दिल्ली-लखनऊ अग्निकांड के बाद सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका, सुरक्षा कानून की उठी मांग
दिल्ली और लखनऊ में हालिया अग्निकांडों के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें सुरक्षित जीवन के अधिकार के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा कानून की मांग की गई है।

सौजन्य से:- Jagran
दिल्ली और लखनऊ अग्निकांड के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून बनाने की उठी मांग, सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका
दिल्ली और लखनऊ में हालिया अग्निकांडों के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा ढांचे के लिए PIL दायर।
- दिल्ली-लखनऊ अग्निकांडों के बाद सख्त कानून की मांग की गई।
- स्कूलों, अस्पतालों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने की गुहार।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के कई शहरों में आए दिन आग लगने की भयावह घटनाएं और उनमें अपनों को खोने का दर्द अब महज एक खबर बनकर नहीं रह सकता।
हाल ही में दिल्ली के मालवीय नगर और लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांडों ने देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। इस बेबसी को सुरक्षा की ताकत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है।
वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा दायर इस याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार देश भर के ज्यादा जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों के लिए एक सख्त 'राष्ट्रीय अग्नि और जीवन सुरक्षा ढांचा' तैयार करे।
इसमें कहा गया है कि जिंदगी बचाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून बेहद जरूरी है, सिर्फ शोक जताना, एफआइआर दर्ज करना या जांच कमेटियां बनाना ही पर्याप्त नहीं।
आर्टिकल 21 का हवाला: 'सुरक्षा चाहिए, सांत्वना नहीं'
याचिकाकर्ता ने बेहद भावुक और कड़े शब्दों में कहा कि न्यायिक और प्रशासनिक चेतावनियों के बाद भी बार-बार होने वाले ये हादसे साबित करते हैं कि सिर्फ एफआइआर दर्ज करना या जांच कमेटियां बनाना काफी नहीं है।
'संविधान का अनुच्छेद 21 हमें जीवन जीने का अधिकार देता है और यह अधिकार हादसों के बाद सिर्फ शोक या सांत्वना व्यक्त करने का नहीं, बल्कि हादसों को रोकने की मांग करता है।'
याचिका में केंद्र और राज्यों से मिलकर एक निश्चित समय सीमा के भीतर न्यूनतम सुरक्षा और जवाबदेही तय करने का आग्रह किया गया है। साथ ही, तीन से चार महीने के भीतर स्कूलों, कोचिंग सेंटरों, अस्पतालों, होटलों और मॉल्स का एक विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की गई है।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
अवैध बेसमेंट व छतों पर लगे रोक याचिका में मासूम बच्चों और छात्रों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई गई है। कोर्ट से मांग की गई है कि बिना वैध अनुमति और सुरक्षा मानकों के किसी भी कोचिंग सेंटर, स्कूल, हॉस्टल या लाइब्रेरी को तंग सीढ़ियों, सिंगल एग्जिट, अवैध छतों या बेसमेंट में चलाने पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
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इसके अलावा, सुरक्षा की अनदेखी करने वाले और रिश्वत लेकर सर्टिफिकेट देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिका में हालिया दिल्ली-लखनऊ हादसों के रिकार्ड सुरक्षित रखने और एक राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति के गठन की भी गुहार लगाई गई है, ताकि हर नागरिक अपनी जिंदगी को सुरक्षित महसूस कर सके।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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