नौकरीपेशा लोगों के लिए कानून की पढ़ाई पर लगी रोक, अब केवल नियमित पाठ्यक्रम ही मान्य
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने नौकरीपेशा लोगों के लिए कानून की पढ़ाई पर रोक लगा दी है, अब केवल नियमित और पूर्णकालिक विधि शिक्षा ही मान्य होगी। इस आदेश से सरकारी और निजी क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए नौकरी के साथ कानून की पढ़ाई करना संभव नहीं होगा।

सौजन्य से:- Jagran
नौकरी में रहते हुए अब नहीं कर सकेंगे कानून की पढ़ाई, लॉ कालेजों में अब नियमित पढ़ाई ही होगी मान्य
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने नौकरीपेशा लोगों के लिए कानून की पढ़ाई पर रोक लगा दी है, अब केवल नियमित और पूर्णकालिक विधि शिक्षा ही मान्य होगी। ...और पढ़ें
HighLights
- नौकरीपेशा लोगों के लिए कानून की पढ़ाई पर रोक।
- विधि शिक्षा अब केवल पूर्णकालिक, नियमित पाठ्यक्रम होगा।
- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद बीसीआई का आदेश।
धीरेंद्र कुमार सिन्हा, बिलासपुर। शासकीय अथवा निजी संस्थानों में नौकरी करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के लिए अब नौकरी के साथ कानून की पढ़ाई का मार्ग बंद हो गया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के सचिव श्रीमंतो सेन द्वारा कुलपतियों को पत्र जारी कर प्रोक्सी अटेंडेंस (अवैध हाजिरी) या नौकरीपेशा लोगों के लिए बनाए गए अनधिकृत कोर्स को तत्काल बंद करने का आदेश दिया है।
बीसीआई ने स्पष्ट किया है कि विधि शिक्षा प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे और सप्ताह में 30 घंटे का पूर्णकालिक पाठ्यक्रम है, जिसका कड़ाई से पालन अनिवार्य है। बीसीआइ का यह आदेश वर्तमान शैक्षणिक सत्र से लागू होगा।
बीसीआइ ने आदेश की प्रमुख बातें
- केवल नियमित पढ़ाई मान्य होगी।
- बिना अनुमति चल रही शिफ्ट कक्षाओं, पार्ट-टाइम व्यवस्थाओं और फर्जी हाजिरी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
- विश्वविद्यालयों द्वारा छह सप्ताह के भीतर सभी विधि शिक्षण केंद्रों का प्रत्यक्ष व व्यापक भौतिक निरीक्षण किया जाएगा।
- निरीक्षण टीमों को कक्षाओं, फैकल्टी, बायोमेट्रिक व उपस्थिति रजिस्टर, पुस्तकालय, मूट कोर्ट तथा जियो-टैग तस्वीरों के साथ रिपोर्ट जमा करनी होगी।
- क्रियान्वयन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर उसका नाम, पद, मोबाइल नंबर व ईमेल बीसीआइ को दिया जाएगा।
- बिना मान्यता या गैर-कानूनी व्यवस्था संचालन पर कार्यवाही की चेतावनी।
इस आदेश से केंद्र और राज्य सरकार की सेवाओं के साथ निजी क्षेत्रों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए नौकरी के साथ कानून की डिग्री की पढ़ाई व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक प्रकरण की सुनवाई के दौरान विधि शिक्षा के गिरते स्तर पर की गईं गंभीर मौखिक टिप्पणियों के बाद बीसीआई ने यह कदम उठाया है।
बीसीआई ने स्पष्ट किया कि केवल विश्वविद्यालय से संबद्धता होना ही काफी नहीं है, 'रूल्स आफ लीगल एजुकेशन 2008' के नियम 14 के तहत बीसीआई से अलग से अनुमोदन लेना और रिपोर्ट व नई जानकारी प्रस्तुत करना अनिवार्य है। गौरतलब है कि बीसीआइ द्वारा कानून की शिक्षा के पाठ्यक्रम बनाए जाते हैं और बीसीआइ द्वारा ही विधि कालेजों को मान्यता दी जाती है।
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मामले में छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग बिलासपुर के अपर संचालक प्रो.एसआर कमलेश ने कहा कि बार काउंसिल के मापदंडों व आदेश का कालेजों में कड़ाई से पालन कराया जाएगा। विधि शिक्षा के पाठ्यक्रम से लेकर कालेजों में सीट निर्धारण सबकुछ बीसीआइ के तय मापदंड और गाइडलाइन के हिसाब से होता है।
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