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सुप्रीम कोर्ट: ‘हम इस पर विचार करेंगे और फैसला लेंगे’—मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर 2023 के कानून के चुनौती याचिका

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जल्द ही उस याचिका पर निर्णय करेगा जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर लागू 2023 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को वृहद संविधान पीठ को भेजने के आदेश को वापस लेने की मांग की गई है। याचिका प्रथम जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ में पेश की गयी थी, पर बाद में उसे चीफ जस्टिस के समक्ष लाया गया। कोर्ट ने पुष्टि की कि इस मुद्दे पर ‘हम इस पर विचार करेंगे और फैसला लेंगे’।

8 अक्टूबर 2026 को 04:04 am बजे
सुप्रीम कोर्ट: ‘हम इस पर विचार करेंगे और फैसला लेंगे’—मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर 2023 के कानून के चुनौती याचिका

सौजन्य से:- Navbharat Times

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट जल्द ही उस अर्जी को लिस्ट करने पर फैसला करेगा जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाले मामले को संविधान पीठ को सौंपने के आदेश को वापस लेने की मांग की गई है।

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर विचार करने पर बुधवार को सहमति जताई, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को वृहद संविधान पीठ को भेजे जाने के सवाल पर आए उसके हालिया खंडित फैसले को वापस लेने का अनुरोध किया गया है।

23 सितंबर को अलग-अलग राय दी थी

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने 23 सितंबर को इस मुद्दे पर अलग-अलग राय दी थी कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों के चयन के लिए गठित समिति से भारत के प्रधान न्यायाधीश को बाहर रखने वाले 2023 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को वृहद संविधान पीठ को भेजा जाए या नहीं।

पीठ ने कहा था कि विचारों में अंतर के कारण मामले को प्रशासनिक स्तर पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष पेश किया जाए ताकि प्रभावी और आधिकारिक फैसले के लिए उचित संख्या वाली पीठ का गठन किया जा सके।

'हम इस पर विचार करेंगे और फैसला लेंगे'

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने फैसले को वापस लेने के अनुरोध वाली याचिका का बुधवार को उल्लेख किया। सीजेआई ने कहा, 'हम इस पर विचार करेंगे और फैसला लेंगे।'

शंकरनारायणन ने पीठ को बताया कि इस याचिका का उल्लेख पहले जस्टिस दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया गया था लेकिन बाद में मामला उस पीठ से हटा लिया गया और उन्हें इसे चीफ जस्टिस के समक्ष रखने को कहा गया।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, 'मुख्य निर्वाचन आयुक्त से जुड़े मुद्दे पर खंडित फैसला आया है। हमने फैसले को वापस लेने के अनुरोध वाली याचिका का उल्लेख किया है।'

कोई अन्य अंतरिम याचिका भी दाखिल की गई है?

चीफ जस्टिस ने जब पूछा कि क्या कोई अन्य अंतरिम याचिका भी दाखिल की गई है तो शंकरनारायणन ने कहा कि एक उपचारात्मक (क्यूरेटिव) याचिका भी दाखिल की गई है लेकिन फैसले को वापस लेने के अनुरोध वाली याचिका उससे अलग है। उन्होंने कहा, 'एक उपचारात्मक याचिका दाखिल की गई है। मेरा मानना है कि उस पर अलग तरीके से विचार होगा। वह सुनवाई योग्य है या नहीं, मुझे नहीं पता। हमारी अंतरिम याचिका फैसले को वापस लेने के लिए है। उपचारात्मक याचिका में अक्सर पुनर्विचार की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी होता है।'

23 सितंबर को क्या हुआ था?

यह घटनाक्रम जस्टिस दत्ता और जस्टिस शर्मा की दो सदस्यीय पीठ द्वारा 23 सितंबर को केंद्र के उस अनुरोध पर अलग-अलग राय दिए जाने के बाद सामने आया है, जिसमें 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी संविधान पीठ को भेजने का अनुरोध किया गया था। जस्टिस दत्ता ने केंद्र का अनुरोध खारिज कर दिया था जबकि जस्टिस शर्मा ने मामले को वृहद पीठ के समक्ष रखने का समर्थन किया था।

लेखक के बारे मेंवरुण शैलेशवरुण शैलेश, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। वह अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स से जुड़े और होमपेज टीम का हिस्सा बने। वह शिफ्ट और होमपेज की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ न्यूज की प्रभावी प्लानिंग, खबर लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उन्हें प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल न्यूज टीम में काम करने का लंबा अनुभव है। इस दौरान डेस्क के साथ रिपोर्टिंग का अनुभव भी हासिल किया। सियासी गलियारे में होने वाली हलचलों, सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों, समाज में सांस्कृतिक बदलावों पर नजर रखते हैं। करंट अफेयर्स को लेकर सचेत रहने वाले वरुण शैलेश रोजाना खबरों को विभिन्न एंगल से प्रस्तुत करने को लेकर एक्टिव रहते हैं। वैश्विक राजनीति का देश की सियासत पर पड़ने वाले असर, जियोपॉलिटिकल सिचुएशन के लिहाज से खबरों के प्रजेंटेशन में महारत रखते हैं। वरुण शैलेश न्यूज को चैलेंज की तरह लेते हैं और खबरों की दुनिया को एन्जॉय करते हैं।

विशेषज्ञताः करंट अफेयर्स, ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक खबरों के साथ ग्लोबल पॉलिटकल सिचुएशन का देश की राजनीति पर पड़ने वाले असर के लिहाज से खबरों को प्रस्तुत करते हैं। सोशल जस्टिस, चाइल्ड प्रोटेक्शन से जुड़े इश्यूज पर पकड़।

पत्रकारिता का अनुभवः वरुण शैलेश ने वर्ष 2009 में इंडो एशियन न्यूज सर्विस (IANS)से करियर की शुरुआत की, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग और खबरों के संपादन में महारत हासिल की। इसके बाद हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) से जुड़े और सेंट्रल डेस्क पर पांच साल से ज्यादा समय तक रहे। इस दौरान, उन्होंने लोकसभा चुनाव 2014 के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली विधानसभा चुनावों से जुड़ी खबरों के संपादन की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद दैनिक जागरण के संपादकीय पेज और Op-ed पेज पर रहे। इस दौरान विभिन्न विषयों के नामचीन लेखकों, वरिष्ठ पत्रकारों के लेखों के संपादन के साथ साथ आइडिएशन, संपादन की जिम्मेदारी संभाली। 2018 में आजतक (डिजिटल) टीम का हिस्सा बने। आजतक में मुख्य न्यूज टीम का हिस्सा रहे। इस दौरान लोकसभा चुनाव 2019, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली विधानसभा चुनावों को कवर किया। दिल्ली में विभिन्न पॉलिटकल गतिवियों को कवर किया। आजतक में इंटरनेशनल-फीचर टीम को भी लीड किया। आजतक डिजिटल में इंटरनेशनल पेज को दूसरा सबसे अधिक नंबर लाने वाले सेक्शन के तौर पर स्थापित किया। दैनिक भास्कर (डिजिटल) में वुमन सेक्शन (फीचर) टीम को लीड किया। इस दौरान आइडिएशन, प्रभावी प्लानिंग की जिम्मेदारी संभालने के साथ साथ हेल्थ, क्राइम, फूड और सोशल इश्यूज पर जमकर लिखा।

वरुण शैलेश ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से सोशियोलॉजी (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया। फिर भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर की डिग्री भी हासिल की।... और पढ़ें

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