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विदेशी आदेश की अवहेलना को स्वीकार करने पर हाई-कोर्ट ने सख्त किया कदम

दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतर्राष्ट्रीय हिरासत विवाद में एक नाबालिग बच्चे की कस्टडी का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि किसी विदेशी अदालत के आदेश की अवहेलना नहीं की जा सकती, अन्यथा यह न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करेगा।

3 जुलाई 2026 को 01:24 pm बजे
विदेशी आदेश की अवहेलना को स्वीकार करने पर हाई-कोर्ट ने सख्त किया कदम

सौजन्य से:- Live Hindustan

विदेशी अदालत के आदेश की अवहेलना स्वीकार्य नहीं : हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्चे को कनाडा में अपने पिता के पास भेजने का आदेश दिया है। न्यायालय ने कहा कि किसी विदेशी कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं की जा सकती। पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि बच्चे को वापस भेजने में देरी नहीं होनी चाहिए, अन्यथा यह न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करेगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतर्राष्ट्रीय हिरासत विवाद में नाबालिग बच्चे को कनाडा में रह रहे उसके पिता के पास भेजने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी विदेशी अदालत के आदेश की अवहेलना कर बच्चे को अपने पास रखने वाला अभिभावक बाद में यह कहकर कानूनी लाभ नहीं ले सकता कि समय बीतने के कारण बच्चा अब नए माहौल में पूरी तरह रच-बस गया है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद एवं न्यायमूर्ति हरिश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने कहा कि विदेशी अदालत के फैसले की अवहेलना को स्वीकार करने का मतलब होगा कि न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता व अनुशासन पर गंभीर असर पड़ेगा।

पीठ ने कहा कि यदि पक्षकार पहले विदेशी अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करें, वहां मुकदमा लड़ें और प्रतिकूल आदेश आने के बाद उसकी अनदेखी कर दूसरे देश में चले जाएं तो यह स्वीकार्य नहीं है। पीठ ने कहा कि ऐसा आचरण अंतर्राष्ट्रीय कस्टडी विवादों में न्यायिक आदेशों से बचने को बढ़ावा देगा।यह मामला पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है। पिता ने मार्च 2020 में कनाडा के ओंटारियो स्थित न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार अपने नाबालिग बेटे को कनाडा वापस भेजने व उसकी कस्टडी सौंपने की मांग की है। पिता का कहना था कि अक्तूबर 2019 में मां उसकी सहमति के बिना बच्चे को भारत ले आई थी। बाद में कनाडा की अदालत ने बच्चे को वापस भेजने का आदेश देते हुए अस्थायी एकल कस्टडी पिता को सौंप दी थी। मां ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि बच्चा पिछले लगभग छह वर्षों से भारत में रह रहा है। यहां के सामाजिक एवं भावनात्मक माहौल में पूरी तरह घुल-मिल चुका है। ऐसे में उसे कनाडा भेजना उसके लिए नुकसानदेह होगा। पीठ ने इस दलील को खारिज कर दी।

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