सुप्रीम कोर्ट में बड़ी दिशा चुनौतीपूर्ण बदलाव, चार जजों का हाईकोर्ट का संभावित सामना: जानिए क्या है कॉलेजियम की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार जजों को अलग-अलग हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है। कॉलेजियम के इस फैसले के बाद, छह अगस्त को हुई बैठक में चार जजों को अलग-अलग हाईकोर्टों के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।

सौजन्य से:- अमर उजाला
SC अद्यतन: चार जजों को हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश; एन. डी. पी. एस. मामलों की जांच-ट्रायल पर कल अहम सुनवाई
सूर्य, 09 अगस्त 2026 04:57 अपराह्न भारतीय समय
पवन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
प्रकाशितकर्ता: पवन
अद्यतन सूर्य, 09 अगस्त 2026 04:57 अपराह्न भारतीय समय
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार जजों को अलग-अलग हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने छह अगस्त को हुई बैठक में यह फैसला लिया। कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है। वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रवींद्र वी. घुगे को कलकत्ता हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को इसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा कॉलेजियम ने दो जजों के तबादले की भी सिफारिश की है। ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस मनश रंजन पाठक को गुजरात हाईकोर्ट और जस्टिस कृष्ण राम महापात्र को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की गई है।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को इसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा कॉलेजियम ने दो जजों के तबादले की भी सिफारिश की है। ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस मनश रंजन पाठक को गुजरात हाईकोर्ट और जस्टिस कृष्ण राम महापात्र को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की गई है।
विज्ञापन
एन. डी. पी. एस. मामलों की जांच और ट्रायल समयबद्ध करने की मांग पर SC में सुनवाई सोमवार को
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को देश में नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने और एन. डी. पी. एस. मामलों की जांच व सुनवाई को तेज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ मामले की सुनवाई कर सकती है। अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका में केंद्र और राज्यों को एन. डी. पी. एस. मामलों में फोरेंसिक रिपोर्ट जमा करने के लिए समय सीमा तय करने का निर्देश देने की मांग की गई है। साथ ही नशीले पदार्थों की तलाशी, जब्ती और सैंपल लेने के लिए पूरे देश में एक समान नियम बनाने की मांग की गई है।
याचिका में एन. डी. पी. एस. मामलों के जल्द निपटारे के लिए विशेष अदालतें बनाने और तलाशी व जब्ती की प्रक्रिया की डिजिटल रिकॉर्डिंग व वीडियोग्राफी अनिवार्य करने का भी अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता ने तस्करों, उनके फाइनेंसरों और अवैध संपत्तियों को समयबद्ध तरीके से जब्त करने की मांग भी की है। इसके अलावा नशे के आदी लोगों के पुनर्वास केंद्र बनाने और तस्करों तथा नशे के शिकार लोगों के लिए अलग-अलग सजा नीति बनाने का सुझाव दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को देश में नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने और एन. डी. पी. एस. मामलों की जांच व सुनवाई को तेज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ मामले की सुनवाई कर सकती है। अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका में केंद्र और राज्यों को एन. डी. पी. एस. मामलों में फोरेंसिक रिपोर्ट जमा करने के लिए समय सीमा तय करने का निर्देश देने की मांग की गई है। साथ ही नशीले पदार्थों की तलाशी, जब्ती और सैंपल लेने के लिए पूरे देश में एक समान नियम बनाने की मांग की गई है।
याचिका में एन. डी. पी. एस. मामलों के जल्द निपटारे के लिए विशेष अदालतें बनाने और तलाशी व जब्ती की प्रक्रिया की डिजिटल रिकॉर्डिंग व वीडियोग्राफी अनिवार्य करने का भी अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता ने तस्करों, उनके फाइनेंसरों और अवैध संपत्तियों को समयबद्ध तरीके से जब्त करने की मांग भी की है। इसके अलावा नशे के आदी लोगों के पुनर्वास केंद्र बनाने और तस्करों तथा नशे के शिकार लोगों के लिए अलग-अलग सजा नीति बनाने का सुझाव दिया गया है।
न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आरोपी को जेल में रखने के बाद मुकदमा खींचने की छूट नहीं

शहरी विकास कानून के लिए प्रस्तावों का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

अमेरिकी अदालत के फैसले से ट्रंप प्रशासन को बड़ी राहत, सीमा पर दीवार का निर्माण जारी

70 की आयु में भी हासिल की स्नातकोत्तर की उपाधि, ज्योतिरादित्य स्कारिया की कहानी

अस्थाई लोक अदालत से मिलेगी सुविधाएं, लेकिन क्या?

कार्नाटक उच्च न्यायालय ने लोकायुक्त पुलिस को बेहद महत्वपूर्ण संकेत दिया

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी: नागौर में तीन समझौतों पर सियासत

लोकसभा जांच समिति ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को दोषी ठहराया, कहा- घर में भारी नकदी बंडलों के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं था
ताज़ा ख़बरें
- प्रशासनिक अधिकारियों ने लोक अदालत की तैयारी के लिए बैठक में दिए निर्देश
- पक्षकारों के बीच समझौता कराना लोक अदालत का मूल कर्तव्य
- न्यायमूर्ति पी.वी. कानून में संजय कुमार का करियर और महत्वपूर्ण फैसले
- क्या बी. सी. आई. कानूनी छात्रों को वकालत की जिंदगी से वंचित कर सकती है?
- राजस्थान हाई कोर्ट की इमारत में सुरक्षा का संकट, क्या न्यायपालिका अपने घर को सुरक्षित रख सकती है?
- न्यायिक निश्चितता का संकट: भारत में न्यायपालिका के उलटफेर की आवृत्ति
- सुप्रीम कोर्ट ने बी. सी. आई. के आदेश की आलोचना की, कहा कोई लेना-देना नहीं
- राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, वीर सावरकर मामले में केस रद्द

