अमीरों की 'लग्जरी लिटिगेशन' बर्दाश्त नहीं... सुप्रीम कोर्ट ने एक्ट्रेस रेहाना खान और वकील रिजवान सिद्दीकी की अर्जी पर क्यों कहा ऐसा
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि लाइन में कई गरीब हैं, अमीरों की 'लग्जरी लिटिगेशन' यानी शौकिया मुकदमेबाजी बर्दाश्त नहीं। एक्ट्रेस रेहाना खान और वकी…

सौजन्य से:- Navbharat Times
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि लाइन में कई गरीब हैं, अमीरों की 'लग्जरी लिटिगेशन' यानी शौकिया मुकदमेबाजी बर्दाश्त नहीं। एक्ट्रेस रेहाना खान और वकील रिजवान सिद्दीकी से जुड़ा मामला क्या है, जानिए।
नई दिल्ली: ऐसे समय में जब गरीब लोगों को अपनी अर्जी पर सुनवाई के लिए सालों तक लाइन में इंतजार करना पड़ता है, सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावशाली लोगों की 'लग्जरी लिटिगेशन' (शौकिया मुकदमेबाजी) की आदत पर नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इसके कारण असली मामलों की सुनवाई में देरी होती है। कोर्ट ने याचिका देने वाले दोनों पक्षों पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया क्योंकि वे 'साफ नीयत' के साथ अदालत में नहीं आए थे।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच में याचिका
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने एक्ट्रेस रेहाना खान और उनके वकील रिजवान सिद्दीकी की अर्जी खारिज कर दी। वो बीते 11 सालों से बार काउंसिल ऑफ इंडिया, बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट समेत अलग-अलग मंच पर कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। बेंच ने कहा कि दोनों पक्ष हमारे पास किसी गलत बात की शिकायत लेकर आए हैं, और दोनों ही उस समस्या का काफी हद तक कारण रहे हैं। उन्होंने मिलकर 11 सालों तक बार काउंसिल, हाईकोर्ट और इस कोर्ट का समय बर्बाद किया।
एक्ट्रेस रेहाना खान और वकील रिजवान सिद्दीकी से जुड़ा मामला
शीर्ष अदालत ने कहा कि ये समय उन दूसरे लोगों का था जो ऐसी राहत का इंतजार कर रहे थे जिसकी उन्हें सच में जरूरत थी। हम दोनों के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताते हैं। दोनों पक्षों के व्यवहार को देखते हुए, हम जुर्माना लगाना सही समझते हैं। बेंच ने गौर किया कि दोनों पक्ष इस भरोसे के साथ कोर्ट आए थे कि वे सही साबित होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, जुर्माना भी लगाया
बेंच ने कहा कि हर अहम बात को ऐसे रिकॉर्ड से निकालना पड़ा जिसमें दोनों तरफ से बातों को छिपाना, बढ़ा-चढ़ाकर बताना और बाद में नई बातें जोड़ना आम बात थी। न्याय व्यवस्था कोई ऐसी सुविधा नहीं है जिसका इस्तेमाल पक्षकार हिसाब-किताब बराबर करने, अपनी ही वजह से खतरे में पड़ी अपनी साख बचाने या खुद खड़े किए गए विवाद से फायदा उठाने के लिए करें। हम शुरू में ही यह कह रहे हैं- और आगे इसके कारण भी बताएंगे कि न तो अपील करने वाला और न ही जवाब देने वाला, कोई भी इस कोर्ट से सम्मान के साथ जा रहा है।
अदालत कोई ऑडिटोरियम नहीं: SC
शीर्ष अदालत ने कहा कि इन मामलों का रिकॉर्ड पढ़ने में बहुत दिलचस्प लगता है। इस तरह के मुकदमों में एक खास आकर्षण होता है। हम इससे इनकार नहीं करते। लेकिन अदालत कोई ऑडिटोरियम नहीं है और किसी केस का ड्रामा उसके गुण-दोष का पैमाना नहीं होता। दिखावे को हटा दें, तो इन कार्यवाही से जो बात सामने आती है, वह एक ऐसा विवाद है जिसे दो पक्षों ने आपस में खड़ा किया, लंबा खींचा और देश की सबसे बड़ी अदालत तक ले आए। हर पक्ष को उम्मीद थी कि हम इस तमाशे में इतने उलझ जाएंगे कि इसे खड़ा करने में उनकी अपनी भूमिका को नजरअंदाज कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
लेखक के बारे मेंरुचिर शुक्लारुचिर शुक्ला, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। फरवरी 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े हैं। वह होमपेज टीम के सदस्य हैं। शिफ्ट देखने के साथ न्यूज स्टोरी लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। खबरों के अलग-अलग एंगल से डेवलप करने में माहिर है। करियर की शुरुआत 2011 में न्यूज एजेंसी से की, इस दौरान डेस्क के साथ-साथ रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया। कई अहम खबरों को ब्रेक किया। राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, पॉजिटिव न्यूज में विशेषज्ञता रखते हैं। न्यूज एजेंसी से शुरुआत के बाद टीवी फिर डिजिटल न्यूज टीम का हिस्सा बने। करीब 13 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं।
विशेषज्ञता : रुचिर शुक्ला की पॉलिटिकल खबरों में खास रुचि है। ब्रेकिंग पर नजर रहती है। बड़ी खबरों से जुड़ी इनसाइड स्टोरी, एनालिसिस में भी महारत रखते हैं। क्राइम, पॉजिटिव, सक्सेस स्टोरी के साथ ग्लोबल पॉलिटिकल मुद्दों पर भी निगाहें रहती हैं।
पत्रकारिता का अनुभव : रुचिर शुक्ला ने 2011 में News Point न्यूज एजेंसी से करियर की शुरुआत की, जहां डेस्क के साथ रिपोर्टिंग में हाथ आजमाया। इस दौरान बीजेपी और कांग्रेस बीट को कवर किया। कई खबरें ब्रेक की। इस दौरान पंजाब पुलिस से जुड़ी एक डॉक्यूमेंट्री में भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की। 2012 में मैजिक टीवी न्यूज चैनल से जुड़े। 2013 में इंडिया न्यूज के बिहार-झारखंड चैनल से जुड़े। अप्रैल 2014 में अमर उजाला डिजिटल से जुड़े। इस दौरान होम टीम में कई अहम जिम्मेदारी संभाली। करीब ढाई साल तक अमर उजाला डिजिटल में रहने के बाद अगस्त 2016 में वनइंडिया हिंदी से जुड़े। यहां उन्होंने होम टीम और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान यूपी असेंबली इलेक्शन 2017 को लेकर अहम जिम्मेदारी मिली। वनइंडिया हिंदी में रहते हुए लोकसभा चुनाव 2019 कवर किया। जिसमें कई खास विश्लेषण और स्पेशल स्टोरी की। इसके बाद 2011 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी खास रोल निभाया। फरवरी 2020 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ने के बाद कई अहम जिम्मेदारियों को संभाला। फिलहाल रुचिर होम पेज और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रुचिर शुक्ला ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से हिंदी ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया है।... और पढ़ें
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