झारखंड डीजीपी नियुक्ति को लेकर केंद्र की अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तय किया सुनवाई का दिन
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दायर अवमानना याचिका को गुरुवार की सूची में रखा, जिसमें तदाशा मिश्रा को सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले डीजीपी नियुक्त करने को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने कहा कि यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विरुद्ध है, जो डीजीपी पद पर विचार किए जाने वाले अधिकारी के पास कम से कम छह महीने की सेवा शेष होने की मांग करती है। सुनवाई आज होगी।

सौजन्य से:- Jagran
झारखंड डीजीपी नियुक्ति विवाद: केंद्र की अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी अहम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका को सुनवाई के लिए गुरुवार को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है, ...और पढ़ें
HighLights
- सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले तदाशा मिश्रा को डीजीपी बनाने का मामला
- झारखंड सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका को सुनवाई के लिए गुरुवार को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है, जिसमें झारखंड सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है।
इस याचिका में वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा को झारखंड का पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किए जाने को चुनौती दी गई है। उनकी सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले यह नियुक्ति की गई थी।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति पर प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करके अवमानना किया है।
झारखंड सरकार ने 30 दिसंबर, 2025 को मिश्रा को डीजीपी के रूप में नियुक्त किया, जबकि वह अगले दिन ही सेवानिवृत्त होने वाली थीं।
जबकि शीर्ष अदालत के निर्देश के अनुसार, डीजीपी पद के लिए विचार करने किए जाने वाले अधिकारी की कम से कम छह महीने की सेवा शेष होनी चाहिए, ताकि पुलिस में नेतृत्व में स्थिरता और योग्यता सुनिश्चित की जा सके।
मेहता ने बुधवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ से अनुरोध किया कि अवमानना याचिका को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। चीफ जस्टिस ने कहा कि केंद्र की याचिका भी गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की जाएगी।
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