सुप्रीम कोर्ट का नया संकेत: न्यायिक भर्ती में व्यापक सुधार की दिशा में विचार
गुजरात हाई कोर्ट में 113 जिला जज पदों की सीधी भर्ती में केवल दो उम्मीदवार वाइवा‑वॉइस तक पहुँच पाए, जिससे सभी पद खाली रह गए और प्रक्रिया को चुनौती मिली। याचिकाकर्ताओं ने इंटरव्यू की अल्पावधि और अंकों पर उसके प्रभाव को प्रश्नांकित किया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को केवल दो उम्मीदवारों तक सीमित न रख कर पूरी भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए पहल करने की रुचि व्यक्त की।

सौजन्य से:- Navbharat Times
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गुजरात हाई कोर्ट न्यायिक भर्ती में विवाद क्यों ?
- गुजरात हाई कोर्ट ने 25 जुलाई 2025 को जिला जज के 113 पदों पर 25% सीधी भर्ती कोटे के तहत विज्ञापन जारी किया था।
- चयन प्रक्रिया में प्रारंभिक परीक्षा, गुजराती भाषा परीक्षा, मुख्य लिखित परीक्षा और वाइवा-वॉइस शामिल थे। प्रारंभिक परीक्षा में 729 उम्मीदवार शामिल हुए, जिनमें से 31 मुख्य परीक्षा तक पहुंचे।
- अंत में सीधी भर्ती कोटे में केवल दो उम्मीदवार वाइवा-वॉइस के लिए योग्य हुए। 30 अप्रैल 2026 को वाइवा-वॉइस हुआ और गुजरात हाईकोर्ट ने 9 जुलाई 2026 को अंतिम परिणाम जारी किया।
- परिणाम में किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति के लिए अनुशंसित नहीं किया गया, इसलिए सभी 113 पद खाली रह गए। जिसके बाद विवाद अदालत पहुंचा।
याचिकाकर्ताओं ने इंटरव्यू प्रक्रिया पर क्या कहा?
- लाईव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया में वाइवा वॉइस की भूमिका और उसकी अवधि पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनका इंटरव्यू करीब पांच मिनट चला और इससे मूल्यांकन की निष्पक्षता तथा विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
- उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इंटरव्यू के अंकों का असर लिखित परीक्षा में मिले अंकों पर बहुत अधिक हो गया। ये सभी याचिकाकर्ताओं के दावे हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी अंतिम फैसला नहीं दिया है।
- याचिका के अनुसार, पिछले सात वर्षों में 25% सीधी भर्ती कोटे के तहत पांच भर्ती प्रक्रियाओं में कुल 264 पद अधिसूचित किए गए। इनमें 2019 में 26, 2020 में 34, 2022 में 34, 2023 में 57 और 2024-25 में 113 पद शामिल थे।
- याचिका में कहा गया है कि इस अवधि में केवल एक नियुक्ति हुई। इन आंकड़ों के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने भर्ती व्यवस्था की प्रभावशीलता और इंटरव्यू प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भर्ती रिकॉर्ड और उम्मीदवारों को दिए गए अंकों से संबंधित जानकारी कोर्ट के सामने रखी। उन्होंने यह भी कहा कि भर्ती नियमों के तहत उम्मीदवार के चरित्र से संबंधित रिपोर्ट संबंधित हाई कोर्ट से ली जानी होती है और कोर्ट को देखना चाहिए कि ऐसी रिपोर्ट ली गई या नहीं। फिलहाल कोर्ट ने सीलबंद रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया है और साथ ही एक बड़ी बात भी मौखिक रुप से कही, जिसका उल्लेख जरूरी है। बेंच ने कहा कि उसकी रुचि केवल इस मामले तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया में सुधार की पहल करने में है।न्यायिक भर्ती सुधार पर बड़ा संकेत ?
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि कोर्ट की अधिक रुचि पूरी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए पहल तैयार करने में है। इसका अर्थ यह है कि कोर्ट इस मामले को केवल दो उम्मीदवारों की शिकायत तक सीमित रखने के बजाय न्यायिक भर्ती परीक्षा की व्यापक प्रक्रिया पर भी विचार कर सकता है। हालांकि, अभी सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के 9 जुलाई 2026 के परिणाम को रद्द नहीं किया है। कोर्ट ने यह भी अंतिम रूप से तय नहीं किया है कि वाइवा-वॉइस या भर्ती प्रक्रिया में कोई कानूनी अनियमितता हुई थी।मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के कानूनी फैसले पर उठे सवाल, जस्टिस शर्मा के बेटे के EC कनेक्शन की चर्चा
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