भिवानी में कल प्री-लोक अदालत का आयोजन: लोक अदालत से त्वरित निपटारा
राष्ट्रीय विधिक सेवाएँ प्राधिकरण तथा हरियाणा राज्य विधिक सेवाएँ प्राधिकरण के निर्देश पर 10 सितंबर को भिवानी के स्थायी लोक अदालत में प्री-लोक अदालत की बैठक होगी। इस सत्र का उद्देश्य समझौता योग्य लंबित मामलों का आपसी सहमति से निपटारा करके पक्षों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत देना है। सदस्य सुमन बजाड़ ने बताया कि लोक अदालत सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़ी विवादों को सौहार्दपूर्ण माहौल में हल करने का सुलभ माध्यम है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Bhiwani News: स्थायी लोक अदालत में कल लगेगी प्री-लोक अदालत
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भिवानी। राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण एवं हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के निर्देशानुसार 10 सितंबर को जिलास्तर पर स्थायी लोक अदालत में प्री-लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इसमें अदालतों में लंबित समझौता योग्य मामलों का आपसी सहमति से शीघ्र निपटारा कर पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
स्थायी लोक अदालत की सदस्य सुमन बजाड़ ने बताया कि लोक अदालत आम नागरिकों के विवादों को सौहार्दपूर्ण वातावरण में सुलझाने का सुलभ और प्रभावी माध्यम है। यहां दोनों पक्षों की सहमति और राजीनामे के आधार पर मामलों का अंतिम निस्तारण किया जाता है। स्थाई लोक अदालत में मुख्य रूप से सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से संबंधित विवादों का समाधान किया जाता है।
उन्होंने बताया कि बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं, परिवहन, डाक एवं संचार सेवाओं, बिजली, प्रकाश एवं पानी की आपूर्ति, स्वच्छता एवं पब्लिक कंजर्वेंसी, अस्पताल एवं औषधालय सेवाओं, बीमा सेवाओं, गैस एजेंसी तथा अन्य सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विवादों को आपसी सहमति से निपटाने का प्रयास किया जाता है। इसके अलावा प्रतिष्ठानों से संबंधित पात्र विवादों को भी निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत लिया जा सकता है।
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सुमन बजाड़ ने नागरिकों से अपील की कि सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से संबंधित अपने लंबित एवं समझौता योग्य विवादों को प्री-लोक अदालत में रखवाएं और आपसी सहमति से शीघ्र समाधान का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि लोक अदालत विवादों का निपटारा करने के साथ दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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स्थायी लोक अदालत की सदस्य सुमन बजाड़ ने बताया कि लोक अदालत आम नागरिकों के विवादों को सौहार्दपूर्ण वातावरण में सुलझाने का सुलभ और प्रभावी माध्यम है। यहां दोनों पक्षों की सहमति और राजीनामे के आधार पर मामलों का अंतिम निस्तारण किया जाता है। स्थाई लोक अदालत में मुख्य रूप से सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से संबंधित विवादों का समाधान किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं, परिवहन, डाक एवं संचार सेवाओं, बिजली, प्रकाश एवं पानी की आपूर्ति, स्वच्छता एवं पब्लिक कंजर्वेंसी, अस्पताल एवं औषधालय सेवाओं, बीमा सेवाओं, गैस एजेंसी तथा अन्य सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विवादों को आपसी सहमति से निपटाने का प्रयास किया जाता है। इसके अलावा प्रतिष्ठानों से संबंधित पात्र विवादों को भी निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत लिया जा सकता है।
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सुमन बजाड़ ने नागरिकों से अपील की कि सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से संबंधित अपने लंबित एवं समझौता योग्य विवादों को प्री-लोक अदालत में रखवाएं और आपसी सहमति से शीघ्र समाधान का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि लोक अदालत विवादों का निपटारा करने के साथ दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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