सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप प्रशासन के कदम में बल
प्रशानम के अधिकारियों ने कहा कि कानूनी नियमों को लागू करने में मजबूती आएगी, अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर शरण मांगने वालों को पहले ही वापस भेजा जा सकेगा।

सौजन्य से:- ETV Bharat
ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के इमिग्रेशन संबंधी फैसलों को बड़ी जीत बताया
प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि इन फैसलों से इमिग्रेशन से जुड़े नियमों को लागू करने में मजबूती आती है.
By ANI
Published : June 26, 2026 at 9:01 AM IST
वॉशिंगटन: ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार (स्थानीय समय) को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इमिग्रेशन से जुड़े कई फैसलों का स्वागत किया. इनमें एक फैसला वह भी शामिल है जिसके तहत अधिकारियों को यह इजाजत दी गई है कि वे अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर शरण मांगने वाले प्रवासियों को देश में घुसने से पहले ही लौटा सकें.
प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि इन फैसलों से इमिग्रेशन से जुड़े नियमों को लागू करने में मजबूती आती है और मानवीय आधार पर दी जाने वाली सुरक्षा के अस्थायी स्वरूप की पुष्टि होती है. एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के सेक्रेटरी मार्कवेन मुलिन ने कहा, 'इस हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट के तीन फ़ैसले हमारे देश के इमिग्रेशन कानूनों को लागू करने की दिशा में जीत हैं.'
उन्होंने आगे कहा, 'इनमें शामिल ऐसे विदेशी नागरिकों को शरण के लिए आवेदन करने से रोकना जिन्होंने अमेरिका में कदम नहीं रखा है. 'टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस' को लेकर भी फैसला अहम है.' उन्होंने आगे कहा कि ये फैसले ऐसे 'साधन' (tools) देंगे जो देश की सुरक्षा को बनाए रखने में मदद करेंगे.
उन्होंने कहा, 'ये फैसले हमें अपने देश की सुरक्षा जारी रखने के लिए जरूरी साधन देते हैं.' एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिका के कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने हैती और सीरिया के नागरिकों के लिए 'टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस' (TPS) को खत्म करने के मामले में ट्रंप प्रशासन के अधिकार को सही ठहराया है.'
उन्होंने आगे कहा, 'न्याय विभाग ने सफलतापूर्वक इस बात का बचाव किया कि 'टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस' का मकसद हमेशा से ही इसे अस्थायी रखना था. यह फैसला उस कोशिश को खारिज करता है जिसके तहत इस प्रोग्राम का गलत फायदा उठाकर गैर-कानूनी प्रवासी अमेरिका में बने रहने की कोशिश करते थे.'
इसके अलावा, उन्होंने कहा, 'मुझे इस विभाग के उस काम पर गर्व है जो राष्ट्रपति ट्रंप के बॉर्डर को सुरक्षित करने और कानून के शासन को बनाए रखने के एजेंडे को आगे बढ़ाता है.' न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से फैसला सुनाया कि ट्रंप प्रशासन "मीटरिंग" नाम की पॉलिसी लागू कर सकता है, जिससे बॉर्डर अधिकारी हर दिन एंट्री पोर्ट पर शरण मांगने वाले प्रवासियों की संख्या को सीमित कर सकते हैं.
अखबार ने बताया कि ज़्यादातर प्रवासी तब तक अमेरिका 'नहीं पहुँचते' जब तक वे असल में देश में दाखिल नहीं हो जाते. बहुमत की ओर से लिखते हुए जस्टिस सैमुअल एलिटो ने कहा, 'आम बोलचाल में कोई भी यह नहीं कहेगा कि कोई व्यक्ति किसी जगह जैसे घर, शहर या देश में 'पहुँच गया है' जब तक कि वह व्यक्ति उस जगह में दाखिल न हो जाए.'
उन्होंने आगे कहा, 'यहाँ जिन इमिग्रेशन कानूनों की बात हो रही है, उनमें 'अमेरिका में पहुंचना' वाक्यांश का इस्तेमाल जिस संदर्भ में किया गया है, वह इसके सामान्य अर्थ वाले मतलब का समर्थन करता है.' न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने तर्क दिया कि दक्षिणी सीमा पर बड़ी संख्या में प्रवासियों को संभालने के लिए यह नीति जरूरी थी और बताया कि जिन्हें शुरू में लौटा दिया गया था, वे बाद में शरण मांगने के लिए वापस आ सकते हैं.
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने कहा, 'यह ट्रंप प्रशासन, कानून के शासन और सामान्य समझ के लिए एक बड़ी जीत है.' उन्होंने आगे कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप हमारे इमिग्रेशन सिस्टम की विश्वसनीयता को कानूनी रूप से बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इसमें हमारे शरण सिस्टम के उस गंभीर दुरुपयोग से निपटना भी शामिल है जिसे पिछले प्रशासन ने बढ़ावा दिया था. हम हमेशा अमेरिकी लोगों को प्राथमिकता देंगे.'
'न्यूयॉर्क पोस्ट' ने यह भी बताया कि डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा नियुक्त तीनों जजों ने फैसले से असहमति जताई. जस्टिस सोनिया सोटोमायोर ने बेंच से अपनी असहमति का कुछ हिस्सा पढ़कर सुनाया और कहा कि यह फैसला 'दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद रूप से स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की मशाल की रोशनी को बुझा देता है.'
अखबार ने बताया कि मीटरिंग पॉलिसी सबसे पहले 2016 में ओबामा प्रशासन के दौरान शुरू की गई थी, ट्रंप के पहले कार्यकाल में इसे पूरे देश में लागू किया गया, 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान इसे रोक दिया गया और 2021 में बाइडेन प्रशासन ने इसे औपचारिक रूप से रद्द कर दिया. उसी साल, कैलिफोर्निया के एक संघीय जज ने इस नीति को गैर-कानूनी करार दिया था. इस फैसले को नाइंथ सर्किट कोर्ट ने सही ठहराया था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे पलट दिया.
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
दिल्ली कोर्ट ने मार्कोस कमांडो को 2.46 करोड़ रुपये का मुआवजा, सड़क हादसे ने छीना उनका सपना

