केदारनाथ मंदिर में पंच पंडा रुद्रपुर के पुरोहितों के अधिकार बरकरार, अदालत ने मांगी अगली सुनवाई की तारीख
जिला न्यायाधीश ने सिविल जज के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया। पंच पंडा रुद्रपुर पुरोहितों को गर्भगृह में पूजा के अधिकार प्राप्त रहे। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की स्थगन याचिका खारिज हुई।

सौजन्य से:- Jagran
केदारनाथ मंदिर में पंच पंडा रुद्रपुर के पुरोहितों के अधिकार बरकरार, अदालत ने नहीं लगाई रोक
रुद्रप्रयाग जिला न्यायाधीश ने केदारनाथ मंदिर में पंच पंडा रुद्रपुर समिति के तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों पर सिविल जज के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर द ...और पढ़ें
HighLights
- जिला न्यायाधीश ने सिविल जज के आदेश पर रोक से इनकार किया
- पंच पंडा रुद्रपुर पुरोहितों के गर्भगृह में पूजा के अधिकार बरकरार
- बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की स्थगन याचिका खारिज हुई
संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से केदारनाथ मंदिर में पंच पंडा रुद्रपुर समिति तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों से जुड़े सिविल जज के आदेश पर रोक लगाने से जिला न्यायाधीश ने इन्कार कर दिया।
मंदिर समिति की ओर से दायर स्थगन याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सिविल जज के 25 मई के इस संबंध में पारित आदेश को फिलहाल यथावत रहा है।
सिविल जज ने पंचपंडा रुद्रपुर समिति के तीर्थ पुरोहितों को अपने यजमानों के साथ केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर अभिषेक, संकल्प, रुद्रीपाठ, परिक्रमा कराने तथा यजमानों से प्राप्त होने वाली दक्षिणा एवं उपहार ग्रहण करने के प्रथागत अधिकारों में हस्तक्षेप न करने के आदेश दिए थे।
मंदिर समिति की ओर से दायर याचिका में अधिवक्ता गजपाल सिंह रावत ने दलील दी कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम, 1939 के तहत गर्भगृह में प्राप्त होने वाला चढ़ावा मंदिर समिति की संपत्ति है तथा पूजा-अर्चना अधिकृत पुजारियों एवं वेदपाठियों द्वारा ही संपन्न कराई जाती है।
समिति ने आशंका जताई कि निचली अदालत के आदेश से मंदिर व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और अपील लंबित रहने तक आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए। वहीं, प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता सुशील चंद्र भट्ट ने निचली अदालत के आदेश को विधिसम्मत बताते हुए स्थगन याचिका का विरोध किया।
जिला न्यायाधीश नीना अग्रवाल ने आदेश में कहा कि निचली अदालत ने दोनों पक्षों के मौखिक साक्ष्यों और सर्वोच्च न्यायालय व उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व निर्णयों का विस्तृत विश्लेषण करने के बाद फैसला दिया है।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि बीकेटीसी के गवाह दीपक पंवार ने अपने बयान में स्वीकार किया कि तीर्थ पुरोहित अपने यजमानों के लिए रुद्रीपाठ कराते हैं तथा श्रद्धालु उन्हें स्वेच्छा से दक्षिणा दे सकते हैं, जिसे प्राप्त करने का उन्हें अधिकार है।
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अदालत ने माना कि इस स्तर पर निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने का कोई न्यायसंगत आधार नहीं बनता। इसके साथ ही बीकेटीसी की स्थगन याचिका पर अंतिम बहस के लिए अगली सुनवाई 21 जुलाई निर्धारित की है।
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