सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: वकीलों को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार बैंकों को नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बैंक और भारतीय बैंक संघ वकीलों को पेशेवर लापरवाही के आरोप पर ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकते, यह बार काउंसिल्स के अधिकारों का हस्तक्षेप है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कानूनी अकादमी के गठन का निर्देश भी दिया।

सौजन्य से:- Jagran
'वकीलों को ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकते बैंक', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि बैंक और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) वकीलों को केवल पेशेवर लापरवाही के आरोप पर ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकते। ...और पढ़ें
HighLights
- बैंक वकीलों को पेशेवर लापरवाही पर ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकते।
- यह बार काउंसिल्स के वैधानिक अनुशासनात्मक अधिकारों का अतिक्रमण है।
- सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कानूनी अकादमी के गठन का निर्देश दिया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मंगलवार को कहा कि बैंक और भारतीय बैंक संघ (आइबीए) वकीलों को केवल पेशेवर लापरवाही के आरोपों के आधार पर सावधानी सूची में नहीं डाल सकते।
कानूनी पेशे की स्वतंत्रता को मजबूत करते हुए जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि वकीलों को ब्लैकलिस्ट करना बार काउंसिल्स के वैधानिक अनुशासनात्मक अधिकारों का अतिक्रमण है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश
हम बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश देते हैं कि वे वरिष्ठ और जूनियर वकीलों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना के क्षेत्र में विशेषज्ञों की एक टीम का गठन करें ताकि राष्ट्रीय कानूनी अकादमी (वकीलों के लिए) की स्थापना पर विचार, चर्चा और विकास किया जा सके।
जस्टिस नरसिम्हा ने 41 पृष्ठों के निर्णय में कहा, हमें उम्मीद है और विश्वास है कि बीसीआइ इस अवसर पर उठेगा और इन सभी मुद्दों पर विचार करेगा और अदालत को अपने निर्णय की जानकारी देगा।
इस फैसले ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा के दायरे को स्पष्ट किया और कहा कि आइबीए के खिलाफ रिट याचिकाएं स्वीकार्य हैं, क्योंकि अब यह अनुच्छेद केवल वैधानिक प्राधिकरणों या राज्य के उपकरणों तक सीमित नहीं है जो अनुच्छेद 12 के अंतर्गत आते हैं और कोई व्यक्ति या प्राधिकरण की अभिव्यक्ति को लगातार व्यापक और अधिक उदार व्याख्या प्राप्त हुई है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
यह भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट विवाद का असर: भ्रष्टाचार से जनहित याचिकाओं तक... NCERT ने न्यायपालिका के पाठ को नए सिरे से लिखा
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