लाइव लॉ में शामिल हों: सुप्रीम कोर्ट रिपोर्टर की नौकरी के लिए आवेदन करें

मसौदा परिपत्र: कर प्रशासन कानून को आधुनिक बनाने का मार्गदर्शक दस्तावेज

विकिरण नियंत्रण से लेकर परमाणु ऊर्जा कानून तक: वियतनाम का शांतिपूर्ण विकास

महिला ने प्रेमी को चुना, पति ने जान दे दी

केरल हाई कोर्ट का फैसला: 'भारत माता' के नाम पर शपथ लेना अवैध

योगेन्द्र यादव क्यों मानते हैं कि एडीआर के फैसले का प्रभाव बिहार के एसआईआर से परे है?

Uttarakhand: देवभूमि परिवार कानून लागू; राज्यपाल की मिली मंजूरी, 15 साल से निवास कर रहे लोगों को मिलेगी आईडी
ताज़ा ख़बरें
- 2.7K views · 12 reactions | #CoverStory | 'होममेकर' नहीं, 'नेशन बिल्डर' कहिए गृहिणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला देश निर्माण में गृहिणी का बड़ा योगदान एक गृहिणी की मासिक आय ₹30,000 तय की शिक्षक ही नहीं, गृहिणी भी 'नेशन बिल्डर' गृहिणी के योगदान का विश्लेषण देखिए सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट Rekha Aggarwal और सोशल एक्टिविस्ट Dr Rakhi Agarwal से ज़ी बिज़नेस एंकर Deepak Dobhal की खास बातचीत #SupremeCourt #Homemaker #NationBuilder #Housewife #WomenEmpowerment #WomenRights | Zee Business
- व्यापार कानून और नीति अनुसंधान संस्थान का शुभारंभ: ज्ञान को जोड़ना, व्यापार समुदाय का साथ देना।
- 2024 के भूमि कानून के अनुसार, ऐसे 5 मामले हैं जिनमें भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र हस्तांतरित नहीं किए जा सकते हैं।
- 17 साल जेल में रहने के बाद मौत
- 2K views · 11 reactions | #CoverStory | 'होममेकर' नहीं, 'नेशन बिल्डर' कहिए गृहिणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला देश निर्माण में गृहिणी का बड़ा योगदान एक गृहिणी की मासिक आय ₹30,000 तय की शिक्षक ही नहीं, गृहिणी भी 'नेशन बिल्डर' गृहिणी के योगदान का विश्लेषण देखिए सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट Rekha Aggarwal और सोशल एक्टिविस्ट Dr Rakhi Agarwal से ज़ी बिज़नेस एंकर Deepak Dobhal की खास बातचीत #SupremeCourt #Homemaker #NationBuilder #Housewife #WomenEmpowerment #WomenRights | Zee Business
- #भारत #सुप्रीमकोर्ट #गृहिणी #cnbctv18digital | सीएनबीसी-टीवी 18
- 2.1K views · 11 reactions | #CoverStory | 'होममेकर' नहीं, 'नेशन बिल्डर' कहिए गृहिणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला देश निर्माण में गृहिणी का बड़ा योगदान एक गृहिणी की मासिक आय ₹30,000 तय की शिक्षक ही नहीं, गृहिणी भी 'नेशन बिल्डर' गृहिणी के योगदान का विश्लेषण देखिए सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट Rekha Aggarwal और सोशल एक्टिविस्ट Dr Rakhi Agarwal से ज़ी बिज़नेस एंकर Deepak Dobhal की खास बातचीत #SupremeCourt #Homemaker #NationBuilder #Housewife #WomenEmpowerment #WomenRights | Zee Business
- विवाह और परिवार कानून के बारे में जानें: बिन्ह मिन्ह वार्ड युवा संघ की प्रतियोगिता

