होमअधिकारसुप्रीम कोर्ट में पहुंची सीएपीएफ कैडर अफसरों की याचिका, नए कानून को बताया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
अधिकार

सुप्रीम कोर्ट में पहुंची सीएपीएफ कैडर अफसरों की याचिका, नए कानून को बताया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

सीएपीएफ के 111 कैडर अफसर, जिनमें कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र से सम्मानित अधिकारी भी शामिल हैं, ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और नए कानून को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उनकी मांग है कि उच्च प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति योग्य कैडर अफसरों में से की जानी चाहिए।

5 अगस्त 2026 को 08:16 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट में पहुंची सीएपीएफ कैडर अफसरों की याचिका, नए कानून को बताया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

सौजन्य से:- Amar Ujala

{"_id":"6a735ab3dbe1894c6003a906","slug":"111-decorated-capf-cadre-officers-including-kirti-chakra-awardees-move-supreme-court-2026-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"CAPF: कैडर अफसर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, याचिकाकर्ताओं में कीर्ति चक्र-शौर्य चक्र सम्मानित अधिकारी भी शामिल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}

CAPF: कैडर अफसर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, याचिकाकर्ताओं में कीर्ति चक्र-शौर्य चक्र सम्मानित अधिकारी भी शामिल

विज्ञापन

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या

वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026 को चुनौती देने वालों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, खासतौर पर सीआरपीएफ के वे 111 कैडर अफसर भी शामिल हैं, जिन्हें वीरता के मोर्चे पर कीर्ति चक्र-शौर्य चक्र, राष्ट्रपति पुलिस पदक व पीएमजी से सम्मानित किया गया है। पदोन्नति की राह में पिछड़े इन कैडर अफसरों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण इन्हें मजबूरन सुप्रीम का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।

विज्ञापन

सीएपीएफ के कैडर अफसरों ने अपनी याचिका में नए कानून को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने सर्वोच्च अदालत के समक्ष यह मांग रखी है कि सीएपीएफ में उच्च प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति मुख्य रूप से योग्य कैडर अफसरों में से की जानी चाहिए, न कि केवल प्रतिनियुक्ति पर आए आईपीएस के द्वारा उन पदों को भरा जाए। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के महानिदेशकों से खफा बताई गई है। वजह, इतने बड़े पैमाने पर कैडर अफसर, सुप्रीम कोर्ट में कैसे पहुंच गए। सरकार ने जब 'सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026' को संसद में पारित कराया, उससे पहले नए एक्ट से जुड़े हर पहलू पर बारीकी से विचार किया गया था। सभी बलों के प्रमुखों से सुझाव लिए गए थे।

विज्ञापन

इसके बावजूद अब हजारों कैडर अफसर सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गए हैं। सरकार की तरफ से केंद्रीय बलों के महानिदेशकों से मौजूदा स्थिति को संभालने की बात कही गई है। अगर याचिकाकर्ताओं की संख्या यूं ही बढ़ती रही तो सीएपीएफ के नए एक्ट में संशोधन करने पर विचार करना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कैडर अफसरों की याचिका पर सरकार से जवाब मांगा है। केस की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।

विज्ञापन

इस मामले के प्रमुख याचिकाकर्ता सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट बिभोर कुमार सिंह हैं, जिन्होंने 2022 में बिहार में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान अपना दोनों पैर खो दिए थे। उन्हें बहादुरी के लिए राष्ट्रपति द्वारा शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। बल के अन्य कैडर अफसरों की ओर से 890 याचिकाएं दायर की गई हैं। सर्वोच्च अदालत ने इन याचिकाओं पर भी विचार किया है। सीआरपीएफ के याचिकाकर्ताओं में 111 कैडर अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें वीरता पदकों से सम्मानित किया गया है। दो अधिकारी ऐसे हैं, जिन्होंने बहादुरी के मोर्चे पर कीर्ति चक्र हासिल किया है। आठ याचिकाकर्ताओं को शौर्य चक्र से नवाजा गया है। एक याचिकाकर्ता, वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक (पीपीएमजी) से सम्मानित हो चुका है। सौ कैडर अफसर, वीरता के लिए पुलिस पदक (पीएमजी) से सम्मानित किए गए हैं।

नए कानून को बताया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सीएपीएफ (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) अधिनियम 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की है। सीएपीएफ के कैडर अफसरों की याचिका में नए कानून को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है। याचिकाओं में यह तर्क दिया गया है कि सीएपीएफ (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) अधिनियम 2026, शीर्ष अदालत के उस फैसले को कानूनी तौर पर अमान्य करने जैसा है, जिसमें केंद्रीय बलों में आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने की बात कही गई थी। सर्वोच्च अदालत के इस फैसले के बाद केंद्रीय बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति में तेजी आ गई। गत वर्ष 23 मई के बाद से लेकर अब तक लगभग 56 आईपीएस ने सीएपीएफ ज्वाइन की है। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कैडर अफसरों की याचिका पर सुनवाई की।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय?

