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पाकिस्तान में ईसाई दंपति की हत्या के आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट में सजा पुनर्विचार

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने एक ईसाई दंपति की हत्या के दोषी करार दिए गए तीन लोगों की सजा रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया है। दंपति को 12 साल पहले जिंदा जलाया गया था। इस फैसले से मामले में अब कोई भी आरोपी या दोषी करार नहीं बचा है।

19 जुलाई 2026 को 05:12 pm बजे
पाकिस्तान में ईसाई दंपति की हत्या के आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट में सजा पुनर्विचार

सौजन्य से:- Hindustan

पाकिस्तान में ईसाई दंपति की निर्मत हत्या में तीन दोषी सुप्रीम कोर्ट से बरी

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने एक ईसाई दंपति की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए तीन लोगों की सजा रद्द कर दी। यह दंपति 12 साल पहले एक भीड़ द्वारा जिंदा जलाए गए थे। मामले में 102 अन्य आरोपियों को भी बरी कर दिया गया। ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में न्याय की कमी पर चिंता जताई गई है।

इस्लामाबाद, एजेंसी। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने एक ईसाई दंपति की हत्या में निचली अदालत से दोषी करार दिए गए तीन लोगों की सजा रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया। दंपति को सैकड़ों लोगों की भीड़ ने 12 साल पहले ईंट के भट्ठे में जिंदा फेंककर मार डाला था। हत्या के वक्त महिला गर्भवती थी। जानकारी के अनुसार, शहजाद मसीह (26) और उसकी गर्भवती पत्नी शमा बीबी (24) पंजाब के कसूर स्थित एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते थे। लेनदेन को लेकर हुए विवाद के बाद भट्ठा मालिक ने उन्हें बंधक बना लिया था। दावा था कि दोनों पर कुरान की बेअदबी का झूठा आरोप लगाया गया, जिसके बाद एक मस्जिद से उनके खिलाफ तकरीर की गई।

इससे भड़के सैकड़ों लोग भट्ठे पर जमा हो गए और दंपति को बुरी तरह पीटने के बाद भट्ठे की आग में फेंक दिया। मामले में 2014 में ही आतंकवाद निरोधी अदालत ने पांच लोगों को मौत की सजा सुनाई थी, जबकि आठ को दो-दो वर्ष के कारावास की सजा दी गई थी। बाद में तीन ही दोषियों पर मौत की सजा बरकरार रखी गई, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी।वहीं, अलग-अलग वर्षों में सबूतों के अभाव में अदालतों ने 102 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था। पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आरोपियों को बरी करने को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्य पेश करने में खामियों की बात कहते हुए तीनों दोषियों की सजा रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया, जबकि पंजाब सरकार की याचिका को भी खारिज कर दिया। इसके बाद इस बर्बर हिंसा में अब कोई भी आरोपी या दोषी करार नहीं बचा है। पाकिस्तान में कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष बिशप सैमसन शुकार्डिन ने कहा कि दंपति की हत्या में दोषियों का बरी होने से एक बार फिर यह बात साबित हुई है कि पाकिस्तान में ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों को लक्षित हिंसा के बाद भी इंसाफ नहीं मिलता है।

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