स्थायी लोक अदालत ने 13 साल बाद विधवा को 5 लाख की बीमा राहत दी
अयोध्या की स्थायी लोक अदालत ने 13 साल से लंबित किसान दुर्घटना बीमा मामले में विधवा मंजूलता को 5 लाख रुपये 90 दिनों में देने का आदेश किया। भुगतान न होने पर 26 अगस्त 2019 से प्रति सप्ताह 1 हज़ार रुपये दण्ड और 10 हज़ार रुपये की अदालत लागत भी निर्धारित की गई। अदालत ने पाया कि बीमा समिति ने दस्तावेजों को ठीक से नहीं देखा था, इसलिए मृतक किसान की दुर्घटना के आधार पर विधवा को हकदार माना गया।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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13 साल बाद विधवा को मिला बीमा का हक:स्थायी लोक अदालत ने 90 दिन में 5 लाख रुपए देने का आदेश दिया
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अयोध्या की स्थायी लोक अदालत ने 13 साल से लंबित किसान दुर्घटना बीमा मामले में विधवा मंजूलता को राहत दी है। अदालत ने उन्हें 90 दिनों के भीतर 5 लाख रुपये बीमा राशि देने का आदेश दिया है, साथ ही 26 अगस्त 2019 से भुगतान तक प्रति सप्ताह 1 हजार रुपये अर्थदंड और 10 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी देने को कहा है। पीड़िता मंजूलता ने मंगलवार को बताया कि न्यायालय ने हमारे मामले का संज्ञान लिया भले ही 13 साल बाद फैसला आया लेकिन जो आया उसे मैं संतुष्ट हूं।
यह मामला मिल्कीपुर तहसील के गौहन्ना गांव की मंजूलता का है। उनके पति नंदकुमार की 2013 में लुधियाना में रेल दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनका बीमा यूपी राजस्व परिषद की सामूहिक दुर्घटना बीमा पॉलिसी के तहत हुआ था।
मंजूलता ने बीमा दावा पेश किया, पर जिलाधिकारी कार्यालय ने 2013 में प्राथमिकी और मौत का साफ कारण न होने की बात कहकर फाइल वापस कर दी। उप जिलाधिकारी ने घटना को दुर्घटना बताया, फिर भी दावा रद्द रहा।
कई प्रयासों के बाद 2019 में मंजूलता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने पाया कि समिति ने कागजातों पर विचार नहीं किया था। मृतक किसान की दुर्घटना में मौत हुई थी, इसलिए मंजूलता बीमा हकदार हैं।
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