सुप्रीम कोर्ट ने कहा: इस्तीफ़ा करके पद हटाने से बचते हुए सरकारी लाभ नहीं मिलेगा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को उस याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया, जिसमें संवैधानिक पदाधिकारियों के हटने से बचने के लिए बीच में इस्तीफ़ा देने पर मिलने वाले भत्ते‑सुविधाओं को असंवैधानिक कहा गया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कोई भी व्यवस्था अनुच्छेद 14 के विरुद्ध है और पदाधिकारी को या तो अपना कार्यकाल पूरा करना चाहिए या पारदर्शी हटाने की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

सौजन्य से:- ETV Bharat
इस्तीफा देकर कार्रवाई से बचेंगे तो नहीं मिलेगा सरकारी लाभ: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए कुर्सी छोड़ने वाले संवैधानिक पदाधिकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है.
By Sumit Saxena
Published : September 3, 2026 at 5:20 PM IST
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें यह घोषित करने की मांग की गई है कि कोई भी संवैधानिक अधिकारी, जो पद से हटाए जाने से बचने के लिए इस्तीफा देता है, उसे कोई भत्ते, सुविधाएं और हक नहीं मिलेंगे.
यह मामला सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के सामने आया. पीठ ने प्रातिक वीरा की याचिका पर सरकार से जवाब मांगा, जिसमें संवैधानिक अधिकारियों के हटाए जाने से बचने के लिए इस्तीफा देने के ट्रेंड की ओर इशारा किया गया है.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि कोई भी नियम जो किसी संवैधानिक अधिकारी को सिर्फ हटाए जाने से बचने के लिए बीच में इस्तीफा देने के बाद भी भत्ते, सुविधाएं और सुविधाएं देने का अधिकार देता है, वह असंवैधानिक है और संविधान के आर्टिकल 14 के खिलाफ है.
याचिका में कहा गया, “उच्च संवैधानिक कार्यालय ऐसे संवैधानिक अधिकारियों पर एक बिना लिखी संवैधानिक जिम्मेदारी डालता है कि वे या तो अपना कार्यकाल पूरा करें या हटाने की एक पारदर्शी प्रक्रिया का सामना करें, हटाने से बचने के लिए इस्तीफा देने का आसान विकल्प न तो सोचा गया है और न ही सही है, और इस तरह के इस्तीफे उस भरोसे को खत्म करते हैं जो संविधान उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों पर रखता है.”
याचिका में कहा गया कि ये इस्तीफे, एक पारदर्शी हटाने की प्रक्रिया से बचने के लिए होते हैं, क्योंकि संवैधानिक अधिकारियों को पूरी तरह पता होता है कि इस्तीफा देने के बाद उन्हें वे सभी सुविधाएं और फायदे मिलेंगे जो उन्हें अपना कार्यकाल पूरा करने पर मिलते.
याचिका में कहा गया कि ये नियम, जो संवैधानिक अधिकारियों को कार्यकाल के बीच में इस्तीफा देने पर भी भत्ते और फायदे मिलते रहने का अधिकार देते हैं, ऐसे गैर-संवैधानिक और बिना किसी सिद्धांत के कार्यकाल के बीच में इस्तीफों की असली वजह हैं.
याचिका में कहा गया है, “क्योंकि कानून में यह तय है कि भारत के माननीय राष्ट्रपति को छोड़कर, जिन पर “महाभियोग” लगाया जा सकता है, दूसरे संवैधानिक पदाधिकारियों को संविधान के तहत तय प्रक्रिया के तहत “हटाया” जाता है, संवैधानिक पद पर बैठे जजों के मामले में जज जांच अधिनियम के तहत कार्यवाही पर विचार किया जाता है और दूसरे संवैधानिक पदाधिकारियों को हटाने के लिए दूसरे प्रक्रियागत जरूरतों पर विचार किया जाता है.”
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