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सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के अवैध रिहायशी‑व्यावसायिक निर्माणों पर विशेष आयोग स्थापित किया

पूर्व जज सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में गठित न्यायिक आयोग उल्देपुर में बन रही अनधिकृत कॉलोनियों की गहन जांच करेगा। रिपोर्ट में 16,726 अवैध इमारतों की पहचान हुई है, जिससे राज्य आवास परिषद की स्थिति‑रिपोर्ट ने कोर्ट को चौंका दिया। शहर को चार जोनों में बाँट कर सर्वेक्षण किया गया था।

26 सितंबर 2026 को 05:04 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के अवैध रिहायशी‑व्यावसायिक निर्माणों पर विशेष आयोग स्थापित किया

सौजन्य से:- Hindustan

आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माण और रिहायशी संपत्तियों के व्यवसायिक इस्तेमाल को लेकर एक न्यायिक आयोग का गठन किया है। पूर्व जज जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में आयोग मेरठ के उल्देपुर क्षेत्र में इन अवैध कॉलोनियों की जाँच करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, 16,726 अवैध निर्माणों की पहचान की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माण और रिहायशी संपत्तियों को व्यवसायिक इस्तेमाल में बदलने के मामले को गंभीरता से लेते हुए, एक न्यायिक आयोग बनाया है। आयोग की अध्यक्षता पूर्व जज जस्टिस सुधांशु धूलिया करेंगे। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई के दौरान बताया कि यह आयोग मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में उस जमीन की प्रकृति की गहन जांच करेगा, जहां ये अवैध आवासीय कॉलोनियां बनी हैं। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी. गुरुप्रसाद की रिपोर्ट देखने के बाद पीठ ने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट पढ़कर हमें हैरानी और परेशानी हुई है कि उल्देपुर में सैकड़ों अवैध रिहायशी कॉलोनियां बन गई हैं।

पीठ ने गौर किया कि विभाग ने मेरठ के कई इलाकों का निरीक्षण और सर्वे किया है। रिपोर्ट से पता चला कि शहर को चार जोन में बांटा गया है। जोन-ए, जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी। सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर के अपने आदेश में कहा था जोन-ए में, निरीक्षण/सर्वे के लिए तैनात 16 टीमों ने 16,726 निर्माणों की पहचान की है जो पूरी तरह से अवैध हैं।

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