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महाराष्ट्र ने कर्नाटक सीमा विवाद में तेज़ सुनवाई की माँग की, सुप्रीम कोर्ट से दबाव

महाराष्ट्र सरकार ने 2004 के अपने मूल दावे को लेकर कर्नाटक के अधीन 865 मराठी‑भाषी गाँव‑कस्बों के मुद्दे में शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया है। राज्य ने 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम को चुनौती देते हुए कहा कि भाषाई आधार पर सीमाओं का निर्धारण अब मान्य नहीं है, जबकि मुख्य न्यायाधीश ने मामले की जाँच का आश्वासन दिया पर सूची‑बद्ध करने का भरोसा नहीं दिया।

1 सितंबर 2026 को 08:32 am बजे
महाराष्ट्र ने कर्नाटक सीमा विवाद में तेज़ सुनवाई की माँग की, सुप्रीम कोर्ट से दबाव

सौजन्य से:- ETV Bharat

महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कर्नाटक के साथ सीमा विवाद मामले में जल्द सुनवाई का अनुरोध किया

महाराष्ट्र ने सुप्रीम कोर्ट में मूल वाद दायर कर मराठी क्षेत्रों पर कर्नाटक के नियंत्रण और 1956 के कानून के प्रावधानों को चुनौती दी है.

By Sumit Saxena

Published : September 1, 2026 at 1:24 PM IST

नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपने 2004 के उस मुकदमे पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया है, जो कर्नाटक के साथ 865 मराठी भाषी गांवों और कस्बों के लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद से संबंधित है. वर्तमान में इन क्षेत्रों का प्रशासन पड़ोसी राज्य कर्नाटक द्वारा किया जा रहा है. इन मराठी भाषी गांवों और कस्बों में बेलगावी (बेलगाम), कारवार और निपानी शामिल हैं, जो वर्तमान कर्नाटक के प्रशासन के अधीन हैं.

महाराष्ट्र के वकील ने मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि मामले में दलीलें पूरी हो चुकी हैं. वकील ने पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल हैं, से मामले को तत्काल सुनवाई के लिए लिस्ट करने का अनुरोध किया.

वकील ने कहा कि कर्नाटक में मराठी बोलने वाले 865 गांव हैं. वकील ने जोर देकर कहा कि यह उस सिद्धांत के खिलाफ है जिसके तहत भाषाओं के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया था.

CJI ने कहा कि वह मामले की जांच करेंगे. उन्होंने कहा, "मैं लिस्टिंग का भरोसा नहीं दे सकता."

महाराष्ट्र ने सुप्रीम कोर्ट में एक मूल वाद (original suit) दायर कर कर्नाटक के नियंत्रण और 1956 के कानून के प्रावधानों को चुनौती दी है.

1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत राज्यों की सीमाओं का निर्धारण भाषा के आधार पर किया गया था. कन्नड़ भाषी लोगों की बहुलता के कारण बेलगावी को तत्कालीन मैसूर राज्य (अब कर्नाटक) में शामिल कर लिया गया, जबकि इसके आसपास के मराठी भाषी क्षेत्र महाराष्ट्र में ही रहे.

यह भी पढ़ें- SC कॉलेजियम का बड़ा फैसला, जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान HC का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश

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