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बिना सुनवाई एक साल की हिरासत के लिए घमासान शुरू!

पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक 2026 पेश करने जा रही सरकार, विरोध का दौर शुरू हो गया है।

27 जून 2026 को 07:25 am बजे
बिना सुनवाई एक साल की हिरासत के लिए घमासान शुरू!

सौजन्य से:- Live Hindustan

बिना सुनवाई 1 साल की हिरासत, बेहद कड़े कानून बनाने जा रही शुभेंदु सरकार; शुरू हो गया घमासान

पश्चिम बंगाल की सरकार 29 जून को यूसीसी के साथ ही दो अन्य विधेयक भी पेश कर सकती है। इन विधेयकों में कानून व्यवस्था को सख्त करने के लिए प्रावधान किए गए हैं। इसमें प्रावधान है कि बिना किसी मुकदमे के भी आरोपी को 1 साल तक हिरासत में रखा जा सकता है।

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सराकार अगले सप्ताह विधानसबा में दो अहम विधेयक पेश करने वाली है। इन विधेयकों के जरिए समाज विरोधी गतिविधियों की परिभाषा को विस्तार दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इन विधेयकों में बिना किसी सुनवाई के 12 महीने तक की हिरासत का प्रावधान होगा। इसके अलावा अपराधियों की संपत्ति की नीलामी करके पीड़ितों की भरवाई का भी प्रावधान किया गया है।

अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक 2026 और पश्चिम बंगाल कानून व्यवस्था (संशोधन) विधेयक अगले सप्ताह विधानसभा में पेश किए जाएंगे। इसी तरह के कानून उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी बनाए गए थे जिनपर विवाद भी हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य सुनियोजित अपराध, उगाही, अवैध खनन, तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है।

अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक में ऐसा प्रावधान है कि बिना सुनवाई के ही किसी अपराधी को एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई अपराधी किसी को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाता है तो उसकी संपत्तियों की नीलामी करके उसकी भरपाई की जाएगी। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक असामाजिक गतिविधियों में, अवैध खनन, बालू का खनन, उत्खनन, वन्य संपदा का दोहन भी शामिल है।

विधेयकों पर होने लगा बवाल

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और समाज विरोधी गतिविधियां नियंत्रण विधेयक 2026 विवादास्पद कानून है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानुन और मीसा से भी ज्यादा कठोर कानून बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के ही एक साल तक हिरासत में रखा जा सके, उसमें न्यायिक सुरक्षा कहां रही। ऐसे में शक के आधार पर ही पुलिस को बेहिसाब ताकत मिल जाती है।

सोमवार को यूसीसी विधेयक भी होगा पेश

पश्चिम बंगाल की सरकार सोमवार को बजट सत्र के दौरान ही यूसीसी विधेयक भी पेश करने वाली है। इसके साथ ही दो अन्य विधेयक पेश किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सार्वजनिक अव्यवस्था, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और तोड़फोड़ जैसी गतिविधयों से निपटना बताया गया है। बीजेपी का कहना है कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों को रोकना ही इसका मकसद है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही इस तरह के कड़े कानून को लेकर घोषणा कर दी थी। यह नया कानून 1972 के पुराने कानून की जगह लेने वाला है। अधिकारियों ने कहा कि यह विधेयक उन घटनाओं के लिए तैयार किया गया है जिनमें हिंसक भीड़ पुलिस स्टेशनों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाती थी।

विधेयक में क्या प्रावधान है

इस प्रस्तावित कानून में कई अपराधों को गैरजमानती श्रेणी में रखा जाएगा। इसके अलावा संगठित अपराध, उनकी फंडिंग करने वालों, अवैध हथियार, विस्फोटक, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों को परिभाषित किया गया है। इस विधेयक में 'गुंडा' ऐसे व्यक्ति को बताया गया है जो कि आदतन असामाजिक गतिविधियों का हिस्सा होता है और किसी गिरोह या फिर सिंडिकेट में शामिर रहता है। इसके अलावा बीएनए, शस्त्र अधिनियम, अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम, एनडीपीएस ऐक्ट के तहत जिसके खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई हो उसे भी गुंडा माना जाएगा।

इस विधेयक में हिरासत के नियमें में बदलाव के साथ ही एक साल तक प्रतिबंध, आवागमन पर रोक, पुलिस के पास नियमित रिपोर्टिंग, असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने पर धन, संपत्ति और दस्तावेजों की तलाशी का अधिकारी भी दिया गया है। अगर कोई इसका विरोध करता है तो यह संज्ञेय या फिर गैर जमानती अपराध माना जाएगा। चर्चा है कि यूसीसी कानून बनाने से पहले ही सरकार विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून ला रही है।

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लेखक के बारे में

Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।

राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।

अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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