दिल्ली हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के नॉन‑कम्प्लायंस को लेकर सरकार व एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट माँगी
दिल्ली हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़ी एक प्राथमिकी की सुनवाई के दौरान सरकारी अधिकारियों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को सख्ती से न लागू करने का प्रश्न उठाया और स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। कोर्ट ने बताया कि इस चूक से जनता को परेशानी हो रही है और आवश्यक कार्यवाही न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है।

सौजन्य से:- Jagran
'आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश नहीं हो रहे लागू', दिल्ली HC ने सरकार व एजेंसियों से तलब की रिपोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने पर दिल्ली सरकार और अन्य ...और पढ़ें
HighLights
- दिल्ली हाई कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर सरकार से रिपोर्ट मांगी।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न होने पर सवाल उठाए।
- जनता को हो रही परेशानी पर अदालत ने चिंता जताई।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन नहीं करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार सहित अन्य एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है।
आवारा कुत्तों से जुड़ी एक प्राथमिकी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारी शीर्ष अदालत के निर्देशाें का सख्ती से पालन नहीं कर रहे।
इससे जनता को परेशानी हो रही है। याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
क्या है बीएनएस की धारा 325?
याचिकाकर्ता आदित्य विक्रम बोहरा ने याचिका दायर कर अपने खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 325 के तहत हुई प्राथमिकी को रद करने की मांग की है। इसके तहत प्रविधान किसी जानवर को मारकर, जहर देकर, अपंग बनाकर या बेकार करके नुकसान पहुंचाने के अपराध के लिए सजा का प्रविधान है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि आरोपित ने आवारा कुत्ते से खुद को बचाने के लिए सिर्फ एक खिलौना बंदूक का इस्तेमाल किया था और क्योंकि कुत्ते को न तो मारा गया, न अपंग किया गया और न ही जहर दिया गया, इसलिए बीएनएस की धारा-325 के तहत कोई अपराध नहीं बनता है।
'लोग रोटी तो खिला रहे, लेकिन पाल नहीं रहे'
याचिकाकर्ता से सहमति व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा कि संबंधित सरकारी अधिकारी आवारा कुत्तों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को सख्ती से लागू करने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं और इसके कारण जनता को परेशानी हो रही है।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि कुछ लोग आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, लेकिन उन्हें पालतू जानवर के तौर पर रखने की जिम्मेदारी नहीं लेते, जबकि कुत्ते उन्हें खाना खिलाने वालों के लिए पालतू जानवरों की तरह व्यवहार करते रहते हैं।
...तो अवमानना की शुरू होगी कार्यवाही
उन्होंने पीठ को बताया कि पुलिस या नगर निगम के अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में संबंधित आवारा कुत्ता उसी इलाके में बना रहा।
अदालत ने रिकाॅर्ड पर लिया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों के संबंध में दिए गए निर्देश के बाद दिल्ली हाई कोर्ट की एक अन्य पीठ ने स्वत: संज्ञान की कार्यवाही शुरू की थी और दिल्ली सरकार सहित अन्य एजेंसियों से रिपोर्ट मांगी थी।
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि न्यायिक निर्देशों का पालन न करने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ संबंधित हाई कोर्ट अवमानना की कार्यवाही शुरू करने सहित उचित कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह से अधिकृत होंगे।
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