सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के बिजली वितरण कंपनियों के कैग ऑडिट पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा बिजली डिस्कॉम कंपनियों के आदेशित सीएजी ऑडिट पर रोक लगा दी। इस निर्णय के बाद दिल्ली सरकार को झटका लगा है, जिसने उपभोक्ताओं से 38,500 करोड़ रुपये से ज़्यादा के नियामक परिसंपत्तियों की रिकवरी की इजाजत देने से पहले, राजधानी की निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के वित्त की जांच करने के अपने प्रयास में सीएजी ऑडिट को मुख्य बताया था।

सौजन्य से:- ETV Bharat
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के बिजली वितरण कंपनियों के कैग ऑडिट पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा बिजली डिस्कॉम कंपनियों के आदेशित सीएजी ऑडिट पर रोक लगा दी है.
By Sumit Saxena
Published : July 3, 2026 at 3:12 PM IST
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के कैग ऑडिट के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी. साथ ही कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, जबकि वह दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) के नेशनल ऑडिटर नियुक्त करने के निर्णय की कानूनी वैधता की जांच कर रहा है.
इस मामले की सुनवाई जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने की. पीठ ने बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) के अप्रैल के फैसले के खिलाफ डीईआरसी की अपील पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया. ट्रिब्यूनल ने माना कि सीएजी को ऑडिट सौंपना कानूनी ढांचे के खिलाफ है, इसके बजाय, उसने रेगुलेटर को सख्त ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र चार्टर्ड एकाउंटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया.
सुनवाई के दौरान, बेंच के सामने यह तर्क दिया गया कि सरकार की चिंता यह है कि ऑडिट से यह पता चलने से पहले कि ये देनदारियां कैसे जमा हुईं, उपभोक्ता पर नियामक परिसंपत्तियों की वसूली करने का बोझ न पड़े.
हालांकि, बेंच ने पूछा कि सीएजी को ऑडिटर नियुक्त करने की कानूनी मान्यता तक सीमित अपील में नियामक परिसंपत्तियों के परिसमापन का मुद्दा कैसे उठा. डिस्कॉम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एम. सिंघवी और बडी रंगनाथन पेश हुए. उन्होंने तर्क दिया कि ऑडिट और नियामक परिसंपत्तियों की रिकवरी के मुद्दे अलग-अलग हैं.
पिछले साल के फैसले का हवाला देते हुए यह तर्क दिया गया कि नियामक परिसंपत्तियों के परिसमापन का रोडमैप 2031 तक पहले ही तय हो चुका है. वकील ने जोर देकर कहा कि मौजूदा कार्रवाई सीएजी की नियुक्ति की कानूनी मान्यता तक ही सीमित है.
पीठ ने कहा कि मौजूदा सिविल अपील सीधे तौर पर इस मुद्दे से जुड़ी है कि क्या सीएजी से वितरण कंपनियों का ऑडिट प्रक्रिया शुरू करने का डीईआरसी का एक्शन कानूनी तौर पर सही है. पीठ ने डीईआरसी की अपील पर नोटिस जारी किया और एपीटीईएल के चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने के निर्देश और इस महीने की शुरुआत में दिल्ली सरकार द्वारा दिए गए नए सीएजी ऑडिट के आदेश, दोनों पर रोक लगा दी.
इस स्थगन आदेश से दिल्ली सरकार को झटका लगा है, जिसने उपभोक्ताओं से 38,500 करोड़ रुपये से ज़्यादा के नियामक परिसंपत्तियों की रिकवरी की इजाजत देने से पहले, राजधानी की निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के वित्त की जांच करने के अपने प्रयास में सीएजी ऑडिट को मुख्य बताया था.
पीठ ने आगे आदेश दिया कि जब तक 15 जुलाई को उसी पीठ द्वारा मामले की सुनवाई नहीं हो जाती, जिसने 6 अगस्त, 2025 को फैसला सुनाया था, तब तक स्टेटस को बनाए रखा जाए.
सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने अपने 2025 के फैसले में, 2031 तक दिल्ली के नियामक परिसंपत्तियों को फेज में खत्म करने का फ्रेमवर्क तय किया, और उनके जमा होने के हालात का “सख्त और गहन ऑडिट” करने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चीफ जस्टिस की मंजूरी के बाद मामले की सुनवाई एक ही पीठ को करनी चाहिए.
ये भी पढ़ें- मेघालय हनीमून मर्डर केस : आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
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