शेड्यूल एच‑एच1‑एक्स दवाओं के विज्ञापन पर नई मंजूरी अनिवार्य, सरकार ने सार्वजनिक सुझाव मांगे
सरकार ने प्रस्तावित किया है कि शेड्यूल एच, एच1 और एक्स में वर्गीकृत प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के विज्ञापन के लिए केंद्र की पूर्व मंजूरी अनिवार्य की जाए। इस मसौदे को राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर आम जनता और संबंधित पक्षों से आपत्तियां व सुझावों के लिए आमंत्रित किया गया है, और यह औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत लागू होगा।

सौजन्य से:- Jagran
कुछ दवाओं के विज्ञापन के लिए कानून में होगा बदलाव, सरकार ने मसौदे पर आम लोगों से मांगे सुझाव
सरकार ने शेड्यूल एच, एच1 और एक्स में शामिल दवाओं के विज्ञापन के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है।
HighLights
- कानून में भ्रामक औषधीय विज्ञापन पर रोक
- सरकार ने मसौदे पर आम लोगों से सुझाव मांगे हैं
पीटीआई, नई दिल्ली। सरकार ने शेड्यूल एच, एच1 और एक्स में शामिल दवाओं के विज्ञापन के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है। इनमें ऐसी प्रिस्क्रिप्शन दवाएं शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल डॉक्टर की पर्ची के आधार पर किया जाता है और जिनमें दुरुपयोग या लत लगने का जोखिम भी हो सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 28 सितंबर को जारी मसौदा अधिसूचना में औषधि नियम, 1945 के नियम 65 में नया उप-नियम जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित औषधि (संशोधन) नियम, 2026 अंतिम रूप से राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू होंगे।
सरकार ने मसौदे पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से राजपत्र में इसके प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। यह मसौदा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत तैयार किया गया है।
इससे पहले औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने भी शेड्यूल एच, एच1 और एक्स की दवाओं के विज्ञापन के लिए केंद्र की पूर्व मंजूरी का प्रावधान करने की सिफारिश की थी।
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