट ने आरोपित के आचरण का महत्वपूर्ण संकेत माना। यह भी कहा कि चोटें केवल पत्थर से प्रहार के कारण ही लगी हों, यह निर्विवाद रूप से सिद्ध नहीं था, कुछ चोटें घटनास्थल के पत्थरों पर गिरने से भी संभव थीं।

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पूर्वनियोजित हत्या की श्रेणी में नहीं...सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अचानक उकसावे में आत्मसंयम खो देने से घटित अपराध को पूर्वनियोजित हत्या की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर हत्या के अपराध को परिवर्तित कर आरोपित की सजा आजीवन करावास से घटाकर महज सात वर्ष कर दी गई।

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