अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय बने राम मंदिर ट्रस्ट के नए ट्रस्टी, कानूनी जंग के अनुभवी
अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय, जिन्होंने रामलला के पक्ष में कई महत्त्वपूर्ण मामलों में अदालत में पैरवी की, को 2 सितंबर की बैठक में श्रीयाम राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया। अब वे महेश भागचंदका और डॉ. निर्मला यादव के साथ ट्रस्ट के निर्णय‑निर्धारण प्रक्रिया में योगदान देंगे।

सौजन्य से:- AajTak
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अयोध्या में 2 सितंबर को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक हुई. इसमें ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को शामिल किया गया. इनमें अयोध्या के रहने वाले अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय भी हैं. ट्रस्ट में जगह मिलने के बाद अब चर्चा इस बात की है कि मदन मोहन पांडेय कौन हैं और राम जन्मभूमि मामले से उनका क्या संबंध रहा है?
अयोध्या की मिट्टी में पले-बढ़े मदन मोहन पांडेय पेशे से वरिष्ठ वकील हैं. राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के लंबे कानूनी विवाद में वह रामलला विराजमान की मुख्य कानूनी टीम के अहम सिपाही रहे हैं. इलाहाबाद हाई कोर्ट से लेकर तमाम बहसों के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों, प्राचीन किताबों, खुदाई से मिले पुरातात्विक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को तराशकर अदालत के सामने रखा.
साल 2019 में जब सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया, तब रामलला की ओर से केस लड़ने वाले वकीलों के सम्मान समारोह में मदन मोहन पांडेय को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया था. अब मंदिर निर्माण और व्यवस्था संभालने के इस दौर में उन्हें ट्रस्टी बनाकर राम मंदिर ट्रस्ट ने उनके पुराने कानूनी काम पर भरोसा जताया है.
ट्रस्ट में तीन नए सदस्य
2 सितंबर की बैठक में मदन मोहन पांडेय के साथ महेश भागचंदका और डॉ. निर्मला यादव को भी ट्रस्ट का नया सदस्य बनाया गया. महेश भागचंदका दिल्ली के रहने वाले हैं, जबकि डॉ. निर्मला यादव शिकोहाबाद से हैं.
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ट्रस्ट में ये नियुक्तियां खाली हुई जगहों को भरने के लिए की गई हैं. चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद दो पद खाली हुए थे. वहीं विमलेंद्र मोहन के निधन से भी एक पद खाली हुआ था.
ट्रस्ट में हुए कई बड़े बदलाव
बैठक में ट्रस्ट के पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय की गईं. गोविंद देव गिरि को महासचिव बनाया गया है. वह इससे पहले कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. जबकि महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष बनाया गया है.
ट्रस्ट में पहली बार CEO का पद भी बनाया गया है. इस पद के लिए 16 लोगों के इंटरव्यू के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया गया था. इसमें पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह और श्रुति भारद्वाज के नाम शामिल थे. आखिरकार जितेंद्र मिश्र को CEO बनाने का फैसला हुआ.
इन बदलावों के बीच मदन मोहन पांडेय की नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राम जन्मभूमि मामले की कानूनी लड़ाई में वह लंबे समय तक रामलला की ओर से अदालत में पैरवी करते रहे हैं.
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