सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के अवैध रिहायशी‑व्यावसायिक निर्माणों पर विशेष आयोग स्थापित किया
पूर्व जज सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में गठित न्यायिक आयोग उल्देपुर में बन रही अनधिकृत कॉलोनियों की गहन जांच करेगा। रिपोर्ट में 16,726 अवैध इमारतों की पहचान हुई है, जिससे राज्य आवास परिषद की स्थिति‑रिपोर्ट ने कोर्ट को चौंका दिया। शहर को चार जोनों में बाँट कर सर्वेक्षण किया गया था।

सौजन्य से:- Hindustan
आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माण और रिहायशी संपत्तियों के व्यवसायिक इस्तेमाल को लेकर एक न्यायिक आयोग का गठन किया है। पूर्व जज जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में आयोग मेरठ के उल्देपुर क्षेत्र में इन अवैध कॉलोनियों की जाँच करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, 16,726 अवैध निर्माणों की पहचान की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माण और रिहायशी संपत्तियों को व्यवसायिक इस्तेमाल में बदलने के मामले को गंभीरता से लेते हुए, एक न्यायिक आयोग बनाया है। आयोग की अध्यक्षता पूर्व जज जस्टिस सुधांशु धूलिया करेंगे। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई के दौरान बताया कि यह आयोग मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में उस जमीन की प्रकृति की गहन जांच करेगा, जहां ये अवैध आवासीय कॉलोनियां बनी हैं। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी. गुरुप्रसाद की रिपोर्ट देखने के बाद पीठ ने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट पढ़कर हमें हैरानी और परेशानी हुई है कि उल्देपुर में सैकड़ों अवैध रिहायशी कॉलोनियां बन गई हैं।
पीठ ने गौर किया कि विभाग ने मेरठ के कई इलाकों का निरीक्षण और सर्वे किया है। रिपोर्ट से पता चला कि शहर को चार जोन में बांटा गया है। जोन-ए, जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी। सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर के अपने आदेश में कहा था जोन-ए में, निरीक्षण/सर्वे के लिए तैनात 16 टीमों ने 16,726 निर्माणों की पहचान की है जो पूरी तरह से अवैध हैं।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
क्या महिलाएं सुरक्षा के लिये हथियार रख सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण

ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों की बैठक में मतदाता सूची एसआईआर पर ली गई मुख्य मंज़ूरियाँ

क्या महिलाएं अपनी सुरक्षा के लिए हथियार रख सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण

महिलाओं के आत्मरक्षा अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की राय

सुरक्षा के लिए हथियार रखने पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाईकोर्ट के 12 अपर जजों को स्थायी पद पर रखने की सिफारिश की

सुप्रीम कोर्ट के 13 सवालों पर FSSAI ने 43 पृष्ठों का विस्तृत हलफ़नामा पेश किया

FSSAI ने 13 प्रश्नों के उत्तर में पेश किया 43‑पृष्ठीय हलफनामाः लाल चेतावनी लेबल का ढांचा और समय‑सीमा
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को दिया कड़ाकेदार चेतावनी
- सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया, सोशल मीडिया पर राष्ट्रविरोधी सामग्री हटाने के प्रस्ताव पर निर्णय टाला
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को चेतावनी दी: शिक्षा से अधिक मुनाफे पर न ध्यान दें
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को शिक्षा को सेवा‑के‑माध्यम बनाये रखने की सलाह दी
- प्राइवेट विश्वविद्यालयों के लिए सर्वोच्च न्यायालय की चेतावनी: शिक्षा का मकसद सेवा, न कि केवल मुनाफा
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों को सेवा‑केंद्रित शिक्षा का निर्देश दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट विश्वविद्यालयों को शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य पर ज़ोर दिया
- राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्व अदालतों में 63 साल के टलमटोल को न्याय से इनकार बताया

