प्रमुख धार्मिक स्थलों के विवादों में अदालती मध्यस्थता की पहल कामयाब नहीं
उत्तर प्रदेश में प्रमुख धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों को अदालत के बाहर सुलझाने की कोशिशें विफल हो गई हैं। श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह, ज्ञानवापी मस्जिद और संभल शाही जामा मस्जिद के मामलों में पक्ष इस बात पर अड़े हैं कि अदालत ही इस मामले का फैसला करे।

सौजन्य से:- Hindustan
पक्षकारों ने अदालत की मध्यस्थता संबंधी पहल को ठुकराया
मथुरा में धार्मिक स्थलों विवादों को लेकर पक्षकारों ने कहा कि मामला अत्यधिक संवेदनशील है। अदालत को इस पर फैसला करना चाहिए। ज्ञानवापी मस्जिद मामले में मुस्लिम पक्ष ने मध्यस्थता में भाग लेने की सहमति जताई। संभल और मथुरा मामलों में भी धार्मिक वर्गों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है।
मथुरा, संभल मंदिर-मस्जिद विवाद पर बोले पक्षकार कहा, मामला अति संवेदनशील, अदालत करे फैसला
वाराणसी/मथुरा/संभल, एजेंसी। उत्तर प्रदेश में प्रमुख धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों को अदालत के बाहर सुलझाने की कोशिशें कामयाब नहीं हो पाई हैं। ज्ञानवापी, श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल शाही जामा मस्जिद मामलों से जुड़े पक्ष इस बात पर अड़े हैं कि अदालत ही इस मामले का फैसला करे। हालांकि ज्ञानवापी मस्जिद पक्ष बाद में मध्यस्थता में शामिल होने के लिए अपनी रजामंदी दे दी। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 'देश भर में मध्यस्थता और विवादों के सामंजस्यपूर्ण समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट का एक्शन' (समाधान समारोह) शुरू किया है। इसका मकसद 21, 22 और 23 अगस्त को होने वाली विशेष लोक अदालत से पहले मध्यस्थता के जरिए लंबित मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने को बढ़ावा देना है।
ज्ञानवापी : ज्ञानवापी विवाद
यह मस्जिद वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद 17वीं सदी में मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा प्राचीन मंदिर के कुछ हिस्सों को नष्ट करने के बाद बनाई गई थी। जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि मस्जिद औरंगजेब के शासनकाल से पहले की है और यह एक वैध वक्फ संपत्ति है।
ज्ञानवापी केस की मध्यस्थता में शामिल होगा मुस्लिम पक्ष
वाराणसी, हिटी। सुलह-समझौते से ज्ञानवापी प्रकरण सुलझाने की पहल में मुस्लिम पक्ष भी भागीदार बनेगा। अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के अधिवक्ताओं का पैनल मंगलवार सुबह 10 बजे मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होकर अपना पक्ष रखेगा। हालांकि सोमवार दिन में अंजुमन ने पत्र जारी कर कहा था कि वह किसी भी समझौते या मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं हैं। लेकिन शाम को अंजुमन के पदाधिकारियों के साथ बातचीत के बाद प्रकृति में शामिल होने पर सहमति बनी।
संभल : संभल : शाही जामा मस्जिद-हरि हर मंदिर विवाद
संभल का विवाद वाराणसी के मामले जैसा ही है, जहां उस जगह के धार्मिक स्वरूप को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हिंदू याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 16वीं सदी की जामा मस्जिद एक प्राचीन हरि हर मंदिर की जगह पर बनाई गई थी, जबकि मुस्लिम पक्ष इस दावे को गलत बताता है।
मुस्लिम पक्ष
संभल की शाही जामा मस्जिद कमेटी के वकील शकील अहमद वारसी ने कहा कि यह मामला धार्मिक आस्थाओं से जुड़ा है और इतना संवेदनशील है कि इसे आपसी समझौते से हल नहीं किया जा सकता। यह मंदिर है या मस्जिद, इसका फैसला अदालत को करना चाहिए, न कि आपसी समझौते से।
हिंदू पक्ष
हिंदू पक्ष के वकील गोपाल शर्मा ने कहा कि उन्हें संभल मामले में मध्यस्थता के किसी प्रस्ताव के बारे में जानकारी नहीं है।
मथुरा : श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद
मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदू पक्ष ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया कि मस्जिद उसी जगह पर 17वीं सदी में बनाई गई थी, जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था।
मुस्लिम पक्ष
शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी के सचिव और मुस्लिम पक्ष के वकील तनवीर अहमद से टिप्पणी के लिए संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
हिंदू पक्ष
हिंदू पक्ष के वकील हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में, इस महीने की शुरुआत में मथुरा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सामने हुई मध्यस्थता की कार्यवाही तब विफल हो गई जब मुस्लिम पक्ष का कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुआ।
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