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अकाल तख्त ने बेअदबी कानून पर सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम दिया

अमृतसर में जत्थेदार के समक्ष पेश होकर 87 सिख विधायकों ने संशोधन का समर्थन किया, जत्थेदार ने निर्देश दिया कि कानून में प्रयुक्त 'बीर' शब्द को बदलकर 'सरूप' शब्द करना होगा और किसी डेरे के प्रमुख के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराने का सख्त प्रावधान जोड़ा जाए।

29 जून 2026 को 05:25 pm बजे
अकाल तख्त ने बेअदबी कानून पर सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम दिया

सौजन्य से:- ABP News

पंजाब: बेअदबी कानून पर अकाल तख्त का सख्त रुख, सिख विधायकों को एक महीने का अल्टीमेटम

Punjab News In Hindi: बेअदबी कानून पर अकाल तख्त द्वारा पंजाब सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम दिया गया है। अमृतसर में जत्थेदार के समक्ष पेश होकर 87 सिख विधायकों ने संशोधन का समर्थन किया।

पंजाब के नए बेअदबी कानून को लेकर धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी गई है. अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज द्वारा सोमवार को पंजाब सरकार को एक महीने का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है. अमृतसर स्थित अकाल तख्त साहिब में तलब किए गए पंजाब के सभी सिख विधायकों और सिख कैबिनेट मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान यह निर्देश जारी किया गया.

जत्थेदार गड़गज द्वारा स्पष्ट किया गया कि पंजाब विधानसभा द्वारा 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' को सिख पंथ और धार्मिक संस्थाओं से बिना किसी राय-मशविरे के पारित किया गया था. अकाल तख्त का मानना है कि इस कानून की कुछ धाराएं गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और सिख समुदाय (संगत) की भावनाओं के विपरीत हैं, जिन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए.

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धार्मिक शब्दावली और डेरा प्रमुखों पर कार्रवाई के निर्देश

बैठक के दौरान जत्थेदार द्वारा सभी विधायकों को आपत्तियों की एक आधिकारिक सूची सौंपी गई. इसमें प्रमुख रूप से कानून में प्रयुक्त ‘बीर’ शब्द को बदलकर ‘सरूप’ शब्द करने का निर्देश दिया गया है. जत्थेदार ने कड़े लहजे में कहा कि पंजाब विधानसभा को सिख धार्मिक शब्दावली तय करने का कोई अधिकार नहीं है, यह सर्वाधिकार केवल अकाल तख्त के पास सुरक्षित है.

इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया कि यदि किसी डेरे के अनुयायी द्वारा किसी साजिश के तहत श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की जाती है, तो कानून में संबंधित डेरे के प्रमुख (Chief) के खिलाफ भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का सख्त प्रावधान जोड़ा जाए. जत्थेदार ने कहा कि बेअदबी करने वालों को आजीवन कारावास जैसी कड़ी सजा देने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन धार्मिक नियमों से समझौता नहीं किया जा सकता.

सरकार और विपक्ष ने दिया समर्थन

अकाल तख्त परिसर में हुई इस पेशी के दौरान मंत्री समेत कुल 87 विधायक मौजूद रहे, जिन्होंने हाथ उठाकर जत्थेदार के प्रस्ताव का सर्वसम्मति से समर्थन किया. बैठक के बाद पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा मीडिया को बताया गया कि जत्थेदार साहिब द्वारा कुछ महत्वपूर्ण संशोधन सुझाए गए हैं. इन सुझावों को पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष के माध्यम से आधिकारिक रूप से प्राप्त किया जाएगा, जिसके बाद सरकार द्वारा इस पर विस्तृत चर्चा कर एक महीने के भीतर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा.

विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा और बागी अकाली विधायक मनप्रीत सिंह अयाली समेत कई प्रमुख नेताओं द्वारा भी अकाल तख्त के इन निर्देशों का पालन करने की बात कही गई है.

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