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मई 2025 में संजय प्रकाश एवं अन्य बनाम भारत सरकार मामले में एक ऐतिहासिक निर्णय दिया गया था। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने सीएपीएफ के ग्रुप 'ए' कार्यपालक संवर्ग को संगठित ग्रुप 'ए' सेवा (ओजीएएस) घोषित करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। उनमें आईजी लेवल तक आईपीएस प्रतिनियुक्ति में चरणबद्ध तरीके से कमी लाना, ताकि संवर्ग अधिकारियों को स्वाभाविक पदोन्नति का अवसर मिल सके। नियमित कैडर समीक्षा हो, नए सेवा नियमों का निर्माण तथा नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (एनएफएफयू) लागू कर दीर्घकालीन पदोन्नति ठहराव को दूर करना शामिल था। केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ संसद में 'सीएपीएफ (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) अधिनियम, 2026' पारित करा लिया।

कोर्ट के फैसले से ज्यादा अहमियत

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, नए एक्ट में कई प्रावधान ऐसे हैं, जिन्हें कोर्ट के किसी भी फैसले से ज्यादा अहमियत दी गई है। सेक्शन 3 में कहा गया है कि 'किसी भी कोर्ट के फैसले या आदेश के बावजूद, सरकार एक नोटिफिकेशन जारी कर नियम बना सकती है। इन नियमों के अंतर्गत सीएपीएफ में अफसरों की भर्ती (पदोन्नति एवं प्रतिनियुक्ति सहित) और उनकी सेवा शर्तों का तरीका व प्रक्रिया तय की जा सकती है। एक्ट में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के जरिए किन पदों को भरा जाएगा, यह प्रावधान किया गया है। सभी केंद्रीय बलों में आईजी के कुल पदों में से 50 प्रतिशत, एडीजी रैंक में कम से कम 67 प्रतिशत पद और एसडीजी व डीजी रैंक के सभी पदों को आईपीएस अफसरों की प्रतिनियुक्ति से भरने की बात कही गई है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
नीरव मोदी अदालत की सुनवाई छोड़कर जेल के शतरंज क्लब पहुंचा, प्रत्यर्पण के डर के बीच शरण मांगने की चर्चा
अधिकार

नीरव मोदी अदालत की सुनवाई छोड़कर जेल के शतरंज क्लब पहुंचा, प्रत्यर्पण के डर के बीच शरण मांगने की चर्चा

कानूनी अपडेट सीधे आपके द्वार!
अधिकार

कानूनी अपडेट सीधे आपके द्वार!

बहु-देशीय जबरन श्रम चिंताओं पर ट्रम्प द्वारा 10% टैरिफ लगाने की घोषणा
अधिकार

बहु-देशीय जबरन श्रम चिंताओं पर ट्रम्प द्वारा 10% टैरिफ लगाने की घोषणा

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: प्रदर्शनकारियों के मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार
अधिकार

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: प्रदर्शनकारियों के मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के सरकारी आदेशों का सामना किया, कल्याणकारी लाभों को मतदाता सूचियों के परिणामों से जोड़ने का खंडन करना है
अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के सरकारी आदेशों का सामना किया, कल्याणकारी लाभों को मतदाता सूचियों के परिणामों से जोड़ने का खंडन करना है

चीन दुनिया पर दबाव बढ़ाता है एक कानून के सहारे
अधिकार

चीन दुनिया पर दबाव बढ़ाता है एक कानून के सहारे

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: पितृत्व विवादों में डीएनए परीक्षण के नियम
अधिकार

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: पितृत्व विवादों में डीएनए परीक्षण के नियम

दिल्ली कोर्ट ने यूएपीए मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार को जमानत दीः अदालत ने तर्क दिया
अधिकार

दिल्ली कोर्ट ने यूएपीए मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार को जमानत दीः अदालत ने तर्क दिया

ताज़ा ख़बरें