अभिषेक बनर्जी के ऑफिस में तोड़फोड़ पर कोर्ट ने लगाई रोक, सरकार के तर्कों को किया खारिज
कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय के विध्वंस पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि भवन के मालिकों को विध्वंस का आदेश देने से पहले जवाब देने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था। सरकार के तर्कों को खारिज करते हुए कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

सौजन्य से:- Jansatta
कलकत्ता हाईकोर्ट ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के अमताला में स्थित कार्यालय के विध्वंस को तुरंत रोकने का आदेश जारी किया। प्रशासन ने ममता बनर्जी के भतीजे के कार्यालय को अवैध बताते हुए तोड़फोड़ शुरू की थी। अभिषेक का यह कार्यालय पांच मंजिल दक्षिण 24 परगना के अमताला-बारुईपुर पर स्थित है।
बार एंड बेंच के मुताबिक, जस्टिस राजा बसु चौधरी ने आगे कहा कि यह आदेश अगली सुनवाई तक या जुलाई 2026 के अंत तक जो भी पहले हो, लागू रहेगा। यह अंतरिम आदेश तब पारित किया गया जब कोर्ट इस प्रथम निष्कर्ष पर पहुंचा कि भवन के मालिकों को विध्वंस का आदेश देने से पहले जवाब देने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया।
यथास्थिति बनाए रखें- कोर्ट
कोर्ट ने कहा, “मेरा मानना है कि मामले की अगली सुनवाई होने तक या जुलाई 2026 के अंत तक जो भी पहले संपत्ति की प्रकृति, स्वरूप और कब्जे के संबंध में यथास्थिति बनाए रखनी चाहिए। मेरा मानना है कि प्रतिवादियों को दक्षिण 24 परगना के डीएम/कार्यकारी अधिकारी की ओर 15 जुलाई को पारित आदेश के मुताबिक आगे की सभी विध्वंस कार्रवाइयों को रोक देना चाहिए।”
कोर्ट ने यह आदेश लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर रिट याचिका पर पारित किया, यह अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कंपनी है और डायमंड हार्बर 24 दक्षिण परगना में टीएमसी सांसद कार्यालय वाली इमारत की मालिक है। उन्होंने दलील दी कि अगर अधिकारियों ने दावा किया कि इमारत के पास अनुमति की कमी थी, लेकिन उन्होंने इसे ध्वस्त करने से पहले अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
सरकार ने किया विरोध
सरकार के एडवोकेट जनरल सुरोजित नाथ मित्रा ने याचिका का विरोध किया और कहा कि याचिका साफ नीयत से दायर नहीं की गई और यह साबित करने में विफल रही कि निर्माण सही थी। उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ 30 जून के नोटिस के बाद हुआ, जो याचिकाकर्ता को विधिवत रूप से तामील कराया गया था।
आगे कहा कि रिट याचिका को बेहद कम समय में सूचीबद्ध किया गया, जिससे सरकार को कोर्ट के समक्ष सभी दस्तावेज पेश करने के लिए कम समय मिला। एजी सुरोजित नाथ ने कोर्ट से सोमवार को नियमित पीठ द्वारा किया जाए।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या छुट्टी के दिन कोर्ट के अपने अधिकार इस्तेमाल करने की जरूरत है।
कोर्ट ने पूछा सवाल
इस पर जस्टिस ने पूछा, “तो फिर आपने शनिवार को ही तोड़फोड़ क्यों की?” इस पर अर्टानी जनरल ने जवाब दिया,”वह एक कार्य दिवस है और नोटिस 30 जून को जारी किया गया था।”
यह भी पढ़ें: ‘यह वर्दी में चोरी है…’, दफ्तर तोड़े जाने को लेकर पश्चिम बंगाल पुलिस पर भड़के अभिषेक बनर्जी
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में पूरी तरह अराजकता हावी है। बनर्जी ने रविवार को यह आरोप दक्षिण 24 परगना जिले के अमतला में भवन निर्माण नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर उनके कार्यालय के एक हिस्से को गिराए जाने के मामले में दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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