17 साल जेल में रहने के बाद मौत
विचाराधीन कैदी अब्दुल कादिर की 17 साल जेल में रहने के बाद मौत, न्याय व्यवस्था में देरी पर सवाल

बेंगलुरु में वर्ष 2008 के सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में 62 वर्षीय अब्दुल कादिर की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में मौत हो गई। कादिर पिछले 17 वर्षों से इस मामले में आरोपी के रूप में जेल में बंद थे और अदालत का अंतिम फैसला आने वाला था। Ali Hammad की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कुछ माह पूर्व निचली अदालत को निर्धारित समय सीमा के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया था।
अब्दुल कादिर की मौत ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं— क्या 17 साल तक किसी विचाराधीन कैदी का जेल में रहना न्यायिक प्रक्रिया में देरी का उदाहरण नहीं है? यदि आरोपी अंततः निर्दोष साबित होता, तो उसके जीवन के 17 वर्षों की भरपाई कौन करता? क्या गंभीर रूप से बीमार कैदियों के इलाज और मानवाधिकारों की पर्याप्त सुरक्षा की जा रही है?
सूत्र: Ali Hammad की रिपोर्ट
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