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बिना पढ़े शराबबंदी कानून: अदालत ने सरकार पर 2.15 लाख का हर्जाना लगाया

बिहार में एक न्यायिक फैसले ने सरकारी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पटना हाईकोर्ट ने एक ट्रक मालिक को 2 लाख का मुआवजा दिलाने के साथ ही सरकार से 1.15 लाख का हर्जाना वसूलने का आदेश दिया है। मामला शराबबंदी कानून के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। अदालत ने यह फैसला यह कहकर किया है कि ट्रक मालिक राजेश यादव ने अपनी बिना की गई जांच के आधार पर ट्रक को जब्त कर लिया था। अदालत ने यह भी कहा है कि जो दारोगा कार्रवाई के लिए जिम्मेदार था, उसने कभी शराबबंदी कानून को नहीं पढ़ा। अदालत ने पुलिस महकमे की पोल खोलकर रख दी है और इस पूरे मामले में सरकार से कहा है कि उन्हें हर्जाने की राशि वसूलनी होगी।

27 जून 2026 को 08:24 am बजे
बिना पढ़े शराबबंदी कानून: अदालत ने सरकार पर 2.15 लाख का हर्जाना लगाया

सौजन्य से:- Navbharat Times

पटना हाईकोर्ट ने बिना शराब बरामदगी के महज संदेह (गंध) के आधार पर ट्रक जब्त करने के मामले में बिहार सरकार पर 2.15 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। सुनवाई के दौरान जांचकर्ता दारोगा ने कबूला कि उसने कभी शराबबंदी कानून पढ़ा ही नहीं, जिस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई।

पटना/गोपालगंज: बिहार में शराबबंदी कानून के दुरुपयोग को लेकर पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने बिना किसी पुख्ता सबूत या शराब की बरामदगी के, केवल 'शराब जैसी गंध' आने के संदेह पर एक ट्रक को अवैध रूप से जब्त करने के मामले में सरकार को 2.15 लाख रुपये का हर्जाना भुगतने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति कुमार मनीष की खंडपीठ ने पीड़ित ट्रक मालिक राजेश कुमार यादव की रिट याचिका पर ये सख्त फैसला सुनाया। इस मामले ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून की समझ पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

शराब की गंध के संदेह में ट्रक जब्त करना पड़ा महंगा

ये पूरा मामला गोपालगंज जिले का है, जहां तत्कालीन दारोगा सतेंद्र कुमार राय ने शराबबंदी कानून का हवाला देते हुए एक ट्रक को जब्त कर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली थी। पुलिस की इस पूरी कार्रवाई की अजीब बात ये थी कि उस ट्रक से एक बूंद भी शराब बरामद नहीं हुई थी। दारोगा का तर्क था कि ट्रक के केबिन से शराब जैसी गंध आ रही थी, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया। हाईकोर्ट ने पुलिस की इस अतार्किक और मनमानी कार्रवाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।

जिस दारोगा ने अपने जवाबी हलफनामे में 40 शराबबंदी मामलों की जांच करने का दावा किया है, उसने कानून के प्रावधानों को पढ़ा तक नहीं है।

रिपोर्ट

दारोगा ने कोर्ट में माना- नहीं पढ़ा कभी शराबबंदी कानून

सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ, जिसने पुलिस महकमे की पोल खोलकर रख दी। जब खंडपीठ ने दारोगा सतेंद्र कुमार राय से शराबबंदी कानून के बुनियादी प्रावधानों के बारे में पूछा, तो उन्होंने साफ स्वीकार किया कि उन्होंने कभी इस कानून का अध्ययन ही नहीं किया है।

अदालत ने इस बात पर घोर आश्चर्य जताया कि जिस दारोगा ने अपने जवाबी हलफनामे में शराबबंदी से जुड़े 40 मामलों की जांच करने का दावा किया था, उसने मूल कानून को पढ़ा तक नहीं था।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) को कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेने को कहा, जिसके बाद एसपी ने दोषी पुलिसकर्मियों पर प्रशासनिक कार्रवाई का भरोसा दिया।

याचिकाकर्ता को मुआवजे के साथ केस का खर्च देने के आदेश

अदालत ने पीड़ित राजेश यादव के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता को मानसिक और आर्थिक परेशानी के लिए 2 लाख रुपये का मुआवजा दें। इसके साथ ही, अदालत ने मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 15 हजार रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने ये भी साफ कर दिया कि अगर जब्त रहने के दौरान ट्रक में कोई टूट-फूट या मशीनी खराबी आई हो, तो उसकी पूरी मरम्मत का खर्च भी सरकार ही उठाएगी।

