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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में नया सदस्य जस्टिस पी एस नरसिम्हा

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी एस नरसिम्हा ने कॉलेजियम में शामिल होकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना शुरू कर दिया है। यह बदलाव उनके पूर्ववर्ती जस्टिस जे के माहेश्वरी के रिटायर होने के बाद आया है।

28 जून 2026 को 03:24 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में नया सदस्य जस्टिस पी एस नरसिम्हा

सौजन्य से:- Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में बड़ा बदलाव, जस्टिस पी एस नरसिम्हा बने नए सदस्य, जजों की नियुक्ति में निभाएंगे अहम भूमिका

Edited by: दीपांशु|नवभारतटाइम्स.कॉम•

जस्टिस जे के माहेश्वरी के रिटायर होने के बाद जस्टिस पी एस नरसिम्हा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के नए और पांचवें सदस्य बन गए हैं।

कॉलेजियम में शामिल हैं ये जज

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में हुए इस बदलाव के बाद अब कॉलेजियम में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बी वी नागरत्ना, जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस पी एस नरसिम्हा शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे के माहेश्वरी का लगभग पांच साल का कार्यकाल पूरा होने और उनके रिटायर होने के बाद प्रभावी हुआ है।क्या करता है सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम

आपको बता दें कि कॉलेजियम सिस्टम 1993 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद शुरू हुआ था। इस व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के पांच सबसे सीनियर जज, सुप्रीम कोर्ट और 25 हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति, ट्रांसफर और प्रमोशन की सिफारिश करते हैं। इस सिस्टम के तहत सरकार कॉलेजियम की सिफारिश को वापस भेज सकती है। अगर कॉलेजियम अपनी सिफारिश को दोबारा भेजता है तो सरकार आमतौर पर उसे मान लेती है।कौन हैं जस्टिस पी एस नरसिम्हा

3 मई, 1963 को हैदराबाद में जन्मे जस्टिस नरसिम्हा ने हैदराबाद के निज़ाम कॉलेज से इकोनॉमिक्स, पॉलिटिकल साइंस और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में ट्रिपल मेजर के साथ ग्रेजुएशन किया और 1988 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से लॉ की पढ़ाई की। उसी साल वकील के तौर पर एनरोल होने के बाद, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू करने से पहले हैदराबाद में हाई कोर्ट, सिविल कोर्ट और ट्रिब्यूनल में प्रैक्टिस की।2014 में बने थे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल

जस्टिस नरसिम्हा को 2008 में सुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया था। सीनियर एडवोकेट के नाते उन्होंने संवैधानिक, प्रशासनिक और पर्यावरणीय मुद्दों से जुड़े कई पब्लिक लॉ मामलों में पैरवी की। इसके अलवा उन्हें 2014 में भारत का एडिशनल सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था। उस दौरान, उन्होंने कई अहम मामलों में लॉ ऑफिसर के तौर पर कोर्ट की मदद की, जिनमें संविधान पीठ के सामने NJAC का मामला भी शामिल था।कन्वर्सेशन शुरू करें

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