सुप्रीम कोर्ट ने BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को प्रो‑टेम घोषित किया, लोकतांत्रिक रूप से नहीं चुने गये
न्यायालय ने कहा कि नई बार काउंसिल के पदाधिकारी चुने जाने तक मनन कुमार मिश्रा केवल प्रो‑टेम चेयरमैन रहेंगे और बड़े नीति‑निर्णय अटॉर्नी जनरल व सॉलिसिटर जनरल की सलाह से लिये जायेंगे। उनका कार्यकाल नई चुनाव प्रक्रिया पूरी होने पर समाप्त होगा।

सौजन्य से:- Jagran
मनन कुमार मिश्रा की पावर हुई कम, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लोकतांत्रिक रूप से नहीं चुने गए थे
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को 'प्रो-टेम चेयरमैन' घोषित किया है।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने मनन कुमार मिश्रा को 'प्रो-टेम चेयरमैन' घोषित किया।
- नई BCI के पदाधिकारी चुने जाने तक ही पद पर रहेंगे।
- बड़े नीतिगत फैसले AG और SG की सलाह से लिए जाएंगे।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार, 2 सितंबर को बार काउंसिल के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा तब तक ही 'प्रो-टेम चेयरमैन हैं, जब तक कि नई बनी BCI अपने पदाधिकारी नहीं चुन लेती।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि बड़े नीतिगत फैसले भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सलाह से लिए जाएं, जो BCI के स्थायी पदेन सदस्य होते हैं।
मनन कुमार मिश्रा की शक्तियां छीनी
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की शक्तियां सीमित कर दी हैं। CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे।
बेंच ने कहा कि मनन कुमार मिश्रा BCI के रोजमर्रा के कामकाज की देखरेख तो कर सकते हैं, लेकिन नई चुनी हुई स्टेट बार काउंसिलों द्वारा नई BCI के गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें लोकतांत्रिक रूप से चुना गया पदाधिकारी नहीं माना जा सकता।
लाइव-लॉ के अनुसार, जस्टिस बागची ने BCI चेयरमैन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्णकुमार से कहा, 'आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जब तक स्टेट बार काउंसिलों में हुए चुनावों के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नए चुनाव नहीं हो जाते, तब तक आप एक प्रो-टेम चेयरमैन की तरह हैं।'
जज ने कहा, 'यह ऐसी स्थिति नहीं है जहां उन्हें लोकतांत्रिक रूप से चुना गया हो और वे वैसे ही बने रहें। उनका कार्यकाल उन चुनावों तक ही है जो जल्द ही होने वाले हैं।'
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस बागची ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, 'ऐसी स्थितियों में, रोजमर्रा का कामकाज मौजूदा व्यवस्था पर छोड़ा जा सकता है। हालांकि, जब कोई नीतिगत फैसला लिया जाता है, तो अटॉर्नी जनरल जैसे स्वतंत्र रूप से काम करने वाले स्थायी पदेन सदस्य की भागीदारी जरूरी होती है।'
बेंच ने कहा, 'हम मौजूदा व्यवस्था पर अपनी मंजूरी की मुहर नहीं लगा रहे हैं। यह साफ है कि मौजूदा चेयरमैन तभी तक पद पर बने रह सकते हैं, जब तक कि राज्य बार काउंसिल के चुनावों के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए नए चुनाव नहीं हो जाते।'
ये टिप्पणियां तब की गईं जब कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिनमें मिश्रा के BCI चेयरमैन पद पर बने रहने और उनके कार्यकाल को 2030 तक बढ़ाने के कानूनी आधार को चुनौती दी गई थी।
यह भी पढ़ें- केंद्र से आर-पार की तैयारी में झारखंड सरकार, 14000 करोड़ का राजस्व बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का खटखटाएगी दरवाजा
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