दोषी पुलिसकर्मियों की जेब से वसूला जाएगा हर्जाना

हाईकोर्ट ने इस मामले में केवल सरकार पर जुर्माना लगाकर ही बात खत्म नहीं की, बल्कि जवाबदेही भी तय की है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि याचिकाकर्ता को दी जाने वाली हर्जाने की ये पूरी राशि (2.15 लाख रुपये और मरम्मत का खर्च) किसी सरकारी कोष से नहीं, बल्कि इस पूरी अवैध कार्रवाई के लिए जिम्मेदार दोषी पुलिस अधिकारियों के वेतन या जेब से वसूल की जाएगी, ताकि भविष्य में कानून का ऐसा दुरुपयोग न हो।

लेखक के बारे मेंसुनील पाण्डेयसुनील पाण्डेय, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में बतौर सीनियर जर्नलिस्ट कार्यरत हैं। जनवरी 2021 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप का हिस्सा बने सुनील वर्तमान में NBT ऑनलाइन की बिहार-झारखंड टीम में संपादकीय और रिपोर्टिंग में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रणनीतिक न्यूज़ प्लानिंग, सटीक संपादन और धारदार ग्राउंड रिपोर्टिंग उनकी विशेष पहचान है। राजनीति और व्हाइट कॉलर करप्शन जैसे विषयों पर गहरी पकड़ रखने वाले सुनील ने 2005 से शुरू हुए अपने करियर में कई बड़ी खबरें ब्रेक की हैं। जी20 शिखर सम्मेलन (G20 Summit) से लेकर केरल तक के चुनावी बयार को समझा। दिल्ली, बिहार और तेलंगाना में पत्रकारिता के विभिन्न आयामों को अनुभव करने वाले सुनील सोशल मीडिया एक्स (पहले ट्विटर) पर @sunilpandeyjee के जरिए सक्रिय रहते हैं।

सुनील का पत्रकारिता करियर प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग अनुभवों से समृद्ध है, जहां उन्होंने संपादन और ग्राउंड रिपोर्टिंग की महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। पटना, दिल्ली और हैदराबाद जैसे महानगरों में उन्होंने कई प्रतिष्ठित हस्तियों का साक्षात्कार किया है। उनकी ग्राउंड रिपोर्ट्स का प्रभाव इतना गहरा रहा है कि कई मौकों पर सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने और उनमें सुधार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सुनील पाण्डेय की पारखी नजर राजनीतिक उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियों के आम आदमी पर पड़ने वाले असर के विश्लेषण पर रहता है। डिजिटल युग की मांग को समझते हुए वे अपनी लेखनी और वीडियो, दोनों माध्यमों से नवभारत टाइम्स के पाठकों से जुड़ते हैं। उनमें किसी भी सामान्य खबर को राष्ट्रीय विमर्श (National Narrative) बनाने की अद्भुत क्षमता है। वे केवल समाचार देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खबर के पीछे के नैतिक मूल्यों और उसके व्यापक प्रभाव को गहराई से परखते हैं।

अपने पत्रकारिता सफर का आगाज सुनील ने प्रतिष्ठित पाक्षिक पत्रिका 'माया' से किया, जिसके बाद उन्होंने विभिन्न समाचार पत्रों के लिए स्वतंत्र स्तंभकार (कॉलमनिस्ट) के रूप में अपनी लेखनी को धार दी। ETV न्यूज की संपादकीय टीम के साथ संपादन और रिपोर्टिंग के गुर सीखने के बाद, उन्होंने ज़ी मीडिया और नेटवर्क 18 जैसे बड़े संस्थानों में एक लंबा समय बिताया। प्रिंट और टीवी न्यूज़ के व्यापक अनुभव के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया। न्यूज़ इकोसिस्टम की गहरी समझ विकसित की। वर्तमान में वे टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के डिजिटल प्लेटफॉर्म 'नवभारत टाइम्स ऑनलाइन' में अपनी धारदार पत्रकारिता को जारी रखे हुए हैं।

सुनील पाण्डेय की शैक्षणिक नींव 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' माने जाने वाले पटना विश्वविद्यालय में पड़ी। यहां से ग्रेजुएशन और मास्टर के साथ ही उन्होंने पत्रकारिता की डिग्री भी प्राप्त की। वे समाचारों के विभिन्न स्रोतों के विश्लेषणात्मक अध्ययन और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों जैसे गंभीर विषयों पर अपनी लेखनी और व्याख्यानों के माध्यम से निरंतर विचार साझा करते रहते हैं। पत्रकारिता करियर के दौरान कई अवॉर्ड से सुनील पाण्डेय को सम्मानित किया जा चुका है।... और पढ़ें

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