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पीसीए के फैसले से पुष्टि: भारत एकतरफा सिंधु जल संधि को स्थगित नहीं कर सकता

परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने 31 अगस्त को पाकिस्तान के पक्ष में फैसला सुनाया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि इंडस जल समझौता अभी भी लागू है और भारत इसे एकतरफा निलंबित नहीं कर सकता। भारत ने इस फैसले को अस्वीकार कर कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा‑पार आतंक को रोक नहीं लेता, जल संधि को बहाल नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान के विशेषज्ञों ने कहा कि संधि की शर्तें और विवाद‑निवारण तंत्र के तहत ही किसी भी असहमति को सुलझाना चाहिए।

4 अक्टूबर 2026 को 05:04 am बजे
पीसीए के फैसले से पुष्टि: भारत एकतरफा सिंधु जल संधि को स्थगित नहीं कर सकता

सौजन्य से:- Navbharat Times

Indus Water Treaty Dispute: पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत के फैसले से साफ हो गया है कि सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने का एकतरफा फैसला भारत नहीं कर सकता है। जबकि भारत ने दो टूक कहा है कि 'खून और पानी साथ नहीं बह सकते हैं।' पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स 'युद्ध' का खतरा जता रहे हैं।

इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) पर परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) ने 31 अगस्त को पाकिस्तान के पक्ष में फैसला सुनाया। इसने भारत से संधि को बहाल करने की मांग की जिसे दिल्ली ने फौरन खारिज कर दिया। लेकिन पाकिस्तानी कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर लगातार हल्ला मचा रहे हैं। उनका कहना है कि सिंधु जल संधि (IWT) की स्थिति पर कोर्ट के फैसले से एक बार फिर पाकिस्तान के उस सैद्धांतिक रुख को सही ठहराया गया है कि कि भारत किसी भी हालत में एकतरफा तौर पर IWT को स्थगित या 'एबेयंस' (कुछ समय के लिए रोक) में नहीं डाल सकता।

लेकिन भारत ने ना सिर्फ कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया बल्कि कोर्ट की वैधता पर ही सवाल उठाए। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंक पर लगाम नहीं लगाता है तब तक सिंधु जल संधि को फिर से बहाल नहीं किया जाएगा। भारत ने अपनी स्थिति पूरी दुनिया के सामने साफ कर दी है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।'

सिंधु जल समझौते पर भारत के एक्शन से क्यों बौखलाया पाकिस्तान?

पाकिस्तान स्थित सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक स्टडीज सिंध में रिसर्च ऑफिसर तारिक अहमद अब्रो ने लिखा है कि इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले में यह निष्कर्ष निकाला गया कि भारत का 2025 का फैसला संधि या लागू अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जायज नहीं था और IWT अभी भी लागू है। इससे भारत के एकतरफा फैसले लेने की सीमाओं का पता चलता है और यह बात फिर से साबित होती है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दिए गए तरीकों के बिना संधि की जिम्मेदारियों को एकतरफा तौर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने आगे लिखा है कि इसी तरह अधिकतम पोंडेज यानि पानी जमा करने की क्षमता पर PCA के मई 2026 के सप्लीमेंटल फैसले ने भी इस बात की पुष्टि की कि IWT पश्चिमी नदियों पर भारत के नियंत्रण पर वास्तविक और बाध्यकारी सीमाएं लगाता है। पाकिस्तान ने PCA के फैसले का स्वागत किया और अपनी बात दोहराई कि IWT में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी भी पक्ष को इसे एकतरफा तौर पर सस्पेंड करने, कुछ समय के लिए रोकने या खत्म करने की इजाजत दे।

हेग कोर्ट के फैसले के बाद पाकिस्तान का कानूनी पैंतरा

तारिक अहमद अब्रो ने लिखा है कि पाकिस्तान का कहना है कि आर्टिकल XII के तहत यह संधि तब तक लागू रहेगी जब तक कि दोनों सरकारों के बीच विधिवत रूप से मंजूर की गई किसी संधि के जरिए इसे खत्म न किया जाए। इस्लामाबाद ने संधि के संस्थागत और विवाद-समाधान ढांचे – जिसमें परमानेंट इंडस कमीशन और आर्टिकल IX के तहत मौजूद तंत्र शामिल हैं उसपर भी लगातार जोर दिया है। साथ ही उसका तर्क है कि सिंधु जल से जुड़े मतभेदों को एकतरफा कार्रवाई के बजाय उसी ढांचे के भीतर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सुलझाया जाना चाहिए।

उन्होंने लिखा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार की तरफ से पानी का हथियार के तौर पर इस्तेमाल न सिर्फ पूरे देश की जल सुरक्षा के लिए खतरा है बल्कि इससे संधि के तहत तय संसाधनों के बंटवारे का विवाद भू-राजनीतिक दबाव का एक बड़ा जरिया भी बन सकता है। इसीलिए IWT (सिंधु जल संधि) के विवाद सुलझाने के लिए तय कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए असहमति को सुलझाने का एक संस्थागत ढांचा देते हैं।

उन्होंने लिखा है कि जब ऐसे तरीकों को नजरअंदाज किया जाता है तो इसके नतीजे भारत-पाकिस्तान के मौजूदा विवाद से कहीं आगे तक जाते हैं और पहले से ही तनावपूर्ण इलाके में एक बड़े 'जल युद्ध' का खतरा पैदा हो जाता है।

लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।

अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है।

विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।

पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है।

पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए 'बेस्ट राइटर' अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है।

अभिजात के खास इंटरव्यू:

अभिजात शेखर आजाद का 'बॉर्डर-डिफेंस' नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं।... और पढ़ें

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