सुप्रीम कोर्ट ने चुने हुए नेताओं को कानून का सम्मान करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की मुख्य जिम्मेदारी कानून का पालन करना है और जनता का भरोसा कायम रखना चाहिए। कोर्ट ने ठाणे में डॉक्टरों पर हुए हमले में संलिप्त शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और तीन अन्य की जमानत रद्द की, क्योंकि ऐसी हिंसा सामाजिक शांति को बिगाड़ती है।

सौजन्य से:- Hindustan
नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे कानून का सम्मान करें : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने चुने हुए प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि वे कानून का सम्मान करें। कोर्ट ने ठाणे में डॉक्टरों पर हुए हमले के मामले में जमानत रद्द की और कहा कि ऐसी घटनाएं समाज की शांति पर बुरा प्रभाव डालती हैं। यह मामला चुनावी प्रतिनिधियों की बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियों को उजागर करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधि की यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वह कानून के अधिकार का सम्मान करे और ऐसा व्यवहार करे जिससे संस्थाओं में जनता का भरोसा बढ़े। शीर्ष अदालत ने चुने हुए पदों पर बैठे लोगों द्वारा देश में डॉक्टरों और अन्य अधिकारियों पर बढ़ते हमलों पर भी नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने 28 सितंबर को एक विस्तृत आदेश में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और तीन अन्य की जमानत रद्द करने का फैसला सुनाया। इन पर ठाणे जिले के एक नगर निगम अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट और बदसलूकी करने का आरोप है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज की शांति और व्यवस्था पर बुरा असर डालती हैं और सार्वजनिक व्यवस्था को भी बिगाड़ती हैं। कोर्ट ने कहा कि हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि इस घटना को उस बड़ी चिंता से अलग करके नहीं देखा जा सकता जो तब पैदा होती है जब चुने हुए पदों पर बैठे लोग नागरिकों या सरकारी अधिकारियों के साथ निपटने के लिए बल प्रयोग, डराने-धमकाने या कानून से हटकर अन्य तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे व्यवहार की घटनाएं सामने आई हैं। कोर्ट ने यह भी बताया कि म्हात्रे मामले के बाद महाराष्ट्र के पालघर में शिवसेना नेताओं से जुड़ी एक और घटना सामने आई थी।
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