हिमाचल हाईकोर्ट में तीन नए जजों की नियुक्ति: चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल
भारत के राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर तीन न्यायिक अधिकारियों को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में नियुक्त किया। चिराग भानु सिंह को जज, जबकि भूपेश शर्मा व योगेश जसवाल को अतिरिक्त जज के रूप में तैनात किया गया। इन तीनों जजों का न्यायिक अनुभव 2003 से 2024 तक के विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए विस्तृत है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को मिले तीन नए जज, जानिए कौन हैं चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल
हिमाचल हाईकोर्ट को मिले 3 नए न्यायाधीश. जानिए तीनों जजों का न्यायिक सफर.
By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 28, 2026 at 12:49 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को तीन नए न्यायाधीश मिलने जा रहे हैं. भारत के राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद तीन न्यायिक अधिकारियों को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के जज के तौर पर नियुक्त करने को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है. इनमें न्यायाधीश चिराग भानु सिंह को जज, जबकि न्यायाधीश भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल को अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त किया गया है. आइए जानते हैं कि हिमाचल हाईकोर्ट में नियुक्त किए गए ये तीनों नए न्यायाधीश कौन हैं और उनका न्यायिक क्षेत्र में अब तक का सफर कैसा रहा.
न्यायाधीश चिराग भानु सिंह
18 दिसंबर 1970 को मंडी जिला में जन्मे कंवर चिराग भानु सिंह ने मंडी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद वर्ष 1994 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की. प्रदेश बार काउंसिल से अधिवक्ता का लाइसेंस लेने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट के समक्ष वकालत शुरू की. वर्ष 2003 में उन्हें हिमाचल सरकार की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल के पद पर तैनात किया गया.
वर्ष 2007 में वे अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के पद पर नियुक्त हुए. इसके बाद उन्होंने ऊना और सोलन जिला न्यायालय में इस पद पर कार्य किया. उन्होंने श्रम न्यायालय धर्मशाला के पीठासीन अधिकारी के तौर पर भी कार्य किया और अभी भी वहीं सेवाएं दे रहे हैं. वे प्रधान सचिव कानून के पद पर भी रहे हैं. उन्होंने ज्यूडिशियल अकादमी के निदेशक के पद पर भी कार्य किया है. वे प्रदेश हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार के पद पर भी तैनात रहे हैं.
न्यायाधीश भूपेश शर्मा
न्यायाधीश भूपेश शर्मा ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि संकाय से विधि स्नातक करने के पश्चात 9 जुलाई 1996 को धर्मशाला स्थित कांगड़ा की कोर्ट नंबर 1 में सब जज-सह-न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में हिमाचल प्रदेश न्यायिक सेवा में प्रवेश किया. मई 1997 में उनका स्थानांतरण मंडी हो गया. शिमला स्थानांतरण होने पर 24 अप्रैल 2001 को कोर्ट नंबर 2 में कार्यभार संभाला और सितंबर 2003 में सरकाघाट स्थानांतरित हुए. 13 अक्टूबर 2004 को सरकाघाट में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत हुए. इसके
बाद मई 2005 में सुंदर नगर और फरवरी 2009 में सोलन में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के रूप में स्थानांतरित हुए. अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर पदोन्नति के बाद 27 मार्च 2012 को हमीरपुर स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट में तैनात हुए और 31 मार्च 2013 को हमीरपुर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश का कार्यभार संभाला. 28 अप्रैल 2014 को उन्होंने शिमला स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश का कार्यभार संभाला.
जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर तैनाती के बाद 12 दिसंबर 2014 को रामपुर बुशहर स्थित किन्नौर सिविल एवं सत्र प्रभाग में कार्यभार ग्रहण किया. इसके बाद 3 अक्टूबर 2024 तक वे जिला एवं सत्र न्यायाधीश हमीरपुर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोलन, जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऊना और जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिमला के पदों पर तैनात रहे. इसके बाद उनका स्थानांतरण हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के पद पर हुआ और वे 4 अक्टूबर 2024 से इस पद पर कार्यरत हैं.
न्यायाधीश योगेश जसवाल
2 मार्च 1967 को ग्राम अम्बोटा, तहसील अम्ब, जिला ऊना में जन्मे योगेश जसवाल ने शिमला में शिक्षा प्राप्त की. वर्ष 1991 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से एलएलबी किया और वर्ष 1991-1992 में हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के सदस्य के रूप में नामांकित हुए. उन्होंने शिमला में दीवानी और फौजदारी के साथ-साथ राजस्व न्यायालयों में प्रैक्टिस की. हिमाचल प्रदेश न्यायिक सेवाओं में चयनित होने के बाद 8 जुलाई 1996 को उप-न्यायाधीश-सह-न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर 2, हमीरपुर के रूप में शामिल हुए.
इसके बाद रोहड़ू और पालमपुर में तैनात रहे. अक्टूबर 2004 में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के रूप में पदोन्नत हुए और जनवरी 2005 में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में पदोन्नत हुए. वे सिविल जज (सीनियर डिवीजन)-सह-अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कसौली, जिला सोलन के पद पर तैनात रहे. इसके बाद लाहौल और स्पीति के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बने और 21 मई 2010 को कुल्लू में कार्यभार ग्रहण किया. 31 जनवरी 2013 तक सिविल जज (सीनियर डिवीजन)-सह-मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुल्लू के रूप में कार्य किया.
जनवरी 2013 में उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नत हुए. स्थानांतरण पर 20 मई 2013 से घुमारवीं में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में शामिल हुए. इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए और 12 मई 2016 को रामपुर बुशहर में सिविल एवं सत्र डिविजन, किन्नौर में शामिल हुए. 26 अक्टूबर 2016 को रामपुर बुशहर से स्थानांतरित होकर 12 नवंबर 2016 को सिविल एवं सत्र डिविजन, चंबा में शामिल हुए. स्थानांतरण पर 28 दिसंबर 2018 को श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्यभार ग्रहण किया.
इसके बाद 9 अगस्त 2021 को धर्मशाला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कांगड़ा के रूप में शामिल हुए. 1 जनवरी 2024 तक हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार के पद पर तैनात रहे. इसके बाद 2 जनवरी 2024 को पीठासीन अधिकारी, श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक न्यायाधिकरण, शिमला के रूप में स्थानांतरित किए गए. इसके पश्चात 9 मई 2024 को निदेशक, हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी, शिमला के रूप में कार्यभार ग्रहण किया. वर्तमान में स्थानांतरण पर 4 अप्रैल 2025 को उन्होंने नाहन में जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिरमौर के रूप में कार्यभार ग्रहण किया.
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