डोनाल्ड ट्रंप को फिर से बड़ा झटका, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश की वैधता दी
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक को हटाने के प्रयास को खारिज कर दिया। यह फैसला 5-4 के बहुमत से आया सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप सरकार की अपील को रद्द कर दिया। ट्रंप ने फैसले के बाद कुक के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी।

सौजन्य से:- Live Hindustan
ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से फिर बड़ा झटका, फेडरल रिजर्व गवर्नर को हटाने की कोशिश पर लगा ब्रेक
US News Today: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फेडरल रिजर्व बोर्ड की गवर्नर लिसा कुक को पद से हटाने के प्रयास को 5-4 के बहुमत से खारिज कर दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक को बर्खास्त करने के प्रयास को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 5-4 के फैसले से रोक दिया है। 1913 में फेडरल रिजर्व की स्थापना के बाद यह पहला मौका है जब किसी राष्ट्रपति ने केंद्रीय बैंक के अधिकारी को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने इसे खारिज कर दिया। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ ने ट्रंप प्रशासन के उस अनुरोध को खारिज कर दिया, जिसमें फेड गवर्नर लिसा कुक को तत्काल बर्खास्त करने से रोकने वाले निचली अदालत के आदेश को हटाने की मांग की गई थी।
1913 के बाद पहली बार कोई राष्ट्रपति कर रहा था ऐसा
बता दें कि फेडरल रिजर्व की स्थापना 1913 में हुई थी। तब से अब तक किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने केंद्रीय बैंक के किसी अधिकारी को बर्खास्त नहीं किया था। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में फेड की स्वतंत्रता पर बार-बार हमला बोलते हुए अपनी कार्यकारी शक्तियों की सीमाओं को परखा है। लिसा कुक फेडरल रिजर्व बोर्ड की सात सदस्यीय टीम का हिस्सा हैं, जो अमेरिकी मौद्रिक नीति तय करने में अहम भूमिका निभाती है। उनका कार्यकाल 2038 तक चलना है। उन्हें 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नियुक्त किया था।
फैसले पर क्या बोले ट्रंप?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रंप ने लिसा कुक के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन्होंने लिखा कि हम तुरंत उचित कार्रवाई करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी अपराधी संयुक्त राज्य अमेरिका के कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले न ले सके। उन्होंने अदालत के फैसले को 'पूरी तरह प्रक्रियात्मक' करार दिया। बता दें कि ट्रंप ने कुक पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, जो अभी तक साबित नहीं हुए हैं। गौरतलब है कि कुक फेड की पहली अश्वेत महिला गवर्नर हैं, इन आरोपों से इनकार करती हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप मौद्रिक नीति पर मतभेद के चलते उन्हें हटाना चाहते हैं और इन आरोपों को बहाना बना रहे हैं।
ट्रंप ने कब की थी हटाने की कोशिश
ट्रंप ने 25 अगस्त 2025 को सोशल मीडिया पर बर्खास्तगी का पत्र पोस्ट कर कुक को हटाने की कोशिश की थी। इसके बाद जिला न्यायाधीश जिया कॉब ने फैसला दिया कि बिना नोटिस या सुनवाई के यह कदम उचित प्रक्रिया का उल्लंघन है। न्यायाधीश ने कहा कि आरोप कुक के पद संभालने से पहले के हैं और फेडरल रिजर्व अधिनियम के तहत पर्याप्त 'कारण' नहीं माने जा सकते। कोलंबिया सर्किट अपील अदालत ने भी इस फैसले का समर्थन किया। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रंप सरकार की अपील खारिज कर दी है।
फेडरल रिजर्व की अहमियत
फेडरल रिजर्व दुनिया का सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंक है, जो अमेरिका समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था की ब्याज दरें तय करता है। ट्रंप की वापसी के बाद यह संस्था उनके निशाने पर रही है। 15 मई को जेरोम पॉवेल का फेड चेयरमैन का आठ साल का कार्यकाल खत्म हुआ। उनकी जगह ट्रंप द्वारा नामित केविन वॉर्श को 13 मई को सीनेट ने मंजूरी दी और 22 मई को उन्होंने शपथ ली।
इन मामलों में भी ट्रंप को लगा है झटका
कुक मामले के अलावा ट्रंप ने टैरिफ, आव्रजन, सैन्य और संघीय नीतियों में बड़े बदलाव किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ज्यादातर मामलों में शुरुआती राहत दी है, लेकिन टैरिफ पर रोक लगाना सबस बड़ा अपवाद रहा। टैरिफ मामले में अदालत ने 1977 के कानून के तहत लगाए गए ट्रंप के व्यापक टैरिफ को खारिज कर दिया था। ट्रंप ने इस फैसले पर भी नाराजगी जताते हुए कुछ न्यायाधीशों पर 'शर्म' आने की बात कही और यहां तक कि अपने नियुक्त रिपब्लिकन न्यायाधीशों को भी 'मूर्ख' और 'डेमोक्रेट चापलूस' बताया था।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
भरत तिवारी एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, CBI जांच और पुलिस पर FIR की मांग

राष्ट्रपति ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, फेडरल रिजर्व की गवर्नर कुक को हटाने से इनकार

अकाल तख्त ने बेअदबी कानून पर सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम दिया

सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ी, केतन अग्रवाल मर्डर केस में और आगे बढ़ रही जांच

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कुख्यात मामलों में महत्वपूर्ण आदेश दिए

पत्नी के तंज पर पति ने की थी पत्नी की हत्या, उम्रकैद पर बदली सजा

चचेरे भाई को फांसी की सजा, तीन वर्षीय मासूम से दुष्कर्म और हत्या

आजीवन कारावास की सजा को घटाकर 7 साल जेल की सजा
ताज़ा ख़बरें
- अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति ट्रम्प को प्रमुख अधिकार दिए, स्वतंत्र एजेंसियों के अध्यक्षों को निकालने की संकोचन दी
- दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चोरी के मामले में भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद पर लगाए आरोप
- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्पष्टीकरण मांगा पुलिस की अभिषेक बनर्जी के घर पर छापेमारी के बारे में
- बंगाल में 'गुंडाराज' समाप्त होगा, विधानसभा में पास हुआ सख्त कानून
- न्यायसंगत विवाह विघटन: गुजरात उच्च न्यायालय के तीन महत्वपूर्ण निर्णय
- मेघालय उच्च न्यायालय ने सोनम रघुवंशी को जमानत देने के शिलांग न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा
- सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया, क्योंकि आसमान टूटेगा नहीं?
- बंगाल विधानसभा में ओबीसी आरक्षण बिल पास, लेकिन हाई कोर्ट में पहले ही चुनौती

