सेवानिवृत्ति के बाद कॉलेजियम में बदलाव, अब कौन संभालेगा सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति?
जस्टिस जे के माहेश्वरी की सेवानिवृत्ति के बाद जस्टिस पी एस नरसिम्हा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पांचवें सदस्य बन गए हैं। उनका कार्यकाल 2 मई 2028 तक है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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जस्टिस माहेश्वरी की विदाई: नरसिम्हा बने कॉलेजियम सदस्य, अब कौन संभालेगा सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति?
Sun, 28 Jun 2026 05:44 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 28 Jun 2026 05:44 PM IST
सार
जस्टिस जे के माहेश्वरी के सेवानिवृत्त होने के बाद जस्टिस पी एस नरसिम्हा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पांचवें सदस्य बन गए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाला यह पांच सदस्यीय कॉलेजियम देश की उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति और तबादलों का फैसला करता है। सीधे बार से जज बने जस्टिस नरसिम्हा दो मई 2028 तक इस पद पर रहेंगे।
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विस्तार
देश की सर्वोच्च अदालत से एक बड़ी खबर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का चेहरा बदल गया है। जस्टिस जे के माहेश्वरी आज रविवार को सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनके स्थान पर अब जस्टिस पी एस नरसिम्हा कॉलेजियम के नए सदस्य बन गए हैं। वे सुप्रीम कोर्ट के पांचवें सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। जस्टिस नरसिम्हा इस बेहद शक्तिशाली कॉलेजियम में दो मई 2028 तक रहेंगे। इसी दिन वह सेवानिवृत्त भी होंगे। दूसरी ओर, करीब पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद जस्टिस माहेश्वरी ने आज अपना पद छोड़ दिया है।
नई टीम में कितने जज?
जस्टिस माहेश्वरी की विदाई के बाद अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का नया स्वरूप सामने आ गया है। इस पांच सदस्यीय कॉलेजियम में अब देश के दिग्गज न्यायाधीश शामिल हैं। इस नई टीम की कमान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के हाथों में है। उनके साथ जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बी वी नागरत्ना, जस्टिस एम एम सुंदरेश और अब जस्टिस पी एस नरसिम्हा इसमें शामिल हो चुके हैं। यही वो पांच सबसे वरिष्ठ जज हैं, जिनके कंधों पर अब भारतीय न्यायपालिका के भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
क्या है कॉलेजियम और कैसे करता है काम?
भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति की यह व्यवस्था बेहद अनूठी है। कॉलेजियम प्रणाली की शुरुआत साल 1993 में सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद हुई थी। इस व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के पांच शीर्ष जज मिलकर काम करते हैं। यही समिति सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति करती है। जजों के तबादले और उनकी पदोन्नति का फैसला भी यही कॉलेजियम लेता है।
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इस व्यवस्था में केंद्र सरकार की भी अपनी भूमिका होती है। सरकार कॉलेजियम की सिफारिशों को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकती है। हालांकि, नियम के मुताबिक यदि कॉलेजियम दोबारा वही नाम भेज दे, तो सरकार को उसे स्वीकार करना होता है। लेकिन कई बार सरकार फाइलों को रोक लेती है या उन पर जवाब नहीं देती है।
यह भी पढ़ें: क्या तेलंगाना में लागू नहीं होगा VB-G RAM G एक्ट?: मंत्री बोले- खजाने पर पड़ेगा बोझ, SC जाएगी रेवंत सरकार
कैसे वकील से सुप्रीम कोर्ट के जज बने पी एस नरसिम्हा?
जस्टिस पी एस नरसिम्हा का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उनका जन्म तीन मई 1963 को हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने हैदराबाद के निजाम कॉलेज से अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन में ट्रिपल मेजर की डिग्री ली। इसके बाद साल 1988 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई पूरी की। इसी साल उन्होंने वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया। उन्होंने शुरुआत में हैदराबाद की निचली अदालतों, ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट में वकालत की। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट आ गए।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कई ऐतिहासिक संवैधानिक पीठों के सामने जजों की मदद की। वह जस्टिस चिन्नप्पा रेड्डी आयोग के वकील भी रहे। साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया। साल 2014 में वह देश के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) बने। इस दौरान उन्होंने एनजेएसी जैसे बड़े मामलों में अदालत की सहायता की। वह कनाडाई सुप्रीम कोर्ट गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी थे। 31 अगस्त 2021 को वह सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए थे।
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नई टीम में कितने जज?
जस्टिस माहेश्वरी की विदाई के बाद अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का नया स्वरूप सामने आ गया है। इस पांच सदस्यीय कॉलेजियम में अब देश के दिग्गज न्यायाधीश शामिल हैं। इस नई टीम की कमान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के हाथों में है। उनके साथ जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बी वी नागरत्ना, जस्टिस एम एम सुंदरेश और अब जस्टिस पी एस नरसिम्हा इसमें शामिल हो चुके हैं। यही वो पांच सबसे वरिष्ठ जज हैं, जिनके कंधों पर अब भारतीय न्यायपालिका के भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
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क्या है कॉलेजियम और कैसे करता है काम?
भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति की यह व्यवस्था बेहद अनूठी है। कॉलेजियम प्रणाली की शुरुआत साल 1993 में सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद हुई थी। इस व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के पांच शीर्ष जज मिलकर काम करते हैं। यही समिति सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति करती है। जजों के तबादले और उनकी पदोन्नति का फैसला भी यही कॉलेजियम लेता है।
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इस व्यवस्था में केंद्र सरकार की भी अपनी भूमिका होती है। सरकार कॉलेजियम की सिफारिशों को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकती है। हालांकि, नियम के मुताबिक यदि कॉलेजियम दोबारा वही नाम भेज दे, तो सरकार को उसे स्वीकार करना होता है। लेकिन कई बार सरकार फाइलों को रोक लेती है या उन पर जवाब नहीं देती है।
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कैसे वकील से सुप्रीम कोर्ट के जज बने पी एस नरसिम्हा?
जस्टिस पी एस नरसिम्हा का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उनका जन्म तीन मई 1963 को हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने हैदराबाद के निजाम कॉलेज से अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन में ट्रिपल मेजर की डिग्री ली। इसके बाद साल 1988 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई पूरी की। इसी साल उन्होंने वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया। उन्होंने शुरुआत में हैदराबाद की निचली अदालतों, ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट में वकालत की। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट आ गए।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कई ऐतिहासिक संवैधानिक पीठों के सामने जजों की मदद की। वह जस्टिस चिन्नप्पा रेड्डी आयोग के वकील भी रहे। साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया। साल 2014 में वह देश के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) बने। इस दौरान उन्होंने एनजेएसी जैसे बड़े मामलों में अदालत की सहायता की। वह कनाडाई सुप्रीम कोर्ट गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी थे। 31 अगस्त 2021 को वह सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए थे।
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