भारत और रूस ने न्यायिक सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौता किया
भारत और रूस के सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसमें तकनीक के इस्तेमाल, न्यायिक प्रशिक्षण और बेस्ट प्रैक्टिस के आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह समझौता दोनों देशों के कानूनी रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
भारत और रूस के सुप्रीम कोर्ट के बीच न्यायिक सहयोग पर समझौता, जानें MoU की मुख्य बातें
भारत और रूस दोनों ने जोर दिया कि AI को न्यायिक विवेकाधिकार की जगह नहीं लेनी चाहिए, AI पर बहुत ज्यादा निर्भरता नहीं होनी चाहिए.
Published : June 25, 2026 at 3:13 PM IST
नई दिल्ली: भारत और रूस के सुप्रीम कोर्ट ने 23 जून, 2026 को मॉस्को में न्यायिक सहयोग (Judicial Cooperation) पर अपने पहले समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों देशों के कानूनी रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. यह समझौता कोर्ट में तकनीक के इस्तेमाल, न्यायिक प्रशिक्षण और बेस्ट प्रैक्टिस के आदान-प्रदान पर फोकस करता है.
समझौता ज्ञापन की मुख्य बातें
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षरकर्ता: भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और रूसी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस इगोर क्रास्नोव.
तिथि और स्थान: 23 जून, 2026 को मॉस्को में रूसी संघ के सुप्रीम कोर्ट में.
समझौता ज्ञापन में सहयोग के क्षेत्र:
- ज्यूडिशियल एक्सपीरियंस एक्सचेंज–कोर्ट एडमिनिस्ट्रेशन और केस मैनेजमेंट में बेस्ट प्रैक्टिस साझा करना.
- न्यायपालिका में टेक्नोलॉजी- अदालतों में AI, डिजिटल रिकॉर्ड और IT इंटीग्रेशन पर जोर.
- ज्यूडिशियल ट्रेनिंग और विकास – जजों और स्टाफ के लिए संयुक्त प्रोग्राम, जिसमें साइबर लॉ और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं.
भारत की डिजिटल ज्यूडिशियरी पहल दिखाई गई: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ज्यूडिशियल टेक्नोलॉजी में भारत की तरक्की पर रोशनी डाली
SUVAS (सुप्रीम कोर्ट विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर): अंग्रेजी फैसलों को 16 क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करता है.
सु सहाय-Su Sahay (AI चैटबॉट): केस लड़ने वालों और वकीलों को केस की प्रगति, फाइलिंग की जरूरतें और प्रक्रिया से जुड़ी सलाह देता है.
एक केस, एक डेटा: सभी केस के लिए स्टैंडर्ड डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम.
ऑनलाइन विवाद समाधान (Online Arbitration) और मध्यस्थता: खर्च और देरी कम करने के लिए टेक्नोलॉजी से विवाद सुलझाना.
Moscow: Chief Justice of India Surya Kant and Chief Justice of the Supreme Court of the Russian Federation Igor Krasnov signed a Memorandum of Understanding (MoU) to strengthen judicial cooperation pic.twitter.com/XNfuqocVgs
— IANS (@ians_india) June 23, 2026
AI नियमन का ड्राफ्ट: यह सुनिश्चित करना कि AI एक प्रशासनिक मदद बनी रहे, न कि कानूनी समझ का विकल्प.
यह MoU दोनों देशों के सुप्रीम कोर्ट के बीच अपनी तरह का पहला MoU है, जो भारत-रूस संबंधों के बढ़ते दायरे को रणनीतिक और आर्थिक संबंधों से आगे बढ़कर न्यायिक सहयोग में बदलने को दिखाता है. दोनों कोर्ट ने जनता का भरोसा बनाए रखने, टेक्नोलॉजी में तेजी बदलाव के हिसाब से ढलने और AI के दौर में न्यायिक आजादी सुनिश्चित करने जैसी आम चुनौतियों को माना.
भारत और रूस के न्यायिक सहयोग लक्ष्य
भारत और रूस दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि AI को न्यायिक विवेकाधिकार (Judicial Discretion) की जगह नहीं लेनी चाहिए, AI पर बहुत ज्यादा निर्भरता नहीं होनी चाहिए. डिजिटल रिकॉर्ड प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी, डेटा सिक्योरिटी के महत्व को लेकर चिंता बढ़ाते हैं.
भारत-रूस समझौता ज्ञापन (MoU) भारत और रूस के बीच न्यायिक सहयोग में एक बड़ी उपलब्धि है, जिसका उद्देश्य टेक्नोलॉजी के जरिये कोर्ट को आधुनिक बनाना है और साथ ही न्याय के मानव पहलू को भी बनाए रखना है.
यह भी पढ़ें- चीन और रूस की गैर मौजूदगी में जी7 में भारत ग्लोबल साउथ के प्रमुख पैरोकार के रूप में उभरा
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट बोला- सरकारी डॉक्टरों के लिए कट-ऑफ कम करनी होगी, क्योंकि वे जनता की सेवा कर रहे हैं

एनसीएलटी ने सुप्रीम इंजीनियरिंग पर याचिका स्वीकार, बैंक ऑफ इंडिया को दिए मुकुल

सुप्रीम कोर्ट ने की सरकारी डॉक्टरों के लिए कट-ऑफ कम करने की मांग: कहा, 'सरकारी डॉक्टर अपने साथी निजी डॉक्टरों की तुलना में बेहतर सेवा दे सकते हैं'

राहुल गांधी ने मानहानि मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का रुख कर दायर किया खेद

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक दिशानिर्देश निकाला, अखिल भारतीय टेनिस संघ के संविधान में संशोधन के लिए कहा

निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी फीस तय करने की जबरन नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को खाली सुपर-स्पेशियलिटी सीटें सरेंडर करने के खिलाफ याचिका पर जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: क्यों नहीं रोका जा सकता प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की ज्यादा फीस?
ताज़ा ख़बरें
- निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी शुल्क नहीं: सुप्रीम कोर्ट
- लोक अदालत में राजीनामा के माध्यम से विवाद को सुलझाने में मदद करें अधिवक्ता
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी फीस के बराबर लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता
- अभिषेक बनर्जी को विदेश यात्रा की अनुमति नहीं
- तमिलनाडु सरकार की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, मदुरै पहाड़ी पर दीप जलाने पर रोक की मांग
- ... तो सारे निजी मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे बंद- सुप्रीम कोर्ट
- अजब-गजब: AI चैटबॉट ने इंसानी वकील को अदालत में दी मात, 8 लाख रुपये से ज्यादा का मुकदमा जीता!
- श्री अकाल तख्त ने 29 जून को बुलाई सिख विधायकों, मंत्रियों की बैठक

