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बढ़ते मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते मुकदमों के बोझ पर गंभीर चिंता जतायी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वे लंबित मामलों को कम करने के लिए क्षेत्रीय और सर्किट बेंच स्थापित करने पर विचार करें।

13 अगस्त 2026 को 10:57 am बजे
बढ़ते मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगी कार्रवाई

सौजन्य से:- ETV Bharat

'रिटायर्ड जजों का पुनर्वास केंद्र न बनें उपभोक्ता अदालतें': बढ़ते मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) में 2018 के केस अब तक पेंडिंग होने पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है. पूरी खबर पढ़ें.

By Sumit Saxena

Published : August 13, 2026 at 4:04 PM IST

नयी दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में बढ़ते मुकदमों के बोझ पर गंभीर चिंता जतायी. कोर्ट ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वे लंबित मामलों को कम करने के लिए क्षेत्रीय और सर्किट बेंच स्थापित करने पर विचार करें.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और जिला उपभोक्ता मंचों के प्रदर्शन का ऑडिट कराने की भी मांग की. चेतावनी दी कि इन संस्थाओं को "सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) न्यायिक अधिकारियों के लिए पुनर्वास केंद्र नहीं बनना चाहिए." अदालत को सूचित किया गया कि NCDRC में मामलों का लंबित होना बहुत बड़ा संकट है, क्योंकि वर्तमान में सुनवाई के लिए जो मामले सामने आ रहे हैं, वे साल 2018-19 के हैं.

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ द्वारा की गई. इस मामले में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा.

सुनवाई के दौरान, पीठ ने NCDRC के अध्यक्ष से कुल लंबित मामलों, दर्ज की गई कुल शिकायतों और मामलों के निपटारे की औसत दर पर एक स्टेटस रिपोर्ट सौंपने को कहा. पीठ ने एक लंबित मामले के निपटारे में लगने वाले अनुमानित समय और आयोग के सदस्यों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता के बारे में भी जानकारी मांगी. पीठ ने कहा कि यह रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर दाखिल की जानी चाहिए.

पीठ ने इस मामले में न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) से राज्य उपभोक्ता आयोगों में लंबित मामलों, खाली पदों और आयोग में लंबित सबसे पुराने मामले के बारे में भी डेटा देने को कहा. पीठ ने कहा कि एक उपभोक्ता को पूरे रास्ते का सफर तय करके दिल्ली आने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसके बजाय फोरम को खुद उनके पास जाना चाहिए. इसके साथ ही पीठ ने राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम की क्षेत्रीय और सर्किट बेंच स्थापित करने का सुझाव दिया.

कुछ वकीलों ने पीठ को सूचित किया कि यदि कोई मामला इस साल जून में सुनवाई के लिए लिस्ट होता है, तो अगली तारीख लगभग अगले साल की मिलती है. पीठ ने ऐश्वर्या भाटी से कहा कि यदि NCDRC में लंबित मामलों का ढेर लग रहा है, तो अब एकमात्र विकल्प यही बचा है कि आयोग के सदस्यों की अधिकतम संख्या को बढ़ाया जाए.

पीठ ने कहा कि NCDRC के जो आदेश अपील के लिए सुप्रीम कोर्ट के सामने आते हैं, वे बहुत अच्छे होते हैं. उन्होंने आगे जोड़ा कि इससे यह साफ पता चलता है कि असली समस्या सिर्फ खाली पदों को भरने की है. पीठ ने राज्य उपभोक्ता आयोगों से पिछले तीन वर्षों के जिला उपभोक्ता फोरम की मूल्यांकन रिपोर्ट सौंपने को कहा और मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद तय की.

पिछले महीने, सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि जिन राज्यों में उपभोक्ता विवाद के 1,000 से कम मामले लंबित हैं, वे कुछ जिला उपभोक्ता मंचों को समाप्त कर सकते हैं और संबंधित उच्च न्यायालयों की मंजूरी से उन मामलों को नियमित अदालतों में ट्रांसफर कर सकते हैं.

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